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दुग्ध उत्पादन ने पूर्णिया में दिये स्वरोजगार के नये अवसर, उद्योगों को मिला बढ़ावा

Updated at : 31 May 2024 10:07 PM (IST)
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दुग्ध उत्पादन ने पूर्णिया में दिये स्वरोजगार के नये अवसर, उद्योगों को मिला बढ़ावा

purnia news : जिले में प्रशासनिक पहल ने भी दुग्ध उत्पादन को गति दी और बड़े पैमाने पर समितियों के माध्यम से दूध का कारोबार बढ़तागया.

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Purnia news : हाल के वर्षों में दुग्ध उत्पादन के प्रति किसानों के बढ़ते रुझान ने पूर्णिया में स्वरोजगार के कई नये अवसर दिये हैं. यही वजह है कि जिले में दूध से जुड़े उद्योग भी शुरू हुए. दुग्ध उत्पादन में जिले को आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रशासनिक प्रयास भी लगातार होते रहे हैं. इससे यहां न केवल दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा मिला है, बल्कि खपत के हिसाब से दूध की आपूर्ति भी होने लगी है. यही वजह है कि आज पारिवारिक जरूरत की पूर्ति से उठकर दूध का व्यवसाय फायदेमंद साबित हो रहा है. इसी का नतीजा है कि पूर्णिया में दूध का कारोबार बहंगी से साइकिल, बाइक और बड़े टैंकरों तक पहुंच गया. दूसरी ओर पशुओं के नस्ल परिवर्तन से भी दुग्ध के उत्पादन में क्रांतिकारी बदलाव आये. बड़े-बड़े डेयरी के माध्यम से यह एक उद्योग बनता गया. जिले में प्रशासनिक पहल ने भी दुग्ध उत्पादन को गति दी और बड़े पैमाने पर समितियों के माध्यम से दूध का कारोबार बढ़तागया.

आत्मनिर्भर बनाने के लिए डीएम ने की पहल

जिले को दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में पहल करते हुए बीते वर्ष एक बैठक में जिलाधिकारी कुंदन कुमार ने इसे महाअभियान बनाकर मिल्क नेटवर्क प्रोजेक्ट का रूप देकर कॉम्फेड, कृषि विभाग, पशुपालन विभाग तथा गव्य विकास विभाग को संयुक्त रूप से कार्य करते हुए डेयरी क्षेत्र को बढ़ाने के निर्देश दिए थे. ब्रीडिंग और कैटल फीड उत्पादन पर भी जोर देने का निर्देश जारी किया था. इस दिशा में इच्छुक पशुपालकों को सरकारी नियमानुसार संसाधन तथा ऋण सुविधा उपलब्ध कराये जा रहे हैं.

कोशी डेयरी की स्थापना ने बढ़ाया कारोबार

पूर्णिया में कोशी डेयरी प्रोजेक्ट की स्थापना ने यहां के दूध कारोबार को बढ़ाने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका अदा की. साथ ही आम उपभोक्ताओं का विश्वास जीतने में भी इसे कामयाबी मिली. इसकी बदौलत सिर्फ उपभोक्ता ही नहीं, बल्कि समितियों की भी संख्या बढ़ती गयी. फिलवक्त कोशी डेयरी प्रोजेक्ट पूर्णिया प्रमंडल के अंतर्गत निबंधित 900 दुग्ध संग्रहण केंद्र समितियां हैं. इनमें पूर्णिया में 440, कटिहार में 202, किशनगंज में 32 एवं अररिया में 135 समितियां रजिस्टर्ड हैं. दुग्ध उत्पादन के मामले में पूर्णिया से प्रतिदिन लगभग 70 हजार लीटर, कटिहार से 25 हजार लीटर, किशनगंज से 1500 लीटर तथा अररिया से 15 हजार लीटर दूध की अधिप्राप्ति की जाती है. यहां प्रोसेसिंग, चिलिंग तथा पैकेजिंग का कार्य होता है. इन चार जिलों के अलावा इस डेयरी का दूध पश्चिम बंगाल के इस्लामपुर तथा सिलीगुड़ी तक पहुंचाया जाता है.

कुल उत्पादन का आधा पी जाते हैं पूर्णियावासी

मार्केटिंग इंचार्ज कुमार अमरदीप ने बताया कि पूर्णिया सेंटर से प्रतिदिन 01 लाख 25 हजार लीटर दूध की खपत है. इनमें जिले में अमूमन 55 से 60 हजार लीटर, कटिहार में 23 हजार लीटर, किशनगंज में 12 हजार लीटर तथा अररिया में 35 हजार लीटर दूध की औसत खपत होती है. सेंटर के मुताबिक यहां डिमांड की पूर्ति शत-प्रतिशत हो जाती है, जबकि कमी होने पर बरौनी एवं आरा डेयरी से दूध मंगाना पड़ताहै. उन्होंने कहा कि शुरुआती दिनों में गर्मी के समय दूध के उत्पादन में कमी होती थी, लेकिन डेयरी के प्रति बढ़ते रुझान से पशुपालक जागरूक हुए हैं और अब किसी भी सीजन में दूध की कमी लगभग नहीं के बराबर होती है. कोशी डेयरी प्रोजेक्ट पूर्णिया की ओर से पूरे वर्ष भर जागरूकता कार्यक्रम किसानों के बीच आर्गनाइज किया जाता है. पशु चिकित्सकों की टीम है, जो इनकी देखभाल में लगी रहती है.

आइटी का काम छोड़ चला रहे डेयरी

जिले में बगैर किसी से संबद्ध हुए भी सैकड़ों छोटे-बड़े डेयरी चल रहे हैं, जिनका संचालन व्यक्तिगत स्तर पर किया जा रहा है. इनके द्वारा उत्पादित दूध को छोटे-बड़े कंटेनरों के माध्यम से आम घरों तक पहुंचाया जाता है. इन्हीं में से एक नाम इंद्र चौरसिया का भी आता है, जिन्होंने दिल्ली में अपनी जमे जमाये आईटी के कारोबार को छोड़कर डेयरी संचालन का कार्य शुरू किया और धीरे धीरे दूध में वैल्यू एडिशन करते हुए उसके अनेक उत्पादों को तैयार कर उसे आज शहर के लोगों को उपलब्ध करा रहे हैं. इंद्र चौरसिया कहते हैं कि किसी भी कारोबार को ज्यादा लाभप्रद बनाने के लिए उससे जुड़े हर पहलू पर काम करने की जरूरत होती है. इसी में एक नाम आता है वैल्यू एडिशन का. खेती-किसानी पृष्ठभूमि की वजह से हमने डेयरी से जुड़े हर क्षेत्र को धीरे-धीरे इससे लिंक किया. आज दूध के उत्पादन के साथ-साथ दूध से बने अनेक उत्पाद, वर्मी कंपोस्ट, जैविक खेती आदि का लाभ भी मिल रहा है.

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Sharat Chandra Tripathi

लेखक के बारे में

By Sharat Chandra Tripathi

Sharat Chandra Tripathi is a contributor at Prabhat Khabar.

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