कला भवन में मंचित हुआ नाटक 'डार्कनेस ऑफ सोसायटी', चित्रकार के जीवन के दर्द और उम्मीद की दिखी मर्मस्पर्शी कहानी

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फोटो - नाटक की प्रस्तुति देते कलाकार | Prabhat Khabar Network

नाटक की प्रस्तुति देते कलाकार | Prabhat Khabar Network

पूर्णिया के कला भवन में 'कलाकारों का मंच' के तहत 'डार्कनेस ऑफ सोसायटी' नाटक का सफल आयोजन हुआ. यह नाटक एक चित्रकार के जीवन के संघर्ष, दर्द और अंततः उम्मीद की कहानी को दर्शाता है.

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पूर्णिया स्थित कला भवन नाट्य विभाग द्वारा प्रख्यात साहित्यकार डॉ. लक्ष्मी नारायण सुधांशु की पावन स्मृति में मासिक कार्यक्रम 'कलाकारों का मंच' का सफल आयोजन किया गया. इस अवसर पर नाट्य विभाग की ओर से अभिनव आनंद के सशक्त निर्देशन में नाटक "डार्कनेस ऑफ सोसायटी" (Darkness of Society) की जीवंत और मर्मस्पर्शी प्रस्तुति दी गई, जिसे देखकर दर्शक भावविभोर हो गए.

वरिष्ठ रंगकर्मियों ने कलाकारों का बढ़ाया उत्साह

कार्यक्रम की शुरुआत में संयोजक विश्वजीत कुमार सिंह ने उपस्थित दर्शकों का स्वागत करते हुए मासिक आयोजन की रूपरेखा प्रस्तुत की. नाट्य निर्देशक कुंदन कुमार सिंह ने कलाकारों को अपनी प्रतिभा को निखारने के लिए प्रेरित किया.

प्रबंध समिति के सदस्य जय वर्धन सिंह और वरिष्ठ रंगकर्मी अंजनी श्रीवास्तव ने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि यह मंच नए कलाकारों के लिए अपनी प्रतिभा को प्रदर्शित करने का एक बेहतरीन और सशक्त माध्यम बनकर उभर रहा है. कार्यक्रम का कुशल मंच संचालन रंगकर्मी प्रिया ने किया.

नाटक 'डार्कनेस ऑफ सोसायटी': दर्द से उम्मीद तक का सफर

अभिनव आनंद द्वारा निर्देशित नाटक की कहानी एक ऐसे प्रतिभावान पेंटर (चित्रकार) के इर्द-गिर्द घूमती है, जिसका जीवन दुखों और त्रासदियों से भरा होता है:

  • बचपन का दर्द: गांव में लगी आग में उसका आधा चेहरा झुलस जाता है, फिर पिता का साया उठ जाता है और बहन पर हुए अत्याचार के बावजूद न्याय नहीं मिलता.
  • कैनवास पर झलका दर्द: इन दुखों के बावजूद उसने हार नहीं मानी और एक महान चित्रकार बना, लेकिन उसकी हर पेंटिंग में आग, चीखें, अन्याय और समाज का खोखलापन ही दिखाई देता था.
  • सकारात्मक बदलाव: अंत में अपने सहयोगी के समझाने पर वह अपनी सोच बदलता है. अब उसकी कला में विनाश की जगह जीवन, खुशहाली और उम्मीद के नए रंग भर जाते हैं.

मंच और नेपथ्य के कलाकार

कलाकारों ने अपने बेहतरीन अभिनय से दर्शकों को अंत तक बांधे रखा.

  • मुख्य अभिनय: सुमित, तहसीन रज़ा, हिमालय, सुहानी, काजल, विक्रम कुमार, ओमकार कुमार, वर्षा रानी, रौनक कुमार, इरफान खान, नितिश कुमार आदि.
  • संगीत व बैकस्टेज: संगीत विशाल कुमार का था, जबकि बैकस्टेज और सह-निर्देशन में आदित्य कुमार, स्नेहा, निशा प्रवीण और विशाल आर्या सक्रिय रहे.
  • प्रकाश संयोजन (Light Design): वरिष्ठ रंगकर्मी व फिल्म अभिनेता अमित झा ने संभाला.

इस आयोजन को सफल बनाने में चंदन कुमार, शिवाजी राम राव, राज रोशन, गरिमा कुमारी, मिताली भौमिक सहित कई कलाकारों का उल्लेखनीय योगदान रहा.


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सत्येन्द्र सिन्हा गोपी

लेखक के बारे में

By सत्येन्द्र सिन्हा गोपी

सत्येन्द्र सिन्हा गोपी प्रिंट माध्यम में 25 और डिजिटल माध्यम में पिछले 5 वर्षों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. आकाशवाणी एवं दूरदर्शन समाचार से पत्रकारिता की शुरुआत की. नाटक, कला संस्कृति, गीत संगीत, कृषि व मेडिकल क्षेत्र में विशेष अभिरुचि रखते हैं.

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