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पूर्णिया विवि में गवर्नर से संवाद में रिसर्च में आड़े आ रही चुनौतियों का मसला छाया

Updated at : 16 Sep 2025 5:28 PM (IST)
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पूर्णिया विवि में गवर्नर से संवाद में रिसर्च में आड़े आ रही चुनौतियों का मसला छाया

पूर्णिया विवि

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पूर्णिया. पूर्णिया विवि में बीते 14 सितंबर को स्वागत समारोह के बाद राज्यपाल सह कुलाधिपति आरिफ मोहम्मद खान ने मौजूद शिक्षकों, कर्मियों और छात्रों को संवाद का खुला न्यौता दिया. अपने संबोधन के बाद गवर्नर ने कहा कि वे चाहते हैं कि आपलोग खुलकर अपनी बात रखें. इस क्रम में रिसर्च में आड़े आ रही चुनौतियों को खासतौर से गवर्नर के समक्ष रखा गया. यह विषय सहायक कुलसचिव शैक्षणिक डॉ. नवनीत कुमार ने प्रमुखता से उठाया. उन्होंने कहा कि जब हम विश्वस्तरीय विश्वविद्यालयों की गिनती करते हैं तो राज्य के विश्वविद्यालय बहुत पीछे पाते हैं. यह एक बड़ी चुनौती है. मेरी समझ में विश्वविद्यालयों की पहचान उसके अनुसंधानों, रिसर्च लैब से होती है. उसके द्वारा उत्पन्न किये गये सांईटिस्ट, अर्थशास्त्री, भाषाविदों, दर्शनशास्त्री और प्रतिभा के धनी विद्यार्थियों के विश्व पटल पर सफलता से होती है. हमारे विश्वविद्यालयों में अधिकतर प्रशासनिक पद हम शिक्षक लोग निभाते हैं. आज एनइपी के दौर में यूजीसी, शिक्षा विभाग काफी ऐक्टिव रूप से तरह तरह के डेटा मंगाये जाते हैं. हम शिक्षक पदाधिकारी भी है, कर्मचारी भी हैं, बहुत अधिक लोड रहता है. ऐसे में अनुसंधान प्रभावित होता है. उन्होंने सवाल किया कि क्या इन सभी पदों पर शिक्षकों के अतिरिक्त अन्य लोगों की नियुक्ति सरकार द्वारा किया जाना आवश्यक है. अनुसंधान को बढाये बिना विश्वविद्यालयों की पहचान कैसे होगी? वर्षों से विश्वविद्यालयों में कर्मचारियों की नियुक्ति सरकार द्वारा नही हुई है. उन्होंने कहा कि बिहार राज्य के विश्वविद्यालयों में आइटी सेल में भी टेक्निकल डिग्रीधारक शिक्षक नही हैं. डेटा ऐन्ट्री आपरेटर की वेकेंसी हर विवि में निकालने की आवश्यकता है. विज्ञान-कामर्स में दिलचस्पी घटने पर चिंता सहायक कुलसचिव शैक्षणिक डॉ. नवनीत कुमार ने इस बात पर भी चिंता जतायी कि विज्ञान, कामर्स जैसे विषयों में नामांकन घट रहा है. छात्र छात्रा सरकारी नौकरी के लिये इतिहास, भूगोल जैसे विषय ज्यादा पढ रहे हैं. रिसर्च के प्रति विद्यार्थियों में रूचि ही नही हो रही है. हमें अपने राज्य को शिक्षा क्षेत्र में आगे लाने के लिए रिसर्च लैब, नवाचार की स्थापना हर विवि में करनी होगी. नैक मान्यता और 12 बी की प्रक्रिया को गति दे रहा पूर्णिया विवि : कुलपति पूर्णिया. पूर्णिया विवि में राज्यपाल सह कुलाधिपति आरिफ मोहम्मद खान के स्वागत समारोह में कुलपति प्रो. विवेकानंद सिंह ने कहा कि विश्वविद्यालय नैक मान्यता एवं 12 बी की प्रक्रिया को भी गति प्रदान कर रहा है. उन्होंने कहा कि शिक्षा केवल डिग्री प्राप्त करने का साधन नहीं, बल्कि समाज निर्माण की सबसे सशक्त धुरी है. विश्वविद्यालय ने सदैव मार्गदर्शन और संरक्षण को ध्यान में रखते हुए शिक्षा, अनुसंधान एवं सामाजिक उत्तरदायित्व के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है. कुलपति प्रो. विवेकानंद सिंह ने विश्वविद्यालय की पृष्ठभूमि प्रस्तुत करते हुए कहा कि 18 मार्च 2018 को स्थापित यह विश्वविद्यालय पूर्णिया, अररिया, किशनगंज और कटिहार जिलों में उच्च शिक्षा की आवश्यकताओं को पूरा कर रहा है. वर्तमान में विश्वविद्यालय के अंतर्गत 15 अंगीभूत महाविद्यालय, 27 डिग्री कॉलेज, 10 बीएड. कॉलेज, 3 विधि महाविद्यालय, 2 अभियंत्रण महाविद्यालय, एक प्रबंधन संस्थान सहित बीबीए, बीसीए एवं सीएमडी जैसे कोर्स संचालित महाविद्यालय सम्मिलित हैं. कुल मिलाकर 58 कॉलेजों में अध्ययन की सुविधा उपलब्ध है. उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय उत्कृष्ट एवं विश्वस्तरीय शिक्षा प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है तथा शिक्षकों, कर्मचारियों और छात्रों की आकांक्षाओं को पूरा करने हेतु सतत प्रयासरत है. कार्यक्रम का मंच संचालन विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. प्रणय कुमार गुप्ता ने किया. जबकि धन्यवाद ज्ञापन प्रतिकुलपति प्रोफेसर पवन कुमार झा ने किया.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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