सूखे में भी संत पॉल रोड में जमा है नाले का गंदा पानी

Updated at : 02 Jul 2019 7:17 AM (IST)
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सूखे में भी संत पॉल रोड में जमा है नाले का गंदा पानी

सासाराम नगर : शहर के वार्ड नौ स्थित संत पॉल रोड में जल निकासी कि व्यवस्था नहीं है. बरसात शुरू होने से पहले ही इस रोड में नाले का पानी जमा हो गया है. सबसे बदतर स्थिति रेलवे अंडर पास पुलिया का है. पुलिया के नीचे तीन फुट नाले का गंदा पानी लगा है. पुराने […]

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सासाराम नगर : शहर के वार्ड नौ स्थित संत पॉल रोड में जल निकासी कि व्यवस्था नहीं है. बरसात शुरू होने से पहले ही इस रोड में नाले का पानी जमा हो गया है. सबसे बदतर स्थिति रेलवे अंडर पास पुलिया का है. पुलिया के नीचे तीन फुट नाले का गंदा पानी लगा है. पुराने जीटी रोड से तकिया जाने के लिए यही पुलिया एक मात्र शॉट कट रास्ता है.

पुलिया का रास्ता बंद हो जाने से सबसे ज्यादा परेशानी स्कूल और कॉलेज जाने वाले छात्रों को हो रही है. सासाराम शहर के बीच रेलवे ट्रैक है. दोनों तरफ स्कूल, कॉलेज और बाजार हैं. दोनों तरफ लोगों का आना-जाना होता है. पुलिया का रास्ता बंद होने से तीन किलोमीटर की दूरी तय कर ओवरब्रिज होते हुए तकिया जाना पड़ रहा है.
पुराने नाले का मिट गया अस्तित्व अतिक्रमण कर लोगों ने बना लिया मकान : जानकार बताते हैं कि संत पॉल रोड नया नाम पड़ा है. पहले इसे छोटी लाइन के नाम से जाना जाता था. 70 के दशक तक इसी रास्ते मार्टिन रेलवे अधिकृत छोटी लाइन थी. आरा से कैमूर पहाड़ी के तराई तक ट्रेन चलती थी. 1970 के बाद छोटी लाइन को बंद कर दिया गया. छोटी लाइन से सटे रेलवे का चाट था.
इसी चाट से होकर शहर के आधे क्षेत्र का पानी निकल कर तकिया स्थित रेलवे चाट में जाता था. जैसे-जैसे शहर बढ़ता गया, लोग रेलवे चाट को भर कर कब्जा करना शुरू किये. पहले झोंपड़ी डाले, जब किसी ने विरोध नहीं किया, तो झोंपड़ी को हटा कर वहां आलिशान मकान बना लिए.
अब स्थिति यह है कि रेलवे चाट का अस्तित्व ही समाप्त हो गया. कुछ लोगों की जमीन हड़पने कि नियत का खामियाजा वार्ड नौ के लोग भुगत रहे हैं. प्रशासन कि अनदेखी से इस वार्ड की समस्या जटिल होती जा रही है. इस मामले को लेकर नगर पर्षद भी गंभीर नहीं है.
कहती हैं वार्ड पार्षद
मैं पहली बार इस वार्ड का प्रतिनिधत्व कर रहीं हूं. इस वार्ड में कई जटिल समस्याएं हैं. दो वर्ष से ज्यादा हो गया नप सरकार शहर के किसी वार्ड के लिए कोई कार्य योजना नहीं ला सकी हैं. अपनी नाकामी को छिपाने के लिए मुख्य पार्षद 13 जून को इस्तीफा भी दे दी. वार्ड की समस्या को कई बार बोर्ड की बैठक में उठाया गया.
लेकिन, नप सरकार हमेशा नजर अंदाज करती रही. इस वार्ड के नागरिक पेयजल, लाइट, जल जमाव की समस्या से जूझ रहे हैं, जब तक नप में किसी दूसरे के नेतृत्व में नयी सरकार नहीं बनेगी, शहर की समस्या दूर नहीं होगी.
पूनम सिंह, वार्ड पार्षद, नौ
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