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पटना में 10 साल की बच्ची का दूरबीन विधि से हुआ यूरेट्रिक रिइन्प्लांट, जटिल ऑपरेशन कर डॉक्टरों ने बचाई जान

Updated at : 02 Aug 2022 6:35 PM (IST)
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पटना में 10 साल की बच्ची का दूरबीन विधि से हुआ यूरेट्रिक रिइन्प्लांट, जटिल ऑपरेशन कर डॉक्टरों ने बचाई जान

महावीर मंदिर न्यास द्वारा संचालित महावीर वात्सल्य अस्पताल में बच्ची का दूरबीन विधि से यूरेट्रिक रिइन्प्लांट किया गया. बच्चों को पेशाब के रास्ते में रूकावट से दर्द और बुखार की समस्या थी. डॉक्टरों ने इसका जटिल ऑपरेशन किया है. ऑपरेशन के तीन दिनों के बाद ही बच्ची को छुट्टी दे दिया गया.

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महावीर मंदिर न्यास द्वारा संचालित महावीर वात्सल्य अस्पताल में 10 साल की बच्ची का दूरबीन विधि से यूरेट्रिक रिइन्प्लांट किया गया। आरा की रहने वाली निशा के पेशाब की बाएं तरफ की नली में रूकावट थी। इस वजह से उसके बाएं साइड की किडनी में सूजन आ गया था। उसके पेट के बाएं हिस्से में दर्द होता था और उसे हमेशा बुखार की शिकायत रहती थी। महावीर वात्सल्य अस्पताल के पेडिएट्रिक सर्जन डॉ ओम पूर्वे के नेतृत्व में डॉक्टरों की टीम ने सफलता पूर्वक ऑपरेशन कर यूरेटर को सही जगह स्थापित करते हुए पेशाब के रास्ते में रूकावट को दूर किया।

आधुनिक मशीन से हुआ जटिल ऑपरेशन

डॉ ओम पूर्वे ने बताया कि महावीर वात्सल्य अस्पताल में कुछ दिनों पूर्व आयी अत्याधुनिक मशीन से यह जटिल ऑपरेशन किया गया। उन्होंने बताया कि महावीर वात्सल्य अस्पताल में दूरबीन विधि से बच्चों की सभी प्रकार की सर्जरी की जा रही है। ऑपरेशन करने वाली मेडिकल टीम में डॉ राकेश, डॉ गीता, डॉ पुलक तोष आदि शामिल थे। महावीर वात्सल्य अस्पताल के निदेशक डॉ एन आर बिश्वास ने दुर्लभ सर्जरी को सफलतापूर्वक अंजाम देने के लिए डॉक्टरों की टीम को बधाई दी है।

बच्ची को तीन दिनों में मिली अस्पताल से छुट्टी

शुक्रवार को हुए सफल ऑपरेशन के बाद मंगलवार को बच्ची को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। डॉ ओम पूर्वे ने बताया कि चीरा लगाकर ऑपरेशन करने पर मरीज को दो सप्ताह यानि कम से कम चौदह दिनों तक अस्पताल में रहना पड़ता। उसे 10 से 15 सेंटीमीटर का चीरा लगाना पड़ता। दूरबीन विधि से हुए वेसाइकोस्कोपिक यूरेट्रिक रिइन्प्लांट में 3-3 मिलीमीटर के दो और 5 मिलीमीटर का एक छेद किया गया। इससे मरीज के पेट में दाग बहुत कम होगा। ऑपरेशन के दौरान दर्द भी कम सहन करना पड़ा। बाहरी कैथेटर या पाइप का भी इस्तेमाल नहीं हुआ। ऑपरेशन के बाद अस्पताल में मात्र तीन दिनों तक रुकना पड़ा। इससे मरीज के इलाज पर होनेवाले खर्च में भी बहुत कमी आयी।

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