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प्रशांत किशोर ने स्वास्थ्य मंत्री पर लगाये आरोप, मंगल पांडेय ने सभी आरोपों को बताया निराधार

Updated at : 09 Aug 2025 1:34 AM (IST)
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प्रशांत किशोर ने स्वास्थ्य मंत्री पर लगाये आरोप, मंगल पांडेय ने सभी आरोपों को बताया निराधार

जन सुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर ने स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय पर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष दिलीप जायसवाल से 25 लाख रुपये रिश्वत लेने और इस पैसे से दिल्ली में पत्नी के नाम पर फ्लैट खरीदने का आरोप लगाया है.

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संवाददाता, पटना

जन सुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर ने स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय पर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष दिलीप जायसवाल से 25 लाख रुपये रिश्वत लेने और इस पैसे से दिल्ली में पत्नी के नाम पर फ्लैट खरीदने का आरोप लगाया है.

प्रशांत किशोर ने शुक्रवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि किशनगंज के एमजीएम मेडिकल कॉलेज को डीम्ड यूनिवर्सिटी का दर्जा दिलाने के नाम पर मंगल पांडेय ने दिलीप जायसवाल से यह रिश्वत ली थी. इसके साथ ही उन्होंने एनडीए सरकार के बारे में कहा कि सरकार आपकी है अगर हमने कोई गलती की है तो पकड़ लीजिये. इसके साथ ही प्रशांत किशोर ने मंगल पांडेय पर एंबुलेंस खरीदने में भी भ्रष्टाचार का आरोप लगाया. प्रशांत किशोर ने कहा कि गलत तरीके से टाटा मोटर्स का टेंडर खारिज कर फोर्स मोटर्स को मार्केट रेट से अधिक पैसा देकर एंबुलेंस खरीदा गया. प्रशांत किशोर ने यह भी बताया कि किशनगंज के एमजीएम कॉलेज में आयुष्मान कार्ड बनाने के नाम पर भी बड़ा फर्जीवाड़ा हुआ है. पिताजी ने दिलीप जायसवाल को चेक से वापस किये ऋण के पैसे : मंगल

पटना. स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने प्रशांत किशोर के सभी आरोपों को निराधार बताया है. स्वास्थ्य मंत्री ने रिश्वत के पैसे से पत्नी के नाम पर फ्लैट खरीदने के आरोप पर कहा कि डाॅ दिलीप जायसवाल से जो पैसा ऋण के रूप में पिताजी के खाते में लिया गया था,उस पैसे को पौने पांच साल पहले वापस कर दिया गया है. जो राशि ऋण के रूप में चेक से पिताजी के खाते में ली गयी थी, उस राशि को वापस भी पिताजी ने चेक से ही कर दिया है. प्रशांत किशोर ने एक कॉलेज के विश्वविद्यालय की मान्यता को लेकर जो आरोप लगाये है, उसके विषय में मंत्री ने कहा कि विश्वविद्यालय की मान्यता में स्वास्थ्य विभाग का कोई रोल नहीं होता है. एंबुलेंस खरीद में हेराफेरी के आरोपों को लेकर कहा कि इसके लिए एक प्रक्रिया है. निविदा होती है, निविदा में संबंधित पक्ष अपनी निविदा देती है. उसके निष्पादन की भी एक प्रक्रिया है. निष्पादन प्रक्रिया से जो पक्ष सहमत नहीं होता है, तो न्यायालय जाता है. स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि इस मामले में भी लोग न्यायालय गये हैं. यह मामला उच्च न्यायालय में है. विभाग ने बताया है कि अभी तक इस मामले में कोई भुगतान भी नहीं हुआ है. श्री पांडेय ने कहा कि जब भुगतान ही नहीं हुआ, तो घोटाला कैसे हो गया.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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