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नेपाल बॉर्डर से खाद की तस्करी रोकना बड़ी चुनौती, हो रही कालाबाजारी, खाद के लिए मारामारी

Updated at : 01 Sep 2020 9:50 AM (IST)
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नेपाल बॉर्डर से खाद की तस्करी रोकना बड़ी चुनौती, हो रही कालाबाजारी, खाद के लिए मारामारी

सीतामढ़ी/डुमरा : जिले के 70 प्रतिशत लोगों की आय का मुख्य स्त्रोत कृषि है. यही कारण है कि किसानों के लिए सरकारी की ओर से कई कल्याणकारी योजनाएं चलायी जा रही हैं. उन योजनाओं में अनुदानित दर पर खाद भी उपलब्ध कराना है. लेकिन दुर्भाग्य की बात है कि सरकार के प्रयास के बाद भी दशकों से खाद की कालाबाजारी बदस्तूर जारी है.

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सीतामढ़ी/डुमरा : जिले के 70 प्रतिशत लोगों की आय का मुख्य स्त्रोत कृषि है. यही कारण है कि किसानों के लिए सरकारी की ओर से कई कल्याणकारी योजनाएं चलायी जा रही हैं. उन योजनाओं में अनुदानित दर पर खाद भी उपलब्ध कराना है. लेकिन दुर्भाग्य की बात है कि सरकार के प्रयास के बाद भी दशकों से खाद की कालाबाजारी बदस्तूर जारी है. इस पर रोक लगाने के लिए सरकार ने पॉश मशीन का सहारा लिया, लेकिन माफिया सरकार के साथ तू डाल-डाल, तो मैं पात-पात वाली कहावत चरितार्थ कर रहे हैं. बॉर्डर से सटे इलाकों में तस्करी रोकना एक बड़ी चुनौती है. नेपाल में ऊंचे दाम पर खाद बेचने के लिए माफिया खुली सीमा का फायदा उठाते आ रहे हैं. नेपाल में यूरिया का उपयोग खेती के साथ देसी शराब बनाने में भी किया जाता है. इसके कारण नेपाल पुलिस की नजर भी सीमा पर लगी रहती है.

कृषि विभाग ने पकड़ी गड़बड़ी

कृषि विभाग ने यूरिया की बिक्री में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी पकड़ी है. पॉश मशीन व आधार कार्ड के दुरुपयोग में कई खुदरा विक्रेताओं पर कार्रवाई की गयी है. जिले में निबंधित खाद विक्रेताओं की संख्या 568 है. विभाग के अनुसार जिले में प्रतिवर्ष 53 हजार एमटी यूरिया खाद की जरूरत होती है. इसमें खरीफ में 25 हजार एमटी व रबी में 28 हजार एमटी यूरिया शामिल है. सरकारी स्तर पर यूरिया के 45 किलो के एक बैग की कीमत 266.50 रुपये निर्धारित है. जिले में चालू खरीफ मौसम में अबतक 25 हजार एमटी के विरुद्ध लगभग 17 हजार 5 सौ एमटी यूरिया का आवंटन हुआ है. जिसमें 16800 एमटी यूरिया का वितरण किसानों के नाम पर हो चुका है. शेष 700 एमटी यूरिया का वितरण किया जा रहा है.

जांच के दायरे में खुदरा उर्वरक विक्रेता

एक आधार नंबर पर एक ही किसान को बड़ी मात्रा में उर्वरक की बिक्री वालों में परिहार के मेसर्स जय गुरुदेव ट्रेडर्स, मेसर्स मिथिला ट्रेडर्स, मेसर्स पुष्पांजली खाद बीज भंडार व मेसर्स मुलाजिम किराना स्टोर एंड बीज भंडार, सोनबरसा के मेसर्स दिनेश महतो, मेसर्स सोनी ट्रेडर्स व मेसर्स हंस ट्रेडर्स, मेजरगंज के मेसर्स किसान सेवा केंद्र, मेसर्स जानकी ट्रेडर्स व मेसर्स सुशील कुमार, चोरौत के मेसर्स चौधरी ट्रेडर्स व मेसर्स संजय पूर्वे, पुपरी के मेसर्स डुमहारपट्टी पैक्स व बथनाहा के मेसर्स सचिन ट्रेडर्स शामिल हैं.

दो दिन बाद 60 रुपये महंगी मिली यूरिया

बैरगनिया. बॉर्डर पर स्थित बैरगनिया प्रखंड में यूरिया की कालाबाजारी बेखौफ जारी है. भारतीय यूरिया को तस्करी के माध्यम से नेपाल भेजा जा रहा है. इसके कारण किसानों को महंगे दाम पर खरीदना पड़ रहा है. थोक विक्रेता से 267 रुपये में मिलने वाली यूरिया का दाम लाइसेंसी विक्रेता द्वारा किसानों को 330 रुपये प्रति बोरा मिल जाना है. जबकि वही यूरिया यहां 400 से 420 रुपये बोरा बिक रही है. मसहा आलम के किसान सुरेंद्र यादव ने बताया कि उसने 15 दिन पहले पैक्स दुकानदार से 330 रुपये प्रति बोरी यूरिया खरीदी थी. दो रोज बाद उसे वही बोरा 395 रुपये में खरीदना पड़ा. किसानों ने बताया कि लाइसेंसी दुकानदार कालाबाजारी में 400 रुपये बोरा बिचौलियों को दे देते हैं. जहां से सीमा से सटे नेपाल के ब्रह्मपुरी, सेड़वा, लक्ष्मी पुर, बेल विच्छवा, गौर, महादेव पट्टी, राजदेवी, कडवना समेत दर्जनों गांवों के किसान 600 रुपये (1000 नेपाली करेंसी) में खरीद कर ले जाते हैं.

posted by ashish jha

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