सम्राट सरकार के पहले महीने में सात बड़े फैसले, बिहार में विकास, शिक्षा और सुरक्षा पर फोकस

Published by : Paritosh Shahi Updated At : 15 May 2026 4:37 PM

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मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी

Samrat Choudhary: मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने अपने पहले एक महीने में बिहार में विकास, शिक्षा, सुरक्षा, प्रशासनिक पारदर्शिता और भ्रष्टाचार नियंत्रण को लेकर सात बड़े फैसले लिए हैं. सैटेलाइट टाउनशिप, पुलिस दीदी, मॉडल स्कूल, ई-निबंधन और सहयोग पोर्टल जैसी योजनाओं से पता चलता है कि सरकार की प्राथमिकता क्या है.

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Samrat Choudhary: बिहार में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने 15 अप्रैल को पद संभालने के बाद अपने पहले एक महीने में कई बड़े फैसले लेकर सरकार की प्राथमिकताएं साफ कर दी हैं. एक तरफ विकास योजनाओं को रफ्तार देने की कोशिश हुई, तो दूसरी ओर कानून व्यवस्था, शिक्षा, भ्रष्टाचार नियंत्रण और प्रशासनिक पारदर्शिता पर भी ध्यान दिया गया. सरकार ने समृद्ध बिहार के विजन के तहत कई ऐसे कदम उठाए हैं, जिनका असर सीधे आम लोगों की जिंदगी पर पड़ सकता है.

10 जिलों में 11 सैटेलाइट टाउनशिप की तैयारी

सम्राट सरकार ने बिहार के 10 जिलों में 11 सैटेलाइट टाउनशिप विकसित करने की दिशा में काम शुरू किया है. इन टाउनशिप को सुनियोजित शहरों की तरह तैयार किया जाएगा, जहां रहने, बाजार, सड़क, हरियाली और बुनियादी सुविधाओं का विशेष ध्यान रखा जाएगा. इसका मकसद बड़े शहरों पर बढ़ते दबाव को कम करना और लोगों को व्यवस्थित शहरी जीवन देना है. सरकार इसे अपने ड्रीम प्रोजेक्ट के रूप में आगे बढ़ा रही है.

पुलिस दीदी योजना से छात्राओं की सुरक्षा पर फोकस

महिलाओं और छात्राओं की सुरक्षा बढ़ाने के लिए पुलिस दीदी योजना शुरू की गई है. इसके तहत 1500 स्कूटी खरीदकर महिला पुलिसकर्मियों की तैनाती स्कूलों और कॉलेजों के आसपास की जाएगी. सरकार का लक्ष्य सड़क छेड़छाड़, महिलाओं के खिलाफ अपराध और असामाजिक तत्वों पर सख्ती बढ़ाना है.

सहयोग हेल्पलाइन, पोर्टल और पंचायत शिविर

जनता की शिकायतों के तेज निपटारे के लिए सरकार ने सहयोग हेल्पलाइन 1100, सहयोग पोर्टल और पंचायत स्तर पर सहयोग शिविर की शुरुआत की है. महीने के पहले और तीसरे मंगलवार को पंचायत स्तर पर शिविर लगेंगे, जहां थाना, अंचल और ब्लॉक से जुड़ी शिकायतें सुनी जाएंगी. पोर्टल पर 30 दिन में शिकायत समाधान का लक्ष्य तय किया गया है. तय समय में काम नहीं होने पर जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई भी हो सकती है.

हर प्रखंड में मॉडल स्कूल और नए डिग्री कॉलेज

शिक्षा क्षेत्र में सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए सभी जिला स्कूलों और हर प्रखंड के एक चयनित उच्च माध्यमिक विद्यालय को मॉडल स्कूल बनाने के लिए 800 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं. साथ ही जिन 208 प्रखंडों में डिग्री कॉलेज नहीं हैं, वहां नए कॉलेज खोलने की प्रक्रिया शुरू की गई है. इससे शिक्षा व्यवस्था मजबूत करने और युवाओं को स्थानीय स्तर पर बेहतर पढ़ाई का मौका देने की कोशिश है.

निजी स्कूलों की मनमानी पर सख्त कदम

निजी स्कूलों की फीस और अन्य शुल्कों में पारदर्शिता लाने के लिए सरकार ने नई व्यवस्था लागू की है. अब स्कूलों को फीस संरचना सार्वजनिक करनी होगी. मनमानी फीस वृद्धि पर रोक रहेगी. माता-पिता को किताबें और यूनिफॉर्म अपनी पसंद की जगह से खरीदने की छूट होगी. फीस बकाया होने पर भी छात्र को परीक्षा या रिजल्ट से नहीं रोका जा सकेगा.

50 करोड़ तक के सरकारी ठेकों में बिहारी संवेदकों को प्राथमिकता

राज्य सरकार ने बिहार लोक निर्माण व्यवस्था में बदलाव करते हुए 50 करोड़ रुपये तक की परियोजनाओं में राज्य के संवेदकों को प्राथमिकता देने का फैसला किया है. इससे स्थानीय ठेकेदारों को अधिक अवसर मिलेंगे और बिहार के लोगों की भागीदारी बढ़ेगी.

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ई-निबंधन और बुजुर्गों को घर बैठे सुविधा

जमीन और संपत्ति रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया को पेपरलेस बनाने के लिए ई-निबंधन व्यवस्था लागू की गई है. इसका मकसद भ्रष्टाचार कम करना और प्रक्रिया को तेज व पारदर्शी बनाना है. साथ ही 80 वर्ष से अधिक उम्र के बुजुर्गों को घर बैठे रजिस्ट्री सुविधा देने का फैसला लिया गया है.

सरकार ने गंभीर अपराधों पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं. पुलिस को संदेश दिया गया है कि हिनीयस क्राइम के मामलों में किसी तरह की ढिलाई नहीं चलेगी. इसी नीति के तहत कई सख्त कदम और कार्रवाई भी देखने को मिली है.

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परितोष शाही पिछले 4 वर्षों से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की और वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल की बिहार टीम का हिस्सा हैं. राजनीति, सिनेमा और खेल, विशेषकर क्रिकेट में उनकी गहरी रुचि है. जटिल खबरों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाना और बदलते न्यूज माहौल में तेजी से काम करना उनकी विशेषता है. परितोष शाही ने पत्रकारिता की पढ़ाई बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) से की. पढ़ाई के दौरान ही पत्रकारिता की बारीकियों को समझना शुरू कर दिया था. खबरों को देखने, समझने और लोगों तक सही तरीके से पहुंचाने की सोच ने शुरुआत से ही इस क्षेत्र की ओर आकर्षित किया. पत्रकारिता में करियर की पहली बड़ी शुरुआत बिहार विधानसभा चुनाव 2020 के दौरान हुई, जब उन्होंने जन की बात के साथ इंटर्नशिप की. इस दौरान बिहार के 26 जिलों में जाकर सर्वे किया. यह अनुभव काफी खास रहा, क्योंकि यहां जमीनी स्तर पर राजनीति, जनता के मुद्दों और चुनावी माहौल को बहुत करीब से समझा. इसी अनुभव ने राजनीतिक समझ को और मजबूत बनाया. इसके बाद राजस्थान पत्रिका में 3 महीने की इंटर्नशिप की. यहां खबर लिखने की असली दुनिया को करीब से जाना. महज एक महीने के अंदर ही रियल टाइम न्यूज लिखने लगे. इस दौरान सीखा कि तेजी के साथ-साथ खबर की सटीकता कितनी जरूरी होती है. राजस्थान पत्रिका ने उनके अंदर एक मजबूत डिजिटल पत्रकार की नींव रखी. पत्रकारिता के सफर में आगे बढ़ते हुए पटना के जनता जंक्शन न्यूज पोर्टल में वीडियो प्रोड्यूसर के रूप में भी काम किया. यहां कैमरे के सामने बोलना, प्रेजेंटेशन देना और वीडियो कंटेंट की बारीकियां सीखीं. करीब 6 महीने के इस अनुभव ने कैमरा फ्रेंडली बनाया और ऑन-स्क्रीन प्रेजेंस को मजबूत किया. 1 अप्रैल 2023 को राजस्थान पत्रिका को प्रोफेशनल तौर पर ज्वाइन किया. यहां 17 महीने में कई बड़े चुनावी कवरेज में अहम भूमिका निभाई. लोकसभा चुनाव 2024 में नेशनल टीम के साथ जिम्मेदारी संभालने का मौका मिला. इसके अलावा मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के दौरान भी स्टेट टीम के साथ मिलकर काम किया. इस दौरान चुनावी रणनीति, राजनीतिक घटनाक्रम और बड़े मुद्दों पर काम करने का व्यापक अनुभव मिला. फिलहाल परितोष शाही प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम के साथ जुड़े हुए हैं. यहां बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान कई बड़ी खबरों को रियल टाइम में ब्रेक किया, ग्राउंड से जुड़े मुद्दों पर खबरें लिखीं और वीडियो भी बनाए. बिहार चुनाव के दौरान कई जिलों में गांव- गांव घूम कर लोगों की समस्या को जाना-समझा और उनके मुद्दे को जन प्रतिनिधियों तक पहुंचाया. उनकी कोशिश हमेशा यही रहती है कि पाठकों और दर्शकों तक सबसे पहले, सही और असरदार खबर पहुंचे. पत्रकारिता में लक्ष्य लगातार सीखते रहना, खुद को बेहतर बनाना और भरोसेमंद पत्रकार के रूप में अपनी पहचान मजबूत करना है.

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