IGIMS फॉलोअप: साढ़े तीन साल से चल रहा था आयुष्मान घोटाला, अब सभी मरीजों के इलाज की होगी ऑडिट
Published by : Nikhil Anurag Updated At : 27 May 2026 9:05 PM
Patna News: आईजीआईएमएस में आयुष्मान योजना के तहत 45 लाख रुपये घोटाले की जांच शुरू हुई. छह सदस्यीय टीम ने रिकॉर्ड खंगाले, कंप्यूटर डेटा जब्त किया और तीन साल के इलाज की ऑडिट का फैसला लिया.
Patna News: (आनंद तिवारी की रिपोर्ट) इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान (आईजीआईएमएस) में आयुष्मान भारत योजना के तहत हुए करीब 45 लाख रुपये के कथित गबन मामले की जांच तेज हो गई है. स्वास्थ्य विभाग द्वारा गठित छह सदस्यीय जांच कमेटी ने बुधवार से औपचारिक जांच शुरू कर दी. टीम ने संस्थान के प्रशासनिक भवन में करीब दो घंटे तक बंद कमरे में बैठक की और कई अहम बिंदुओं पर चर्चा की.
बैठक की निगरानी स्वास्थ्य विभाग के प्रतिनिधि सदस्य एवं निदेशक डॉ. बिंदे कुमार ने की. बैठक से पहले स्वास्थ्य विभाग से पहुंचे दो अधिकारियों ने मेन ओपीडी भवन स्थित आयुष्मान भारत कार्यालय के रूम नंबर 22 का निरीक्षण किया. इस दौरान आयुष्मान योजना से जुड़े तकनीकी विभाग के सॉफ्टवेयर इंजीनियरों को भी शामिल किया गया.
कंप्यूटर सिस्टम की जांच हुई, डाटा को किया गया जब्त
जांच टीम ने आउटसोर्सिंग एजेंसी मेहता डाटा मैट्रिक्स कंपनी के पकड़े गए चार कर्मचारियों के कंप्यूटर सिस्टम की भी जांच की. सूत्रों के मुताबिक कई महत्वपूर्ण और सुरक्षित डाटा को टीम अपने साथ ले गई है. प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई है कि यह गड़बड़ी पिछले साढ़े तीन वर्षों से जारी थी. हालांकि संस्थान के जिम्मेदार अधिकारी फिलहाल मामले पर खुलकर कुछ भी बोलने से बच रहे हैं.
सभी आयुष्मान मरीजों के इलाज की होगी ऑडिट
बैठक में यह निर्णय लिया गया कि पिछले साढ़े तीन साल में आयुष्मान भारत योजना के तहत हुए सभी इलाजों की ऑडिट कराई जाएगी. इसके अलावा योजना से जुड़े स्थायी कर्मचारियों से भी पूछताछ होगी. जानकारी के अनुसार, आयुष्मान योजना के संचालन की जिम्मेदारी संस्थान प्रशासन ने मेहता डाटा मैट्रिक्स कंपनी को आउटसोर्स की थी. बैठक में कंपनी के जिम्मेदार अधिकारियों को भी बुलाया गया था.
क्या है पूरा मामला
आईजीआईएमएस में आरोप है कि आयुष्मान योजना के पात्र मरीजों को लाभार्थी श्रेणी में दर्ज करने के बजाय कैश बेसिस मरीज दिखाकर उनसे नकद वसूली की गई और सरकारी राशि में हेराफेरी की गई. संस्थान के मुख्य प्रशासनिक अधिकारी प्रफुल्ल रंजन की शिकायत पर शास्त्रीनगर थाना में प्राथमिकी दर्ज की गई है. मामले में आउटसोर्सिंग कंपनी के अमरजीत राज, चंदन कुमार, साकेत कुमार और अभिषेक कुमार को नामजद आरोपी बनाया गया है.
आरोप है कि इन लोगों ने आयुष्मान भारत योजना के लाभार्थियों की श्रेणी बदलकर उन्हें नकद भुगतान वाले मरीज के रूप में दर्ज किया और जमा राशि का गबन कर लिया.
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