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प्रशांत किशोर खुद को गांधीवादी बताते हैं, लेकिन…, जदयू ने जन सुराज की फंडिंग पर उठाया सवाल

Updated at : 10 Feb 2025 8:07 PM (IST)
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Prashant Kishor Party Funding

प्रशांत किशोर (फाइल फोटो)

Prashant Kishor Party Funding: जदयू नेता नीरज कुमार और अजीत पटेल ने आरोप लगाया कि प्रशांत किशोर की पार्टी को कहीं से डायरेक्ट फंडिंग नहीं मिल रही है. यह जांच का मामला है. इसकी जांच होनी चाहिए.

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Prashant Kishor Party Funding: जदयू ने सोमवार को प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी की फंडिंग से लेकर उसकी राजनीतिक गतिविधियों पर सवाल उठाए. जदयू के मुख्य प्रवक्ता और विधान परिषद के सदस्य नीरज कुमार ने प्रशांत किशोर की राजनीतिक गतिविधियों एवं जन सुराज और उसकी कार्यप्रणाली पर गंभीर संदेह जताते हुए कहा कि जन सुराज पार्टी में राष्ट्रीय अध्यक्ष का चेहरा तक सामने नहीं आता. प्रशांत किशोर स्वयं को पार्टी का संरक्षक बताते हैं, लेकिन चुनाव आयोग के दस्तावेजों में उनका नाम तक दर्ज नहीं है. इससे पार्टी के वास्तविक नेतृत्व और नियंत्रण को लेकर भ्रम की स्थिति बनी हुई है. नीरज कुमार ने कई दस्तावेज दिखाते हुए आरोप लगाया कि राजनीतिक उद्देश्यों के लिए एनजीओ का इस्तेमाल कानूनी और नैतिक रूप से गलत है. वित्तीय वर्ष 2023-24 में इस एनजीओ को 48.75 करोड़ रुपए की डोनेशन प्राप्त हुई, जिसमें सबसे बड़ा डोनेशन (14 करोड़ रुपए) रामसेतु इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड से प्राप्त हुआ. बिहार की राजनीति के लिए ज्यादातर चंदा तेलंगाना और हैदराबाद की कंपनियों से क्यों आ रहा है? यह भी एक महत्वपूर्ण प्रश्न है.

खुद को गांधीवादी बताते हैं, लेकिन…

नीरज कुमार ने यह भी कहा कि कंपनियों की वास्तविक पूंजी बहुत कम है, लेकिन उन्होंने करोड़ों रुपए का दान दिया है. ‘रामसेतु इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड’ जैसी कंपनियों के नाम और निदेशक बार-बार बदले गए हैं. प्रशांत किशोर खुद को गांधीवादी बताते हैं, लेकिन उनकी पदयात्रा पर करोड़ों रुपए खर्च किए जा रहे हैं.

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सार्वजनिक करनी चाहिए वित्तीय जानकारी

‘ज्वाय ऑफ लिविंग ग्लोबल फाउंडेशन’ एक चैरिटेबल संस्था के रूप में पंजीकृत है, लेकिन इसे राजनीतिक कार्यों में लिप्त पाया गया है. इसके निदेशक हर दो से तीन वर्षों में बदल दिए जाते हैं, जिससे जवाबदेही तय न हो सके. इस एनजीओ के माध्यम से प्रशांत किशोर की पार्टी को अपारदर्शी रूप से फंडिंग दी जा रही है. यदि प्रशांत किशोर पारदर्शिता की बात करते हैं, तो उन्हें अपनी पार्टी की वित्तीय जानकारी सार्वजनिक करनी चाहिए.

नीरज कुमार ने कहा कि क्या प्रशांत किशोर बिहार में कॉर्पोरेट लॉबी का नया राजनीतिक मॉडल ला रहे हैं? प्रशांत किशोर द्वारा प्रस्तुत राजनीतिक बदलाव का मॉडल संदेह के घेरे में है. यदि वे सच में बिहार के भविष्य के लिए काम कर रहे हैं, तो उन्हें अपनी पार्टी की वित्तीय पारदर्शिता सुनिश्चित करनी चाहिए. अन्यथा, यह पूरा अभियान सिर्फ एक राजनीतिक स्टंट और कॉर्पोरेट लॉबी का खेल प्रतीत होता है.

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Paritosh Shahi

लेखक के बारे में

By Paritosh Shahi

परितोष शाही डिजिटल माध्यम में पिछले 3 सालों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की. अभी प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम में काम कर रहे हैं. देश और राज्य की राजनीति, सिनेमा और खेल (क्रिकेट) में रुचि रखते हैं.

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