पटना की 200 फैक्ट्रियां हाई-रिस्क पर, 27 टीमें करेंगी ऑडिट, अग्निकांड के बाद जागा प्रशासन

सांकेतिक फोटो
Patna Industrial Fire Audit: पटना के दीदारगंज में तेल फैक्ट्री में लगी भीषण आग के बाद प्रशासन एक्शन में आ गया है. बिहार अग्निशमन सेवा की 27 विशेष टीमों ने जिले की करीब 1000 फैक्ट्रियों और गोदामों का फायर ऑडिट शुरू कर दिया है. नियमों में लापरवाही मिलने पर सीधे सीलिंग की कार्रवाई होगी.
Patna Industrial Fire Audit: पटना के दीदारगंज में डालडा और रिफाइंड ऑयल के गोदाम में लगी भीषण आग के बाद प्रशासन ने कड़ा रुख अपना लिया है. इस घटना में शॉर्ट सर्किट की वजह से 50 लाख से ज्यादा का नुकसान हुआ और 22 दमकल गाड़ियों को मशक्कत करनी पड़ी. इस हादसे के बाद अब पटना की तमाम औद्योगिक इकाइयों की सुरक्षा जांच के लिए बिहार अग्निशमन सेवा ने 27 विशेष टीमों को मैदान में उतार दिया है. यह टीमें चरणबद्ध तरीके से सभी फैक्ट्रियों, गोदामों और कमर्शियल सेंटरों का फायर ऑडिट करेंगी.
केमिकल और प्लास्टिक जैसी हाई-रिस्क फैक्ट्रियों पर पहला वार
इस अभियान के तहत सबसे पहले उन फैक्ट्रियों और गोदामों की जांच की जाएगी जहां केमिकल, खाने का तेल, प्लास्टिक, पेंट और अन्य तुरंत आग पकड़ने वाले सामानों का काम होता है. जिला अग्निशमन पदाधिकारी रितेश पांडेय ने चेतावनी दी है कि जांच में कमी मिलने पर पहले नोटिस दिया जाएगा. इसके बाद भी अगर तय समय में सुधार नहीं हुआ, तो फायर एनओसी रद्द कर दी जाएगी, फैक्ट्री को सील कर दिया जाएगा और मालिकों पर कानूनी केस दर्ज होगा.
पटना के इन इलाकों में सबसे ज्यादा खतरा, सड़कें भी हैं संकरी
पटना जिले में लगभग 700 से 1000 छोटी-बड़ी औद्योगिक इकाइयां और गोदाम चल रहे हैं. इनमें से करीब 150 से 200 इकाइयां ऐसी हैं जिन्हें हाई-रिस्क की कैटेगरी में रखा गया है. आंकड़ों के मुताबिक, 70 फीसदी से ज्यादा फैक्ट्रियां पूर्वी पटना के दीदारगंज-फतुहा-पटना सिटी बेल्ट और बिहटा औद्योगिक क्षेत्र में हैं. दीदारगंज, फतुहा और गुलजारबाग जैसे इलाकों में संकरी सड़कें, घनी आबादी और ज्वलनशील पदार्थों का भारी स्टॉक होने की वजह से आग लगने पर राहत काम बहुत मुश्किल हो जाता है.
पिछले डेढ़ साल में हुए कई बड़े हादसे
पटना में पिछले डेढ़ साल के अंदर यह दूसरा बड़ा हादसा है. इससे पहले 31 मार्च 2025 को बाढ़ के गुलाबबाग में एक केमिकल फैक्ट्री में भीषण आग लगी थी, जहां धमाकों के बीच 200 फीट ऊंची लपटें उठी थीं. इसके अलावा जनवरी 2026 में कर्मलीचक के प्लास्टिक गोदाम और सितंबर 2025 में फतुहा की फोम फैक्ट्री में भी भयंकर आग लग चुकी है.
इससे पहले विभाग ने सख्त रुख अपनाते हुए 110 होटलों, कई कोचिंग सेंटरों, अस्पतालों और बड़ी बिल्डिंगों की जांच कर 100 से ज्यादा संस्थानों को नोटिस थमाया था. अब ठीक वैसी ही कड़ाई फैक्ट्रियों पर भी की जा रही है.
बिहार की ताजा खबरों के लिए क्लिक करें
ऑडिट के दौरान इन 10 मुख्य बातों की होगी कड़ाई से जांच
जांच के लिए निकली टीमें फैक्ट्रियों में इन मुख्य बिंदुओं को बारीकी से चेक करेंगी
- फायर एनओसी (NOC) वैलिड है या नहीं.
- आग बुझाने वाले सिलेंडर (फायर एक्सटिंग्विशर) और हाइड्रेंट सिस्टम चालू हालत में हैं या नहीं.
- स्प्रिंकलर और स्मोक डिटेक्टर सही तरीके से काम कर रहे हैं या नहीं.
- फायर अलार्म सिस्टम की मौजूदा स्थिति कैसी है.
- इमरजेंसी एग्जिट यानी संकट के समय बाहर निकलने का रास्ता मौजूद है या नहीं.
- बिजली की वायरिंग और लोड का सही आकलन हुआ है या नहीं.
- ज्वलनशील और खतरनाक केमिकल का सुरक्षित भंडारण किया गया है या नहीं.
- कर्मचारियों को आग से बचने की ट्रेनिंग और मॉक ड्रिल कराई गई है या नहीं.
- संकरी गलियों में फायर ब्रिगेड की गाड़ियों के आने-जाने का रास्ता साफ है या नहीं.
- सबसे संवेदनशील हिस्सा कौन सा है और वहां सुरक्षा के क्या इंतजाम हैं.
इसे भी पढ़ें: बिहार के इन दो जिलों के बीच का सफर होगा आसान, 82 करोड़ होंगे खर्च, बनेगा नया बाईपास
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
लेखक के बारे में
By Paritosh Shahi
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए










