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Sarkari Naukri: बिहार पुलिस में हर 500 पदों पर एक ट्रांसजेंडर की सीधी नियुक्ति, बनेंगे सिपाही और दारोगा

Updated at : 13 Mar 2022 1:49 PM (IST)
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Sarkari Naukri: बिहार पुलिस में हर 500 पदों पर एक ट्रांसजेंडर की सीधी नियुक्ति, बनेंगे सिपाही और दारोगा

बिहार में ट्रांसजेंडरों की तैनाती अब पुलिस थानों में होगी और वो सिपाही व दारोगा बन सकेंगे. प्रत्येक पांच सौ पदों पर एक ट्रांसजेंडर की सीधी नियुक्ति होगी. जानिये बहाली की पूरी प्रक्रिया..

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नीतीश कुमार की सरकार ने बिहार में ट्रांसजेंडरों को बड़ा सौगात दिया है. किन्नरों को भी बिहार पुलिस में दारोगा और कांस्टेबल बनाने के लिए सरकार ने बड़ी पहल की है. सामान्य प्रशासन विभाग ने ट्रांसजेंडरों को पिछड़ा वर्ग अनुसूची (2) में सम्मिलित कर लिया है. इससे बिहार पुलिस के सिपाही व दारोगा पदों पर होने वाली नियुक्तियों में प्रत्येक पांच सौ पदों पर एक ट्रांसजेंडर की सीधी नियुक्ति होगी.

गृह विभाग के अनुसार, ट्रांसजेंडरों की आबादी के अनुसार आगामी नियुक्ति के चरणों में 51 ट्रांसजेंडर अभ्यर्थियों की पुलिस सेवा में सीधी नियुक्ति की जा सकेगी. इसमें सिपाही के लिए 41 जबकि अवर निरीक्षक के लिए 10 ट्रांसजेंडर अभ्यर्थियों को मौका मिलेगा. सिपाही एवं पुलिस अवर निरीक्षक की नियुक्ति के लिए 500 का एक-एक समूह या स्लॉट बनाया जायेगा.

सरकारी नियुक्ति में किन्नरों को आरक्षण देने के मुद्दे पर मुख्य सचिव आमिर सुबहानी की अध्यक्षता में हुई बैठक में यह निर्णय लिया गया. बैठक में गृह विभाग व सामान्य प्रशासन विभाग के अधिकारी भी शामिल रहे.

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, संकल्प के मुताबिक ट्रांसजेंडर को पिछड़ा वर्ग अनुसूची 2 के तहत शामिल किया गया है. अगर नियुक्ति के समय इन पदों पर योग्य व पात्र किन्नर उम्मीदवार नहीं मिलेंगे तो ये पद खाली नहीं रहेंगे बल्कि पिछड़ा वर्ग के सामान्य उम्मीदवार से इस कोटे को भरा जा सकेगा.

बता दें कि बिहार पुलिस के आगामी नियुक्ति प्रक्रिया में 51 किन्नरों की सीधी भर्ती होगी. जिसमें अभ्यर्थी को किन्नर होने का प्रमाण पत्र देना होगा. बिहार के मूल निवासी किन्नर ही इसके लिये योग्य माने जाएंगे.ट्रासजेंडर की शारीरिक दक्षता परीक्षा महिला कैटेगरी में ही ली जाती है.

बता दें कि बिहार में ट्रांसजेंडरों को समाज के मुख्य धारा से जोड़ने के लिए सरकार लगातार पहल कर रही है. वहीं पुलिस की भर्ती में ट्रांसजेंडर को प्रोत्साहित कर मौका देने के मामले में अदालत भी गंभीर रही है. याद दिलाते चलें कि वर्ष 2020 में पटना हाइकोर्ट ने इस मामले को गंभीरता से लिया था कि सिपाही भर्ती परीक्षा के फॉर्म में ट्रांसजेंडरों का कॉलम क्यों नहीं है?

गौरतलब है कि बिहार में पिछली बार हुए जनगणना के मुताबिक, बिहार में करीब 40 हजार से अधिक ट्रांसजेंडर हैं. वहीं बिहार के अलावा कई अन्य राज्यों में भी ट्रांसजेंडरों को पुलिस में तैनाती के लिए मौका दिया जाता रहा है. केरल, तमिलनाडु, राजस्थान, छतीसगढ़ और ओडिशा इसका बड़ा उदाहरण पेश करता है.

Published By: Thakur Shaktilochan

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