PhD admission: पीएचडी की 60% सीट नेट-जेआरएफ क्वालीफाई छात्रों के लिए होगी आरक्षित,UGC की नई पॉलिसी जानें

पीएचडी की 60% सीट नेट-जेआरएफ क्वालीफाई छात्रों के लिए आरक्षित होगी. यूजीसी ने शोध के लिए योजना बनायी. विश्वविद्यालय शेष 40 प्रतिशत सीटों पर विश्वविद्यालय स्तर से या एनटीए की ओर से आयोजित होने वाली संयुक्त प्रवेश परीक्षा की मेरिट से दाखिला दे सकेंगे.
मुजफ्फरपुर (धनंजय पांडेय). विश्वविद्यालयों में अब पीएचडी के लिए निर्धारित कुल सीटों में से 60 प्रतिशत सीट नेट या जेआरएफ क्वालीफाई छात्रों के लिए आरक्षित रहेगी. वहीं, विश्वविद्यालय शेष 40 प्रतिशत सीटों पर विश्वविद्यालय स्तर से या एनटीए की ओर से आयोजित होने वाली संयुक्त प्रवेश परीक्षा की मेरिट से दाखिला दे सकेंगे. राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के प्रावधानों को देखते हुए यूजीसी ने शोध के लिए नयी योजना तैयार की है. सभी विश्वविद्यालयों को इसे वर्तमान सत्र से ही लागू करने का सुझाव भी दिया गया है. यूजीसी ने कहा है कि यदि 60 प्रतिशत आरक्षित सीटों के लिए योग्य उम्मीदवार नहीं मिलते हैं, तो विश्वविद्यालय खाली सीटों को 40 फीसदी ओपेन सीटों से जोड़ सकेंगे. यानी वे इन खाली सीटों का आवंटन पैट की मेरिट से कर सकेंगे.
राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनइपी) 2020 के तहत यूजीसी ने चार वर्षीय डिग्री प्रोग्राम को लागू करने की भी मंजूरी दी है. इसी के तहत अब चार वर्षीय स्नातक डिग्री प्रोग्राम में 7.5 सीजीपीए लेने वाले छात्र सीधे पीएचडी में दाखिले ले सकेंगे. शैक्षणिक सत्र 2022-23 से विश्वविद्यालयों के साथ ही सीएसआइआर, आइसीएमआर, आइसीएआर आदि में इन्हीं नियमों के तहत पीएचडी दाखिले होंगे. पीएचडी दाखिले के लिए 70 अंकों की लिखित परीक्षा और 30 अंकों का इंटरव्यू होगा. पीएचडी प्रोग्राम में कम से कम 12 और अधिक से अधिक 16 क्रेडिट लाने अनिवार्य रहेंगे.
विश्वविद्यालयों में वर्तमान में जारी व्यवस्था, यानी तीन साल स्नातक और दो साल का पीजी करने वाले छात्र भी पीएचडी में दाखिला लेंगे. उन्हें पीएचडी में दाखिले के लिए विश्वविद्यालयों की संयुक्त प्रवेश परीक्षा में भाग लेने के लिए पीजी प्रोग्राम में 50 या 55 प्रतिशत अंक (विश्वविद्यालयों के मानदंड के आधार पर) लाने होंगे. वहीं, चार वर्षीय स्नातक और एक साल के पीजी प्रोग्राम की पढ़ाई करने वाले छात्र भी पीएचडी में दाखिला ले सकेंगे. इसके अलावा राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत चार वर्षीय डिग्री प्रोग्राम के तहत रिसर्च या ऑनर्स प्रोग्राम के छात्र सीधे पीएचडी में दाखिले ले सकेंगे.
पीएचडी शोधार्थियों के लिए राहत की खबर है कि अब उन्हें अपनी थीसिस का रिसर्च पेपर प्रकाशित कराना अनिवार्य नहीं होगा. अब तक पीएचडी शोधार्थियों को थीसिस किसी भी जर्नल में छपवाना अनिवार्य रहता था. यूजीसी की नयी गाइडलाइन में कहा गया है कि आगामी सत्र से दाखिला लेने वाले छात्रों को नये नियम के तहत छूट मिलेगी. इसके अलावा छात्र अपनी रिसर्च का पेटेंट भी करा सकेंगे.
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
लेखक के बारे में
By Prabhat Khabar Digital Desk
यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए




