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रक्सौल - काठमांडू रेलखंड पर खर्च होगी 25 हजार करोड़ की राशि, 141 किमी के बीच बनेंगे 32 सुरंग

Updated at : 20 Jul 2023 4:52 PM (IST)
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रक्सौल - काठमांडू रेलखंड पर खर्च होगी 25 हजार करोड़ की राशि, 141 किमी के बीच बनेंगे 32 सुरंग

भारत सरकार के द्वारा रक्सौल से काठमांडू तक रेललाइन निर्माण को लेकर कराये गये अंतिम सर्वे की रिपोर्ट के अनुसार रक्सौल से काठमांडू तक विद्युतीकरण के साथ नयी ब्रॉड गेज लाइन बनाने में 250 अरब रुपये की लगात आयेगी.

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रक्सौल. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट रक्सौल-काठमांडू रेललाइन के निर्माण पर लगभग 250 अरब यानी 25 हजार करोड़ की राशि खर्च हो सकती है. भारत सरकार के द्वारा रक्सौल से काठमांडू तक रेललाइन निर्माण को लेकर कराये गये अंतिम सर्वे की रिपोर्ट के अनुसार रक्सौल से काठमांडू तक विद्युतीकरण के साथ नयी ब्रॉड गेज लाइन बनाने में 250 अरब रुपये की लगात आयेगी. हालांकि इस लागत में जमीन के लिए दी जाने वाली मुआवजे की राशि को नहीं जोड़ा गया है.

लगभग 7 अरब रुपये जमीन के लिए मुआवजा भी देना होगा

एक अनुमान के अनुसार रक्सौल से काठमांडू तक 140.79 किलोमीटर लंबी रेललाइन निर्माण लगभग 7 अरब रुपये जमीन के लिए मुआवजा भी देना होगा. रक्सौल से काठमांडू रेललाइन निर्माण को लेकर फाइनल लोकेशन सर्वे रिपोर्ट कोंकण रेलवे के द्वारा तैयार की गयी है, जिसे अधिकारिक तौर पर भारत सरकार के द्वारा नेपाल को सौंप दिया गया है.

रेललाइन का मात्र चार किलोमीटर भारतीय सीमा में

फाइनल सर्वे रिपोर्ट के अनुसार रक्सौल से काठमांडू रेललाइन का मात्र चार किलोमीटर भारतीय सीमा में होगा, इसके बाद यह रेललाइन नेपाल में प्रवेश कर जायेगी. नेपाल के पर्सा, बारा, रौतहट, मकवानपुर होते हुए ललीतपुर व काठमांडू तक रेल लाइन बिछायी जानी है. इसके लिए लगभग 15 सौ हेक्टेयर जमीन का प्रयोग रेल मार्ग निर्माण के लिए किया जायेगा.

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रेललाइन के निर्माण में करीब 5 साल का वक्त लगेगा

नेपाल रेलवे के एक अधिकारी ने बताया कि ठेका होने के बाद रक्सौल-काठमांडू रेललाइन के निर्माण में करीब 5 साल का वक्त लगेगा. लगभग 141 किलोमीटर लंबे रेलखंड का 42 किलोमीटर का भाग सुरंग के अंदर से होकर गुजरेगा. इस रूट पर सुरंग की संख्या 32 होगी, जबकि 124 पुल का निर्माण किया जायेगा और रक्सौल से काठमांडू के बीच स्टेशन की संख्या 12 होगी.

चोभार सूखा बंदरगाह तक बनायी जायेगी

रक्सौल से बनने वाली लाइन नेपाल की राजधानी काठमांडू के चोभार सूखा बंदरगाह तक बनायी जायेगी. नेपाल रेल विभाग के महानिर्देशक रोहित बिसुराल ने बताया कि फाइनल सर्वे का अध्ययन करने के बाद भी इस रेल लाइन निर्माण को लेकर कैसे आगे बढ़ना है, इसकी रणनीति तैयार की जायेगी. उन्होंने कहा कि फाइनल सर्वे पर चर्चा हो रही है, कोई बदलाव की जरूरत होगी तो कराया जायेगा.

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अब ट्रेन से ढाई घंटे में ही पहुंच जाएंगे नेपाल

अब बिहार वासियों के नेपाल के सफर को आसान करने के लिए एक और नयी रेलवे लाइन बनने जा रही है. यहे रेलवे लाइन रक्सौल (बिहार) से काठमांडू (नेपाल की राजधानी) तक जाएगी. रेलवे लाइन के निर्माण के लिए साल 2018 में ही मंज़ूरी मिल चुकी है. अब तीसरे चरण के सर्वे का काम भी पूरा कर लिया गया है. इसके साथ ही 136 किलोमीटर लंबाई वाले रेल लाइन में 32 रोड ओवरब्रिज, 39 छोटी-बड़ी सुरंगें, 41 बड़े रेल पुल, 53 अंडरपास, 259 छोटे पुल भी होंगे. इसकी कुल लंबाई 41.87 किलोमीटर है.

रक्सौल-काठमांडू के बीच 136 किमी लंबी रेल लाइन कोंकण रेलवे कॉरपोरेशन लिमिटेड द्वारा तैयार इस रिपोर्ट के मुताबिक, रक्सौल से काठमांडू के बीच 136 किमी लंबी रेल लाइन बनाने की योजना है. यह रेल लाइन रक्सौल स्टेशन से निकलकर पंटोका के रास्ते नेपाल में एंट्री करेगी. इसके बाद नेपाल के निजगढ़ से बागमती नदी के किनारे-किनारे काठमांडू के खोकना तक रेल लाइन बनाने की योजना है. इस रेलवे लाइन में कुल 13 स्टेशनों का प्रावधान है. जिसमें रक्सौल, बीरगंज, बगही, पिपरा, धूमरवाना, काकड़ी, चंद्रपुर, धीयाल, शिखरपुर, सिसनेरी, सथिकेल और काठमांडू का नाम शामिल है.

40 किमी तक सुरंग में रेललाइन, बनेंगे 35 बड़े पुल

प्रस्तावित रेलखंड का करीब 40 किमी खंड सुरंग के अंदर से गुजरेगा. इस रूट पर 35 बड़े पुल बनाने की योजना है. रक्सौल से काठमांडू तक ब्रॉडगेज रेलवे लाइन बिछेगी. इस लाइन के बन जाने के बाद से भारत और नेपाल के संबंधों को नई दिशा मिलेगी. वीरगंज उद्योग वाणिज्य संघ के अध्यक्ष सुबोध गुप्ता ने फाइनल लोकेशन सर्वे पूरा होने पर हर्ष व्यक्त करते हुए कहा कि रक्सौल-काठमांडू रेल लाइन दोनों देश के रिश्तों के लिए मिल का पत्थर साबित होगी. हम सबकी कोशिश होगी कि इस प्रोजेक्ट को जल्द से जल्द पूरा किया जाए.

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