बिहार: मोती की खेती से चमकी बेगुसराय के किसानों की किस्मत, लाखों का हो रहा मुनाफा
Published by : Prabhat Khabar News Desk Updated At : 27 Apr 2023 4:26 AM
बेगुसराय के बखरी में दो युवा किसान संयुक्त रूप से मोती की खेती कर रहे हैं. इसमें से किसी ने पारंपरिक तरीके होने वाली खेती छोड़ दी, तो किसी ने दूसरे क्षेत्र के साथ-साथ ही मोती की खेती शुरू की है.
बेगुसराय: सीप से बनने वाली मोती की कभी खेती भी होगी कुछ साल पहले तक कोई सोच भी नहीं सकता था, लेकिन प्राकृतिक रत्न मोती की खेती का चमत्कार हुआ है. फिलहाल तो बखरी के दो युवा किसान संयुक्त रूप से मोती पैदा कर रहे हैं. किसी ने पारंपरिक तरीके होने वाली खेती छोड़ दी, तो किसी ने दूसरे क्षेत्र के साथ साथ ही मोती की खेती शुरू की है. इतना ही नहीं इन लोगों ने मोती की खेती करने का प्रशिक्षण देने की तैयारी शुरू करने की बात कही हैं. इसके फलस्वरूप किसान परिवार और ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को रोजगार मिल सके. बखरी नगर पर्षद क्षेत्र के मक्खाचक निवासी संजय ठाकुर के पुत्र रोहित कुमार ठाकुर तथा मटिहानी निवासी आमोद कुमार ने बीते छह माह से मोती की खेती कर रहे हैं. इस खेती के लिए आवश्यक संसाधन के लिए शुरुआत में उत्पादन क्षेत्र के आधार पर शुरुआत में दो लाख रुपये तक खर्च आता है. बाद में कुछ ही लागत में इसका नियमित उत्पादन लिया जा सकता है. डेढ़ साल बाद इसका उत्पादन होता है, जो 10 लाख रुपये तक होता है.
बेगूसराय से 35 किलोमीटर की दूरी पर स्थित बखरी है. यहां 10 x 20 फीट का तालाब बना कर रोहित और आमोद मोती की खेती करते हैं. खेती करने के लिए उन्होंने कई स्थानों पर प्रशिक्षण लेने गये, लेकिन उन्हें कहीं भी तसल्ली नहीं हुई. अंतत: उन्हें पता चला कि मोतिहारी के अजय प्रियदर्शी तथा बाढ़ के शशि कुमार द्वारा मोती की खेती करने का प्रशिक्षण दिया जाता है. उनके मार्गदर्शन में मोती की खेती शुरू की.
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मोती एक प्राकृतिक रत्न है, जो सीप में तैयार होता है. प्राकृतिक प्रक्रिया के अनुसार सीप के भीतर जब कोई बाहरी कण जैसे रेत या इस तरह का कोई दाना प्रवेश करता है, तो सीप उसे बाहर नहीं निकाल पाता. सीप के भीतर जो कण चला जाता है, उसके ऊपर सीप द्वारा चमकदार पर्त छोड़ी जाती है. डेढ़ साल तक यह प्रक्रिया जारी रहती है. अंत में यही कण मोती बन जाता है. यह असली मोती होता है. आमोद व रोहित के अनुसार, मोती की पैदावार करने के लिए सीप को लाने से लेकर उसकी सर्जरी करने की प्रक्रिया करनी पड़ती है.
आमोद तथा रोहित ने बताया कि घर के पीछे बची जमीन पर तालाब बनाकर सीप की खेती कर रहे हैं.इस क्षेत्र में काम करने वाली कंपनी ओडिसिया ई कॉमर्स प्राइवेट लिमिटेड जामताड़ा झारखंड के सहयोग से सीप बखरी लाया गया. कहा कि मोती उत्पादन एक संयम का काम है.क्योंकि इसमें आज लागत लगायी तो उत्पादन डेढ़ साल के बाद मिलता है.इस कारण कई लोग इसे नहीं करते हैं.यह बखरी अनुमंडल क्षेत्र के इकलौता प्रयोग किए जाने वाला सीप की खेती है.
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बारिश पर निर्भर पारंपरिक खेती और कुदरत से दो-दो हाथ कर थक चुके हिस्ट्री से स्नातक आमोद व पीजी किए रोहित ने मोती की खेती शुरू की है.उन्होंने बताया कि मक्का और गेंहू की खेती के कारण उनके परिवार का गुजारा हो पाना मुश्किल हो चुका था.बड़े-बुजुर्गों से सीप से मोती पैदा होने की कहानियां सुनी थीं. उन्होंने सोचा कि क्यों न सीप से मोती निकाला जाए.तत्पश्चात मोतिहारी तथा बाढ़ के सीपपालक अजय प्रियदर्शी व शशि से मुलाकात हुई.वहां से प्रेरणा के साथ रास्ता खुला,जानकारी मिली.वहीं पर प्रशिक्षण लिया और विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में मोती की खेती की शुरुआत की.
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