भवानीपुर. रामलाल महाविद्यालय परिसर के सभागार में रविवार को डॉक्टर मुहम्मद कमाल की अध्यक्षता में विश्व हिंदी दिवस की संगोष्ठी आयोजित की गई. डॉक्टर कमाल ने कहा कि राष्ट्रीय एकता और हिंदी हमारी मातृभाषा ही नहीं बल्कि हमारी सस्कृति और पहचान की आत्मा है. हिंदी भाषा नहीं भावों की अभिव्यक्ति है, यह मातृभूमि पर मर मिटने की भक्ति है. उन्होंने कहा हमें अपनी मातृभाषा की शत प्रतिशत प्रयोग करना चाहिए बहुत ऐसे अंग्रेजी शब्द हैं जिनका उपयोग हम हिंदी के रूप में करते हैं. उस अंग्रेजी शब्द का अर्थ हम हिंदी में नहीं जान पाते हैं. स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान हिंदी हमारे देश की राष्ट्रभाषा थी लेकिन वर्तमान समय में हिंदी अपने अस्तित्व के लिए संघर्ष कर रही है.. देश की सीमाओं की रक्षा से अधिक जरूरी है मातृभाषा की रक्षा. शिक्षक एवं शिक्षकेतर कर्मी ने अपने अपने विचार व्यक्त किये. मौके पर सभी शिक्षक एवं शिक्षक शिक्षकेतर कर्मी के साथ-साथ छात्र-छात्राएं उपस्थित थे.
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