संवाददाता, पटना राज्य में नदी किनारे से तीन सौ मीटर की दूरी के अंदर सेंकेंडरी लोडिंग प्वाइंट पर जमा बालू की अब ड्रोन से मापी होगी. साथ ही 15 जून के बाद ड्रोन से सर्वेक्षण भी होगा. इस संबंध में उपमुख्यमंत्री सह खान एवं भूतत्व विभाग के मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने बुधवार को समीक्षा बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिया है. इसका मकसद 15 जून से 15 सितंबर तक मॉनसून सीजन में नदियों से खनन बंद रहने के दौरान निर्माण कार्यों के लिए उचित कीमत पर बालू की उपलब्धता सुनिश्चित करना है. इसके साथ ही उपमुख्यमंत्री ने कहा है कि जिन जिलों में बालूघाटों से संबंधित जुर्माना लगाया गया है, वहां विस्तृत जांच के साथ जुर्माना राशि की वसूली करनी होगी.इसके साथ ही मॉनसून अवधि के लिए बालू की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए लाइसेंस प्राप्त व्यवसायियों को भी बालू का पर्याप्त स्टॉक रखने का निर्देश दिया गया है. विभागीय निर्देश के अनुसार सेकेंडरी लोडिंग प्वाइंट पर जमा बालू की ड्रोन से मापी होने के आधार पर ही उसकी बिक्री होगी. इससे बालू के अवैध खनन, भंडारण और बिक्री पर लगाम लगेगी. साथ ही बालू का वैध तरीके से खनन होने पर पर्यावरण को भी नुकसान नहीं होगा और सरकार को राजस्व की प्राप्ति होगी. विभागीय जानकारी के अनुसार राज्य में 180 घाटों से इस समय बालू खनन हो रहा है. इनमें 18 घाट सफेद बालू के हैं. राज्य सरकार की तरफ से शेड्यूल रेट पर बालू की उपलब्धता सुनिश्चित की गयी है ताकि समय पर निर्माण कार्य हो सके. सेकेंडरी लोडिंग स्थल पर सीसीटीवी कैमरे भी लगाये गये हैं. खान एवं भूतत्व विभाग की तरफ से उसका बैकअप अधिकतम 30 दिन तक के लिए रखने का निर्देश दिया गया है. इसके साथ ही इस स्थल को हर तरफ से तार से घेराबंदी करने का निर्देश दिया गया है, जिससे बालू ढुलाई वाले वाहनों की निकासी का केवल निर्धारित मार्ग ही होगा.
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