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नहाय खाय के साथ चैत्र मास का चार दिवसीय महापर्व छठ शुरू, आज खरना

Updated at : 10 Apr 2019 3:53 AM (IST)
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नहाय खाय के साथ चैत्र मास का चार दिवसीय महापर्व छठ शुरू, आज खरना

पूर्णिया : नहाय-खाय के साथ मंगलवार से चार दिवसीय चैती छठ का अनुष्ठान शुरू हो गया. 10 अप्रैल बुधवार को खरना प्रसाद तथा 11 अप्रैल गुरुवार को भगवान भास्कर को संध्या कालीन अर्घ्य समर्पित होगा. 12 अप्रैल शुक्रवार को उगते सूर्य को अर्घ्य देने के साथ ही पवित्रता से जुड़े इस महापर्व का समापन हो […]

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पूर्णिया : नहाय-खाय के साथ मंगलवार से चार दिवसीय चैती छठ का अनुष्ठान शुरू हो गया. 10 अप्रैल बुधवार को खरना प्रसाद तथा 11 अप्रैल गुरुवार को भगवान भास्कर को संध्या कालीन अर्घ्य समर्पित होगा. 12 अप्रैल शुक्रवार को उगते सूर्य को अर्घ्य देने के साथ ही पवित्रता से जुड़े इस महापर्व का समापन हो जायेगा.

इसको लेकर शहर से गांव तक तैयारियां परवान पर है. जिले में हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी नदी-तालाबों के घाटों के अलावा श्रद्धालुओं द्वारा घरों में इस पर्व की तैयारी शुरू कर दी गयी है.
कार्तिक शुक्लपक्ष के चतुर्थी तिथि से छठ महापर्व की शुरुआत होती है. मंगलवार को छठ व्रती माताओं ने स्वच्छता और आस्था के महापर्व की शुरुवात गंगा स्नान और कद्दू भात के साथ की .
मंगलवार को नहाय-खाय के बाद बुधवार को खरना और गुरुवार को पहला अर्घ्य अस्ताचलगामी सूर्य को अर्पित होगा. शुक्रवार को उगते हुये सूर्य को अर्घ्य अर्पित कर महापर्व का समापन हो जायेगा. लोक आस्था के इस महापर्व की तैयारी शुरू हो गयी है.
बाजारों में पर्व से संबंधित सामानों की खरीदारी को लेकर भीड़ उमड़ने लगी है. लेकिन मौसम की बेरुखी और बदले-बदले तेवर को देख कर व्रती हलकान हैं. बेमौसम हुई बारिश ने गेहूं सुखाने और मिट्टी का चूल्हा बनाने में छठ व्रती माताओं की परेशानी का बढा दी है .
आज नहाय-खाय के साथ शुरू हुआ महापर्व : लोक आस्था के पर्व के पहले दिन मंगलवार को छठ व्रती गंगा स्नान के बाद अरवा चावल, चने की दाल और लौकी से बने विभिन्न व्यंजन को तैयार कर सूर्य देव को जल अर्पित करने और अपने आराध्य को नमन करने के बाद पर्व की शुरुआत की. उसके बाद घर के सदस्य भोजन ग्रहण किया. मंगलवार को सौरा नदी घाट पर बड़ी संख्या में महिलाएं सौरा नदी तट पर पहुंची और स्नान कर पूजा-पाठ किया.
छठ गीतों के साथ परवान चढ़ रही है आस्था : उगहो सूरज देव अर्घ के बेर …रहवे के बेर ….कांच ही बांस के भंगिया ….बहंगी केकरा के जाय…. जैसे लोक गीत शहर से लेकर गांव के चौक चौराहों बाजार और हर घर मे बजने लगे हैं.
भगवान भास्कर को समर्पित इन गीतों के मधुर आवाज से समूचा वातावरण भक्तिमय होने लगा है. छठ पर्व की तैयारियों में जुटे लोगो के आस्था को छठ पर्व का यह गीत परवान चढ़ा रहा है. आश्था का आलम यह है कि चैत्र नवरात्र और महापर्व छठ को लेकर हर घर मे देव पूजन का सिलसिला वातावरण को सुगंधित और भक्ति मय बना रहा है .
छठ के सामान से पटा है बाजार
बाजार नारियल, टाब, कवरंगा, फल, सुप, दौरा इत्यादि पर्व के समानों से पटा हुआ है. वही दूसरी तरफ खरीदारों की भीड़ भी बाजारों में उमड़ पड़ी है. हालांकि इस बार समानों के दाम में तेजी है लेकिन आस्था के आगे महंगाई फीकी साबित हो रही है. सोमवार को कद्दू का दाम आसमान छू रहा था.
वही नारियल, टाब, सूप, दौरा, फल के दाम भी बीते वर्ष की तुलना में छलांग लगा रहा था. शहर के खुशकीबाग , मधुबनी ,भट्ठा बाजार ,गुलाबबाग में खरीदारों की भीड़ देर शाम तक जुटी रही. हालांकि चैती छठ करने वाले लोगो की संख्या थोड़ी कम है लेकिन पर्वतियो को सुप और नारियल देने वालो की भीड़ बढ़ी है.
चार दिनों तक स्वच्छता रहेगा महत्वपूर्ण
लोक आस्था के महापर्व छठ पूर्ण आस्था के साथ-साथ पूर्ण रूपेण स्वच्छता का भी पर्व है. इस पर्व पर व्रती महिलाये घरो में पूरी स्वच्छत का ख्याल रखती है. जिस जगह छठ पर्व की पूजन सामग्री रखी जाती है, उसके आसपास किसी के आने-जाने पर भी प्रतिबंध होता है. साफ-सफाई के साथ चार दिनों तक ब्रती महिलाओ के अलावा घर के सदस्य लहसून, प्याज को खाने में शामिल नहीं करते हैं. खास बात यह है कि इस महापर्व में परिवार के हर सदस्य की महत्वपूर्ण भूमिका होती है.
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