शराब कांड: 30 शवों का पोस्टमार्टम करने वाले राजेश को क्यों याद आया मिड-डे मील हादसा, जानें पूरा मामला
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 16 Dec 2022 4:01 PM
राजेश ने बताया कि एक बार फिर मिडे-डे मील हादसा से बुरे हालात नजर आ रहे हैं, जब लगातार लाशों का पोस्टमार्टम करना पड़ रहा है. बताया जा रहा है कि यह सभी लाशें उनके थे, जिनकी जहरीली शराब पीने से मौत हुई थी.
पटना. सारण जिले के मसरख में हुई मिडे मील कांड के दौरान पोस्टमार्टम रूप में असिस्टेंट के तौर पर कार्यरत राजेश के लिए यह दूसरा मौका है, जब एक साथ जहर खाने से इतनी बड़ी संख्या में हुई मौत के बाद शवों का पोस्टमार्टम करने की जिम्मेदारी निभानी पड़ी है. नम आंखों से राजेश कहते है कि पिछले दो दिनों में करीब 30 शवों का पोस्टमार्टम कर चुका हूं. तीन दिनों से लगातार ड्यूटी पर हूं. ऐसा मेरे साथ दूसरी बार हुआ है. राजेश ने बताया कि एक बार फिर उससे भी बुरे हालात नजर आ रहे हैं, जब लगातार लाशों का पोस्टमार्टम करना पड़ रहा है. बताया जा रहा है कि यह सभी लाशें उनके थे, जिनकी जहरीली शराब पीने से मौत हुई थी.
राजेश कहते हैं कि पिछले तीन दिनों से वे 24 घंटे ड्यूटी पर हैं. इस दौरान जो भी लाशें आ रही हैं, उसका पोस्टमार्टम कर रहे हैं. राजेश का काम लाशों को चिरफाड़ करना होता है, जिसके बाद डॉक्टर उसका मुआयना करके मृत्यु के असली कारणों की जांच करते हैं. इस बार पिछले सभी आंकड़े ध्वस्त हो गए और 24 घंटे के अंदर राजेश ने 30 लाशों का पोस्टमार्टम किया है. बताया जा रहा है कि पहले राजेश के पिता इस काम को करते थे. उनकी मृत्यु के बाद राजेश ने इस काम को शुरू किया और अभी तक उसने सैकड़ों लोगों की लाशों का पोस्टमार्टम किया है. राजेश की माने तो इस बार हालात काफी बुरे हैं. जब अस्पताल से धड़ाधड़ लाशें आने लगी तो उसकी भी हालत खराब हो गई.
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शराब बिहार में प्रतिबंधित है, इसके बाद भी यह लोगों के लिए काल बनती जा रही है. लोग इसे पीकर लगातार काल के गाल में समा रहे हैं. बिहार के सारण जिले में दो दिनों के भीतर 30 लोगों की जहरीली शराब पीने से मौत हो चुकी है और यह सिलसिला अभी भी जारी है. छपरा में जहरीली शराब कांड के बाद अभी तक 55 लोगों की मौत हो चुकी है जबकि कई लोग अभी भी बीमार है. मृतकों की संख्या लगातार बढ़ रही है. छपरा के अलावा भी अन्य जिलों से मौत की खबरें आ रही है.
छपरा के मशरक और इसुआपुर में लगातार हो रही मौतों के बाद कई कहानियां निकलकर सामने आ रही है. बीमारों को अस्पताल लेकर आने वाले ऑन ड्यूटी एंबुलेंस चालकों ने बीमारों की दास्तान तथा रास्ते में दम तोड़ने वाले लोगों के दर्ज को बयान करते हुए बताया कि जब बीमारों को वह एंबुलेंस में ले जा रहे थे, तब बीमार काफी चिल्ला रहे थे. जबकि 10 से 15 मिनट में बीमारों ने बोलना बंद कर दिया. उनके साथ एंबुलेंसे में बैठे परिजन बार-बार उनकी छाती दबाते रहे. ताकि बीमार सांस लेते रहे. लेकिन अस्पताल पहुंचने से पहले ही कइयों के मुंह से झाग निकलने लगी. एंबुलेंस चालकों ने कहा कि स्थिति बहुत भयावह थी. ऐसा मंजर हमने कभी नहीं देखा था.
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