ePaper

मधुबनी में बनेगा सूबे का पहला क्राफ्ट विलेज

Updated at : 20 Sep 2025 1:33 AM (IST)
विज्ञापन
मधुबनी में बनेगा सूबे का पहला क्राफ्ट विलेज

मधुबनी जिले का जितवारपुर गांव बिहार का पहला क्राफ्ट विलेज बनेगा. भारत सरकार के वस्त्र मंत्रालय के सचिव की अध्यक्षता वाली कमेटी ने इसकी मंजूरी दे दी है.

विज्ञापन

– वस्त्र मंत्रालय ने दी मंजूरी, नौ करोड़ से बदलेगी गांव की सूरत संवाददाता, पटना मधुबनी जिले का जितवारपुर गांव बिहार का पहला क्राफ्ट विलेज बनेगा. भारत सरकार के वस्त्र मंत्रालय के सचिव की अध्यक्षता वाली कमेटी ने इसकी मंजूरी दे दी है. क्राफ्ट विलेज के तहत गांव की सड़क, मकान, तालाब आदि का सौंदर्यीकरण होगा. गांव में आने वाले देसी-विदेशी पर्यटकों के लिए गेस्ट रूम एवं कार्यशाला का निर्माण होगा. क्राफ्ट विलेज के लिए कुल 9 करोड़ 2 हजार 470 रुपये की स्वीकृति मिली है. इसमें 80% कुल 7,20,01.976 रुपये वस्त्र मंत्रालय देगा. शेष 20% कुल 1. 80.00.494 रुपये बिहार संग्रहालय की ओर से दिये जायेंगे. जितवारपुर में तीन लोगों को मिल चुका है पद्मश्री जितवारपुर गांव स्कूल ऑफ मिथिला पेंटिंग के नाम से मशहूर है. करीब 400 घरों वाला जितवारपुर इकलौता गांव है, जिसमें देश में सबसे अधिक तीन पद्मश्री दिये हैं. इस गांव की जगदंबा देवी को वर्ष 1975 में, सीता देवी को 1980 में और बौआ देवी को 2017 में मिथिला चित्रकला के लिए पद्मश्री मिला था. जितवारपुर से सटे लहेरियागंज गांव को अगर जोड़ दें तो पद्मश्री की संख्या पांच हो जायेगी. यहां के शिवन पासवान और उनकी पत्नी शांति देवी को वर्ष 2024 में पद्मश्री प्राप्त हो चुका है. मिथिला चित्रकला की चारों शैलियां गांव में मौजूद जितवारपुर में मिथिला चित्रकला के साथ-साथ सिक्की, पेपरमैसी, सुजनी एवं टेराकोटा शिल्प में महारत हासिल है. गांव के लगभग 18 लोगों को नेशनल अवार्ड और लगभग 40 लोगों को स्टेट अवार्ड से पुरस्कृत किया जा चुका है. यहां की चंद्रकला देवी को पेपरमैसी शिल्प में राष्ट्रीय पुरस्कार मिला है. मिथिला चित्रकला की चार प्रमुख शैलियां कचनी, भरनी, तांत्रिक एवं गोदना, ये चारों शैली देखने को मिलती है. बिहार संग्रहालय के निदेशक ने की पहल 2025 में बिहार संग्रहालय के महानिदेशक अंजनी कुमार सिंह ने पहल की. जितवारपुर को क्राफ्ट विलेज बनाने का प्रस्ताव वस्त्र मंत्रालय को भेजा गया. छह जून, 2025 को सचिव, वस्त्र मंत्रालय की अध्यक्षता में दिल्ली में इस प्रस्ताव का उच्चस्तरीय बैठक हुई. इसमें बिहार संग्रहालय के अपर निदेशक अशोक कुमार सिन्हा ने पावर प्वाइंट प्रेजेंटेशन दिया. मजबूती से पक्ष रखा और प्रस्ताव को मंजूरी मिली. जितवारपुर के क्राफ्ट विलेज बनने से खुशी: अंजनी सिंह बिहार संग्रहालय के निदेशक अंजनी कुमार सिंह ने कहा कि जितवारपुर को क्राफ्ट विलेज बनाने से बहुत खुशी है. बिहार में कई कलाएं समृद्ध हैं, लेकिन अब तक कोई भी गांव क्राफ्ट विलेज नहीं था. इस गांव से पांच-पांच लोगों को राष्ट्रीय पुरस्कार मिला है. ये बहुत खुशी की बात है. इससे गांव का विकास भी होगा.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

विज्ञापन
RAKESH RANJAN

लेखक के बारे में

By RAKESH RANJAN

RAKESH RANJAN is a contributor at Prabhat Khabar.

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन