राष्ट्रीय हिंदी साधक समारोह में सम्मानित हुए साहित्यकार, सजी कवियों की महफिल
Published by : Abhishek Bhaskar Updated At : 23 Sep 2025 12:06 AM
तरूणोदय सांस्कृतिक विकास परिषद, खगहा मीरगंज के तत्वावधान में 33 वां राष्ट्रीय हिंदी साधक सम्मान समारोह सह कवि सम्मेलन डॉ अशोक गुलशन बहराइच उत्तर प्रदेश की अध्यक्षता में संपन्न हुआ.
पूर्णिया. तरूणोदय सांस्कृतिक विकास परिषद, खगहा मीरगंज के तत्वावधान में 33 वां राष्ट्रीय हिंदी साधक सम्मान समारोह सह कवि सम्मेलन डॉ अशोक गुलशन बहराइच उत्तर प्रदेश की अध्यक्षता में संपन्न हुआ. कार्यक्रम के मुख्य अतिथि बाबा वैद्यनाथ झा, डॉ सियाराम मयंक मधेपुरा व विशिष्ट अतिथि नकुल शर्मा उग्र अमेठी उत्तर प्रदेश, गोपाल चंद्र घोष मंगलम थे. कार्यक्रम का सफल संचालन प्रेम चंद्र पांडेय भागलपुर ने किया. स्वागत गान देवेश चौधरी, स्वागत भाषण परिषद के संस्थापक कैलाश बिहारी चौधरी ने प्रस्तुत किए. लोकार्पण सत्र में चर्चित छन्दज्ञ कवि गजलकार बाबा बैद्यनाथ झा की तीन पुस्तकें सीख लें छन्द-सर्जना, मुक्तक लुभा रहा एवं अलग अंदाज है मेरा एवं कैलाश बिहारी चौधरी की पुस्तक काव्य स्वर का विमोचन हुआ. सम्मान सत्र में डॉ ममता तिवारी छत्तीसगढ़ को महादेवी वर्मा काव्य श्री सम्मान, महेंद्र निशाकर भागलपुर अखिल भारतीय साहित्य परिषद के संस्थापक को संगठन गौरव साहित्य सम्मान स्वरूप रेशमी चादर, प्रतीक चिह्न सम्मान पत्र एवं चेक प्रदान कर सम्मानित किया गया. इसी सत्र में प्रिया सिन्हा पूर्णिया को तरूण साहित्य सम्मान, डॉ अशोक गुलशन बहराइच, उत्तर प्रदेश, नकुल शर्मा उग्र अमेठी, नव्या शर्मा उत्तर प्रदेश को राष्ट्रीय साधक सम्मान स्वरूप रेशमी चादर,सम्मान पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया. विचार सत्र में हिन्दी के प्रति दायित्व पर चर्चा करते हुए मानसिक भावना से संकल्प लेने पर जोर दिया गया. कवि सम्मेलन का प्रारंभ बाबा बैद्यनाथ झा ने सरस्वती वंदना से किया. इस सत्र में महेंद्र निशाकर भागलपुर, श्रवण अमनेशवर, प्रेम हमदर्द, नूरी शमी कटिहार, डॉ सियाराम मयंक मधेपुरा, गोपाल चंद्र घोष मंगलम, नकुल शर्मा उग्र अमेठी, दिलिप समदर्शी अररिया, कैलाश बिहारी चौधरी, बाबा वैद्यनाथ कवि राम रण योद्धा आगरा, संजू सुर्यम आगरा आदि ने अपनी प्रस्तुति से सबको प्रभावित किया. इसी सत्र में संचालक डॉ प्रेम चंद्र पांडेय भागलपुर, अशोक गुलशन बहराइच उत्तर प्रदेश आदि ने गम्भीर एवं लाजवाब कविताओं से सबका मन मोह लिया. कार्यक्रम के अंत में संस्थापक कैलाश बिहारी चौधरी ने सफल समारोह के प्रति सबका धन्यवाद ज्ञापन किया.
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