बीजेपी के गढ़ में PK ने ऐसे बिछाया चुनावी चक्रव्यूह, सिर्फ समीकरण नहीं, जीत के लिए ये 4 दांव भी आजमा रहे हैं प्रशांत किशोर

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बांकीपुर में चुनाव प्रचार के दौरान प्रशांत किशोर

बांकीपुर में चुनाव प्रचार के दौरान प्रशांत किशोर

Bankipur Bypoll: बांकीपुर उपचुनाव में सियासी मुकाबला दिलचस्प हो गया है. बीजेपी के मजबूत गढ़ में प्रशांत किशोर पहली बार चुनावी मैदान में उतरे हैं और पूरी ताकत से प्रचार में जुटे हैं. युवा ब्रिगेड, महिला टीम और हाईटेक कैंपेन के जरिए PK ने बीजेपी के किले को चुनौती देने की रणनीति तैयार की है.

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Bankipur Bypoll: बिहार की बांकीपुर विधानसभा सीट पर होने वाला उपचुनाव अब सिर्फ एक सीट की लड़ाई नहीं रह गया है. यह चुनाव कई मायनों में अहम बन गया है. बीजेपी के मजबूत किले माने जाने वाले बांकीपुर में इस बार मुकाबला त्रिकोणीय हो गया है. बीजेपी ने अभिषेक कुमार को मैदान में उतारा है, आरजेडी ने रेखा गुप्ता पर भरोसा जताया है, जबकि जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर पहली बार चुनावी मैदान में उतरे हैं.

बीजेपी के अभेद किले में PK की एंट्री

बांकीपुर विधानसभा सीट लंबे समय से बीजेपी का गढ़ रही है. इस सीट पर पार्टी की पकड़ इतनी मजबूत रही है कि 1995 के बाद से बीजेपी यहां लगातार जीत दर्ज करती आई है.

इस सीट की पहचान पूर्व विधायक नितिन नवीन और उनके परिवार से भी जुड़ी रही है. नितिन नवीन यहां से पांच बार विधायक रह चुके हैं, जबकि उनके पिता नवीन किशोर प्रसाद सिन्हा भी चार बार इस सीट का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं.

ऐसे में प्रशांत किशोर के लिए बांकीपुर का चुनाव आसान चुनौती नहीं है. उन्हें न सिर्फ बीजेपी के संगठन से मुकाबला करना है, बल्कि उस राजनीतिक विरासत को भी चुनौती देनी है जो करीब तीन दशक से इस सीट पर कायम है.

बांकीपुर में प्रशांत किशोर
बांकीपुर में प्रशांत किशोर

PK का फोकस जनता के स्थानीय मुद्दों पर

प्रशांत किशोर ने बांकीपुर में चुनावी रणनीति को पूरी तरह स्थानीय मुद्दों के आसपास रखा है. वह लगातार क्षेत्र की गलियों में घूमकर लोगों से सीधा संवाद कर रहे हैं. जन सुराज की रणनीति में जाति और धर्म के बजाय सड़क, पानी, ट्रैफिक, जलजमाव और ड्रेनेज जैसे मुद्दों को प्रमुखता दी जा रही है.

पीके अपने प्रचार में यह सवाल उठा रहे हैं कि राजधानी पटना का हिस्सा होने के बावजूद बांकीपुर के कई इलाकों में बारिश के दौरान जलजमाव की समस्या क्यों बनी हुई है. वह लोगों को भरोसा दिलाने की कोशिश कर रहे हैं कि अगर जन सुराज को मौका मिलता है तो स्थानीय समस्याओं का स्थायी समाधान किया जाएगा.

युवा ब्रिगेड ने संभाली प्रचार की कमान

प्रशांत किशोर ने चुनाव प्रचार के लिए अपनी युवा टीम को मैदान में उतार दिया है. जन सुराज के कार्यकर्ता सुबह से ही इलाके में एक्टिव हो जाते हैं.

युवा टीम पार्कों, चाय की दुकानों और सार्वजनिक जगहों पर लोगों से बातचीत कर रही है. खासकर नौकरीपेशा लोगों और बुजुर्गों से संपर्क कर स्थानीय समस्याओं पर चर्चा की जा रही है.

इस प्रचार अभियान में पार्टी यह संदेश देने की कोशिश कर रही है कि चुनाव सिर्फ राजनीतिक दलों की लड़ाई नहीं, बल्कि बांकीपुर के विकास के मुद्दों की लड़ाई है.

महिलाएं कर रहीं घर-घर संपर्क

जन सुराज की महिला ब्रिगेड भी चुनाव प्रचार में सक्रिय नजर आ रही है. महिला कार्यकर्ता दोपहर बाद घर-घर जाकर लोगों से संपर्क कर रही हैं.

महंगाई, महिलाओं की सुरक्षा, बच्चों की पढ़ाई और रोजगार जैसे मुद्दों को लेकर महिला मतदाताओं तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है. पार्टी की रणनीति है कि महिलाओं के बीच सीधा संवाद स्थापित कर अलग तरह का चुनावी माहौल बनाया जाए.

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हाईटेक प्रचार के साथ नुक्कड़ नाटक का सहारा

प्रशांत किशोर की चुनावी रणनीति में पारंपरिक और आधुनिक दोनों तरीकों का इस्तेमाल किया जा रहा है. सोशल मीडिया कैंपेन के साथ-साथ नुक्कड़ नाटक के जरिए भी लोगों तक पहुंच बनाई जा रही है.

शाम के समय गली-मोहल्लों और चौराहों पर सांस्कृतिक टीमों के जरिए राजनीतिक संदेश देने की कोशिश की जा रही है. इसमें बीजेपी-जेडीयू और आरजेडी पर लंबे समय तक सत्ता में रहने के बावजूद बिहार की समस्याओं को दूर नहीं करने का आरोप लगाया जा रहा है.

PK के सामने सबसे बड़ी चुनौती

प्रशांत किशोर के सामने सबसे बड़ी चुनौती बीजेपी के मजबूत संगठन को मात देना है. बांकीपुर जैसी सीट पर जहां बीजेपी का पारंपरिक वोट बैंक मजबूत माना जाता है, वहां जन सुराज के लिए अपनी जगह बनाना आसान नहीं होगा.

हालांकि, प्रशांत किशोर अपने चुनाव प्रचार को बदलाव और नए राजनीतिक विकल्प के तौर पर पेश कर रहे हैं. वह युवाओं और नए मतदाताओं को जोड़ने पर सबसे ज्यादा जोर दे रहे हैं.

अब देखने वाली बात होगी कि बांकीपुर की जनता इस बार पुराने राजनीतिक भरोसे के साथ जाती है या फिर प्रशांत किशोर के नए प्रयोग को मौका देती है. यह चुनाव सिर्फ एक विधायक चुनने का नहीं, बल्कि बिहार की बदलती राजनीतिक दिशा का भी संकेत माना जा रहा है.

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Abhinandan Pandey

लेखक के बारे में

By Abhinandan Pandey

भोपाल से शुरू हुई पत्रकारिता की यात्रा ने बंसल न्यूज (MP/CG) और दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अनुभव लेते हुए अब प्रभात खबर डिजिटल तक का मुकाम तय किया है. वर्तमान में पटना में कार्यरत हूं और बिहार की सामाजिक-राजनीतिक नब्ज को करीब से समझने का प्रयास कर रहा हूं. गौतम बुद्ध, चाणक्य और आर्यभट की धरती से होने का गर्व है. देश-विदेश की घटनाओं, बिहार की राजनीति, और किस्से-कहानियों में विशेष रुचि रखता हूं. डिजिटल मीडिया के नए ट्रेंड्स, टूल्स और नैरेटिव स्टाइल्स के साथ प्रयोग करना पसंद है.

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