ओपीआरएमसी सिस्टम के तहत संवेदकों के प्रदर्शन का हुआ मूल्यांकन
संवाददाता,पटना
राज्य सरकार ने बेहतर और प्रदर्शन करने वाले ठेकेदार व एजेंसी का आकलन कराया है. बेहतर कार्य करने वाली एजेंसियों की सूची जारी कर उनके कार्यों की सराहना की है. वहीं, खराब परफार्मेंस वाले ठेकेदारों की सूची जारी कर उन्हें कार्यप्रणाली में सुधार की चेतावनी दी गयी है.पथ निर्माण मंत्री नितिन नवीन ने कहा है कि कार्य के आधार पर ही ठेकेदारों की रैकिंग की जायेगी. खराब परर्फार्मेंस वाले ठेकेदारों से काम वापस लिये जायेंगे और उनके खिलाफ कार्रवाई भी की जायेगी. पथ निर्माण विभाग द्वारा कार्यरत संवेदकों के कार्यों की समीक्षा की गयी. ओपीआरएमसी प्रणाली लांग टर्म आउटपुट एंड परफॉर्मेंस बेस्ड रोड असेट्स मेंटेनेंस कॉन्ट्रैक्ट के माध्यम से सड़कों के दीर्घकालिक रखरखाव को सुनिश्चित किया जा रहा है.
संवेदकों की नियमित रैंकिंग होगी
विभाग द्वारा मार्च 2021 से मार्च 2025 तक के प्रदर्शन पर ठेकेदार एवं एजेंसी का मूल्यांकन किया गया. कुछ संवेदकों के कार्य से विभाग संतुष्ट हुआ. वहीं, कुछ संवेदकों के कार्यों में सुधार की संभावनाएं चिह्नित की गयी. इस प्रणाली के तहत वर्तमान में 10,379 किलोमीटर सड़कों का रखरखाव 72 पैकेजों में कुल 72 कार्यरत संवेदकों द्वारा किया जा रहा है.
टाॅप फाइव एजेंसी के नाम जारी किये गये
समीक्षा के बाद विभाग ने टॉप फाइव उत्कृष्ट संवेदकों की सूची जारी की. इन कंपनियों द्वारा जिन सड़कों का रखरखाव किया जा रहा है, वहां सड़कें अपेक्षाकृत बेहतर स्थिति में पायी गयीं. विभागीय अधिकारियों ने इनकी कार्यशैली की सराहना की.
कमजोर प्रदर्शन करने वाले संवेदकों पर होगी कार्रवाई
वहीं, दूसरी ओर विभाग ने सबसे कमजोर प्रदर्शन करने वाले पांच संवेदकों की पहचान कर स्पष्ट निर्देश दिया गया कि यदि इनके कार्यों में जल्द सुधार नहीं हुआ, तो इनके अनुबंध समाप्त कर कड़ी कार्रवाई की जायेगी.
राज्य में करीब 10 हजार किमी सड़कों का रखरखाव
ज्ञात हो कि राज्य में 10,379 किलोमीटर लंबी सड़कों का रखरखाव आपीआरएमसी प्रणाली के तहत किया जा रहा है. इस प्रणाली में संवेदक को सात वर्षों के लिए अनुबंधित किया जाता है.इसमें उन्हें सड़कों की निरंतर निगरानी और समय पर मरम्मत की जिम्मेदारी दी जाती है. इन सड़कों पर जीपीएस आधारित पेट्रोल मेंटेनेंस यूनिट (सड़क एंबुलेंस) और मेडिकल एंबुलेंस जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध करायी गयी हैं. इससे दुर्घटनाओं की स्थिति में त्वरित सहायता दी जा रही है.
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