आज का दर्शन: पूर्णिया के मां कालरात्रि मंदिर में अटूट आस्था, रोज होती है पूजा-अर्चना

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माता कालरात्रि की प्रतिमा | Prabhat Khabar Network

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पूर्णिया में एक ऐसा अनोखा मंदिर है जहाँ मां दुर्गा के सातवें स्वरूप मां कालरात्रि की पूजा सालभर नियमित रूप से होती है. गोकुलकृष्ण ठाकुरबाड़ी परिसर स्थित यह मंदिर भक्तों की गहरी आस्था का केंद्र है, जहाँ दूर-दूर से श्रद्धालु अपनी मनोकामनाएं लेकर आते हैं.

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पूर्णिया : आमतौर पर मां दुर्गा के सातवें स्वरूप मां कालरात्रि की विशेष पूजा नवरात्र के दौरान की जाती है, लेकिन पूर्णिया में एक ऐसा मंदिर है जहां वर्षभर मां कालरात्रि की नियमित पूजा-अर्चना होती है. शहर के गोकुलकृष्ण ठाकुरबाड़ी परिसर स्थित इस मंदिर में दूर-दूर से श्रद्धालु अपनी मनोकामनाएं लेकर पहुंचते हैं. भक्तों के बीच इस मंदिर की गहरी आस्था और विशेष मान्यता है.

गोकुलकृष्ण ठाकुरबाड़ी परिसर में स्थापित मां कालरात्रि की प्रतिमा अपने शांत, दयामयी और मुस्कुराते स्वरूप के कारण श्रद्धालुओं को विशेष रूप से आकर्षित करती है. वर्ष 2013 में इस प्रतिमा की प्राण प्रतिष्ठा महामंडलेश्वर के सान्निध्य में की गई थी. इस अवसर पर तत्कालीन महंत प्रेमदास, मोती बाबा सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित थे. मंदिर में प्रतिदिन सुबह और शाम नियमित आरती तथा पूजा-अर्चना होती है.

महानिशा पूजा का है विशेष महत्व

शारदीय और वासंतिक नवरात्र के दौरान सप्तमी तिथि की महानिशा पूजा यहां विशेष आकर्षण का केंद्र होती है. धार्मिक मान्यता है कि नवरात्र के सातवें दिन मां कालरात्रि की आराधना करने से भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं. इसी विश्वास के साथ बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचकर मध्यरात्रि में होने वाली महानिशा पूजा में शामिल होते हैं.

महानिशा पूजा के अवसर पर मंदिर समिति की ओर से श्रद्धालुओं के लिए विशेष व्यवस्था की जाती है, ताकि दर्शन और पूजा के दौरान किसी प्रकार की असुविधा न हो.

दर्शन और पूजा के लिए उमड़ते हैं श्रद्धालु

शारदीय और वासंतिक नवरात्र के दौरान मां कालरात्रि के दर्शन और पूजा के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचते हैं. मंदिर प्रबंधन द्वारा बाहर से आने वाले भक्तों के लिए भी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं.

धार्मिक मान्यता के अनुसार मां कालरात्रि की आराधना से संतान सुख की प्राप्ति होती है और जीवन के दुख-दर्द दूर होते हैं. यही कारण है कि यहां अपनी मनोकामना लेकर आने वाले श्रद्धालुओं, विशेषकर महिलाओं की संख्या अधिक रहती है.


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अखिलेश चंद्रा

लेखक के बारे में

By अखिलेश चंद्रा

अखिलेश चंद्रा प्रिंट माध्यम में 30 और डिजिटल माध्यम में पिछले 5 वर्षों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. सामाजिक सरोकार, शिक्षा, अनुसंधान, राजनीति, कला-संस्कृति की खबरों में रुचि रखते हैं.

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