Purnia news : भूमि उपलब्ध होने के बाद भी जमीन पर नहीं उतर सकी डॉप्लर वेदर रडार लगाने की योजना

Published by : Sharat Chandra Tripathi Updated At : 12 Jul 2024 8:26 PM

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Purnia news : मौसम विज्ञान केंद्र को अपनी जमीन उपलब्ध होने के बाद भी आज तक न तो भवन का निर्माण हो सका है और न ही डॉप्लर वेदर रडार लगा है.

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Purnia news : प्रमंडलीय मुख्यालय का मौसम विभाग आज भी अंग्रेजिया जमाने के छोटे से कमरे में चल रहा है. मौसम विज्ञान केंद्र को अपनी जमीन उपलब्ध होने के बाद भी आज तक न तो भवन का निर्माण हो सका है और न ही डॉप्लर वेदररडार लगा है. मौसम केंद्र को 15 हजार वर्ग फिट जमीन खरीदे हुए करीब सात महीने से अधिक हो गये हैं, बावजूद रडार नहीं लग सका है. हालांकि मौसम केंद्र में कार्यरत पदाधिकारियों के लिए पोर्टा केबिन जरूर बना है, जिसमें कार्यालय का काम-काज चल रहा है.

सरकार कर रही अनदेखी

पूर्णिया में 1874 के बने अंग्रेजों के जमाने के जर्जर भवन में मौसम विभाग का कार्यालय चल रहा है. यहीं से मौसम की जानकारी मिल रही है. जानकारों की मानें तो मौसम केंद्र को पर्याप्त जमीन है. सरकार की अनदेखी की वजह से रडार स्थापना की योजना जमीन पर नहीं उतर सकी है, जबकि विभाग के वरीय अधिकारियों द्वारा पूर्णिया मौसम विज्ञान केंद्र को जल्द ही विकसित किये जाने का भरोसा दिलाया गया था. कहा गया था कि यहां मौसम की सटीक जानकारी के लिए कई बड़े-बड़े उपक्रम लगाए जाएंगे. पर, पूर्णिया मौसम विज्ञान केंद्र को पोर्टा केबिन देकर नजरअंदाज कर दिया गया है. सारी योजनाएं फाइलों में दबी पड़ीहैं. भवन निर्माण नहीं होने से मौसम के पूर्वानुमान के आकलन को लेकर उच्च क्षमता के यंत्र यहां नहीं लग पा रहे हैं. पूर्णिया मौसम विभाग कोसी व सीमांचल ही नहीं, उत्तर बिहार के लिए महत्वपूर्ण केंद्र है. यह इलाका नेपाल व बांग्लादेश की सीमा से बिल्कुल सटा हुआ है, जबकि चीन की सीमा भी बहुत ज्यादा दूर नहीं है.

रडार लगने से मिलेगी चक्रवाती तूफान की सूचना

विभागीय जानकारों के मुताबिक रडार लगने से चक्रवाती तूफान से होनेवाले नुकसान में कमी आएगी. बंगाल की खाड़ी भी यहां से नजदीक है. पूर्व से ही यह इलाका चक्रवाती तूफान के क्षेत्र में आता रहा है. इससे जान-माल का भी व्यापक नुकसान होता है. यहां रडार स्थापित होने से इस तरह की प्राकृतिक हलचल का पूर्वानुमान यहां आसानी हो जाएगा. इससे समय रहते अलर्ट जारी होगा और लोगों को इन आपदाओं से कम से कम नुकसान होगा. इसी तरह उच्च क्षमता रडार से आसमान की स्वाभाविक निगरानी भी होने लगेगी, जो काफी फायदेमंद होगी.

अगले साल तक है रडार लगने की संभावना

उपलब्ध जानकारी के मुताबिक विभागीय स्तर पर योजनाओं को जमीन पर लाने की कवायद चल रही है. इसके लिए विदेशी कंपनी को विभाग की ओर से बोला गया है. यह संभावना है कि अगले साल रडार की यहां स्थापना हो जायेगी. भवन नहीं भी बने तो एक टावर बना कर रडार स्थापित किया जाएगा. पर, इससे पहले बाउंड्री का निर्माण किया जायेगा.रडार लगने से करीब डेढ़ सौ किलोमीटर के क्षेत्र में होनेवाली बारिश, मेघ गर्जन, वज्रपात समेत अन्य मौसम की सूचनाएं तीन से चार घंटे पहले लोगों को मिल जाएंगी. इससे लोग सतर्क हो जाएंगे और नुकसान कम होगा.रडार लगने से कोसी-सीमांचल के सभी जिलों के अलावा भागलपुर, बांका समेत मधुबनी जिले तक के क्षेत्र में मौसम पूर्वानुमान कि जानकारी मिलेगी.

योजना पर बहुत जल्द काम होगा

प्रभारी पदाधिकारी मौसम विभाग डीके भारती ने बताया कि योजना पर बहुत जल्द काम होगा. पहले फेज में बाउंड्री का निर्माण होगा. इसके बाद भवन का निर्माण होगा. बाउंड्री के लिए स्टीमेट केंद्रीय लोक निर्माण विभाग, भागलपुर डिवीजन में भेजा गया है. इसके बाद जल्द ही बाउंड्री का निर्माण किया जायेगा. प्रभारी ने बताया कि पूर्णिया मौसम विज्ञान केंद्र के लिए एक्स वेंडर रडार दिया जायेगा.

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