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भवानीपुर जैसी छोटी जगह से भी यूपीएससी की बड़ी उड़ान संभव : सुमित

Updated at : 04 May 2025 6:53 PM (IST)
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भवानीपुर जैसी छोटी जगह से भी यूपीएससी की बड़ी उड़ान संभव : सुमित

भवानीपुर

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– यूपीएससी में 200वें रैंक पर चयनित सुमित ने खुद भवानीपुर में रहकर की ऑनलाइन तैयारी प्रतिनिधि, भवानीपुर. यूपीएससी में 200वें रैंक पर चयनित नगर पंचायत भवानीपुर के वार्ड संख्या छह निवासी सुमित कुमार गुप्ता का मानना है कि आप कहीं भी रहते हों, यूपीएससी की तैयारी में इससे कोई फर्क नहीं पड़ता है. उन्होंने बताया कि जब वे यूपीएससी की तैयारी में जुटे तो इसकी शुरुआत भवानीपुर में ही रहते हुए की. उन्होंने बताया कि मैं अपने भवानीपुर निवास पर ही रहकर लगभग दो वर्ष तक तैयारी की. इसी बीच यूपीएससी की परीक्षा में 14 नंबर से मेरा फाइनल का रिजल्ट छूट गया. दूसरी बार भी मुझे सफलता नहीं मिली लेकिन मैं हार नहीं मानकर पढ़ाई का समय बढ़ाकर जीतोड़ मेहनत की. इस बीच में कभी किसी सगे-संबंधी के यहां किसी भी कार्यक्रम में शामिल नहीं हुआ. मैं घर के एक कमरा में रहकर अपनी पढ़ाई में लगा रहा. तीसरी बार मुझे सफलता हासिल हुई. उन्होंने अपना अनुभव शेयर करते हुए बताया कि जो छात्र यूपीएससी की तैयारी करना चाहते हैं, वे कम खर्चे में भी तैयारी कर सकते हैं. ऑनलाइन में बहुत सारे पढ़ाई के वीडियो निकल जाते हैं. फिर मोबाइल से समाचार भी देख सकते हैं. इस तरह छोटे से शहर से भी हम तैयारी आसानी से कर सकते हैं. अगर कोई छात्र इसकी तैयारी करने के बारे में सोचते हैं तो उसे सकारात्मक सोच के साथ तैयारी करनी होगी. बार-बार विफलता के बावजूद भी अपने मन को शांत रखना होगा. मन विचलित होने से सफलता आपसे दूर भागेगी. शांत मन से और हिम्मत से तैयारी करेंगे तो आपको सफलता अवश्य मिलेगी. उन्होंने बताया कि माता-पिता को किसी भी बच्चे पर अपनी बात नहीं थोपनी चाहिए बल्कि उसे अपने विवेक पर छोड़ देना चाहिए कि वह किस तरह की पढ़ाई करना चाहते हैं. नगर पंचायत भवानीपुर के वार्ड संख्या 6 प्रमोद कुमार गुप्ता व रोमा देवी के बड़े पुत्र सुमित कुमार गुप्ता ने बताया कि शिक्षा के प्रति मेरी माता का बहुत बड़ा योगदान है. उन्होंने ही मुझे प्रेरित कर सैनिक स्कूल भेजा. मेरी मां को बंगाल के पुरुलिया सैनिक स्कूल घूमने का अवसर प्रदान हुआ जहां के अनुशासन से प्रभावित होकर उनकी दृढ़ इच्छा हुई की मेरा बेटा भी सैनिक स्कूल में पढ़ाई करे. इसके बाद उन्होंने मुझे सैनिक स्कूल में जाने के लिए लगातार प्रेरित किया. मैं भी पूरे मन के साथ सैनिक स्कूल की तैयारी करने लगा और पहली बार में ही मुझे सफलता मिली. 12वीं के कॉमन लॉ एडमिशन टेस्ट में ऑल इंडिया में चौथा स्थान प्राप्त हुआ. आखिर में लंदन के एक लॉ फर्म की नौकरी छोड़ सिविल सेवा की तैयारी में जुट गया और आज उसमें भी सफल हुआ.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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