पिंड रूप में होती है मां की आराधना: जानें 18वीं सदी के इस भव्य मंदिर का इतिहास

Updated:
विज्ञापन

भवनदेवी मंदिर पूर्णिया

Bhawandevi Temple History: पूर्णिया जिले के भवानीपुर मुख्यालय स्थित प्राचीन मां भवन देवी मंदिर श्रद्धालुओं की अटूट आस्था का मुख्य केंद्र है. 18वीं शताब्दी के गौरवशाली इतिहास को समेटे इस पावन धाम की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहाँ मां भगवती की कोई मूर्ति नहीं है, बल्कि भक्त पिंड रूप में शक्ति की पूजा करते हैं.

विज्ञापन
पूर्णिया के भवानीपुर से इंदेश्वरी यादव की रिपोर्ट

Bhawandevi Temple History: कोसी-सीमांचल प्रक्षेत्र की ऐतिहासिक और आध्यात्मिक कड़ियों को खुद में समेटे पूर्णिया जिला अंतर्गत भवानीपुर पूरब पंचायत का ‘भवन देवी टोला’ इन दिनों एक बार फिर चर्चा में है. यहाँ अवस्थित प्राचीन मां भगवती (भवन देवी) का मंदिर सदियों से श्रद्धा का पावन धाम बना हुआ है. इस अलौकिक मंदिर की सबसे बड़ी तकनीकी और धार्मिक विशेषता यह है कि यहाँ गर्भगृह में मां भगवती की किसी मूर्ति की स्थापना नहीं की गई है. श्रद्धालु प्राचीन काल से ही यहाँ पिंड स्वरूप में शक्ति स्वरूपा की आराधना करते आ रहे हैं. शारदीय व चैत्र नवरात्र के दौरान यहाँ कलश स्थापना कर विशेष वैदिक कड़ियों के साथ पूजा-अर्चना संधारित की जाती है.

गया धाम जाने के बजाय इसी बरगद के नीचे पिंडदान करते हैं श्रद्धालु

  • पितरों को मोक्ष का संबल: मंदिर परिसर में स्थित सदियों पुराना विशाल बरगद का वृक्ष धार्मिक दृष्टि से अत्यंत पूजनीय माना जाता है. स्थानीय जनश्रुतियों के अनुसार, इस पवित्र वृक्ष के नीचे पिंडदान करने से पूर्वजों (पितरों) को शांति और मोक्ष की प्राप्ति होती है.
  • स्थानीय गया धाम की महत्ता: क्षेत्र के कनिष्ठ व वरिष्ठ नागरिकों को मोक्षधाम गया जी जाने की आवश्यकता नहीं पड़ती; आसपास के दर्जनों गांवों के लोग अपने पूर्वजों का श्राद्ध कर्म और पिंडदान इसी पावन वटवृक्ष की कड़ियों के नीचे संपन्न करते हैं.

दरभंगा महाराज के स्वप्न से जुड़ा है इतिहास; ऐसे पड़ा ‘भवानीपुर राजधाम’ नाम

“18वीं शताब्दी में दरभंगा महाराज को स्वप्न में मां भगवती ने स्वयं दर्शन देकर इस गुप्त स्थान के बारे में अवगत कराया था. स्वप्नादेश के आलोक में महाराज ने यहाँ पहुंचकर वटवृक्ष के नीचे एक कुटिया का निर्माण कराया. मां भवानी के इस स्थान के कारण ही पूरे प्रक्षेत्र का नाम ‘भवानीपुर’ पड़ा. बाद में वर्ष 1854 में दरभंगा महाराज ने अपने शाही कोष से यहाँ भव्य मंदिर की कमान खड़ी की और इसे अपनी अधीनस्थ राजधानी के रूप में प्रतिष्ठित किया, जिसके बाद यह ‘भवानीपुर राजधाम’ के नाम से विख्यात हुआ.”

ठाकुर परिवार की पीढ़ियां संभाल रही हैं कमान, विवाह संस्कार की भी उत्तम व्यवस्था

दरभंगा राज द्वारा मंदिर निर्माण के उपरांत सबसे पहले पूजा-अर्चना एवं देखरेख की मुख्य जवाबदेही चमक लाल ठाकुर को सौंपी गई थी. उनके निधन के बाद कंत लाल ठाकुर और मंत्र लाल ठाकुर ने इस दायित्व को आगे बढ़ाया. तब से लेकर आज तक ठाकुर परिवार की पीढ़ियां पूरी निष्ठा के साथ इस मंदिर की कमान संभाल रही हैं.

वर्ष 2003 में तत्कालीन प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO) शिलाजीत सिंह के सपरिवार आगमन और प्रशासनिक प्रयासों के बाद इस मंदिर की ख्याति दूर-दूर तक फैली. वर्तमान में स्थानीय प्रबुद्ध नागरिकों की एक सक्रिय मंदिर समिति इसके विकास की कड़ियों को जोड़ रही है. आधुनिक व्यवस्था के तहत मंदिर परिसर में सामूहिक विवाह संस्कार की भी उत्तम व्यवस्था की गई है, जिसके लिए इच्छुक वर-वधू पक्ष को मंदिर कार्यालय में अग्रिम पंजीकरण (रजिस्ट्रेशन) कराना अनिवार्य होता है. आज भी यहाँ सुबह 05:00 बजे कपाट खुलने के साथ ही भक्तों की मुस्तैदी देखी जा सकती है.

पूर्णिया की ख़बरों को पढने के लिए क्लिक करें !

विज्ञापन
Divyanshu Prashant

लेखक के बारे में

By Divyanshu Prashant

दिव्यांशु प्रशांत वर्तमान में Prabhat Khabar डिजिटल में बतौर कंटेंट राइटर कार्यरत हैं। उन्होंने महात्मा गाँधी अंतर्राष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय वर्धा से पत्रकारिता में परास्नातक तथा टी. एन. बी. कॉलेज भागलपुर से हिंदी साहित्य में स्नातक की शिक्षा प्राप्त की है। हिंदी साहित्य की पृष्ठभूमि होने के कारण उन्हें पढ़ने, लेखन और कविता-सृजन में विशेष रुचि है। मीडिया क्षेत्र में लगभग एक वर्ष के अनुभव के दौरान वे Dainik Jagran में न्यूज़ राइटर और रिपोर्टर के रूप में कार्य कर चुके हैं। करियर के शुरुआती दौर में लोकसभा और विधानसभा चुनावों से जुड़े पॉलिटिकल कंटेंट राइटिंग का विशेष अनुभव प्राप्त किया। सटीक, निष्पक्ष और प्रभावशाली लेखन के माध्यम से पाठकों तक विश्वसनीय जानकारी पहुँचाना उनकी पेशेवर पहचान है।

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन