सरप्लस शिक्षकों के तबादले पर हाईकोर्ट की रोक, जहां हैं वहीं रहेंगे शिक्षक, सरकार से मांगा जवाब
पटना हाईकोर्ट का आदेश, यथास्थिति बनाए रखें
Bihar Teacher Transfer: बिहार में सरप्लस के आधार पर शिक्षकों के स्थानांतरण पर पटना हाईकोर्ट ने रोक लगाते हुए फिलहाल यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया है. न्यायमूर्ति अजीत कुमार की एकलपीठ ने राज्य सरकार को चार सप्ताह में जवाबी हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है. तब तक प्रभावित शिक्षक अपने मौजूदा विद्यालय में ही बने रहेंगे.
Bihar Teacher Transfer: सरप्लस के आधार पर शिक्षकों के स्थानांतरण और पदस्थापन के मामले में पटना हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण अंतरिम आदेश देते हुए फिलहाल यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश दिया है. कोर्ट के इस आदेश के बाद अगले आदेश तक वैसे शिक्षक, जो सरप्लस के आधार पर स्थानांतरण से प्रभावित हो रहे थे, अपने वर्तमान कार्यस्थल पर ही बने रहेंगे.
अदालत में क्या बताया गया
अदालत ने राज्य सरकार को मामले में जवाबी हलफनामा चार सप्ताह में दाखिल करने का निर्देश दिया है. न्यायमूर्ति अजीत कुमार की एकलपीठ ने नरेंद्र कुमार नंद एवं अन्य की ओर से दायर रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया. याचिकाकर्ताओं की ओर से वरीय अधिवक्ता ललित किशोर एवं अधिवक्ता मृत्युंजय कुमार ने अदालत के समक्ष अपना पक्ष रखा.
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से अदालत को बताया गया कि सरप्लस के नाम पर शिक्षकों के स्थानांतरण की प्रक्रिया में कई विसंगतियां सामने आ रही हैं. इस प्रक्रिया से बड़ी संख्या में शिक्षक प्रभावित हो रहे हैं और उन्हें अपने वर्तमान पदस्थापन से हटाए जाने के कारण परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. अधिवक्ताओं ने अदालत के समक्ष स्थानांतरण की प्रक्रिया में अपनाई जा रही व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल उठाए और बताया कि पूरी प्रक्रिया को लेकर शिक्षकों के बीच असंतोष है.
कोर्ट के आदेश का क्या मतलब
याचिकाकर्ताओं की दलीलें सुनने के बाद न्यायालय ने मामले में फिलहाल ‘स्टेटस क्वो’ (यथास्थिति) बनाए रखने का आदेश दिया. इसका सीधा अर्थ है कि अगला आदेश आने तक संबंधित शिक्षकों के वर्तमान पदस्थापन में बदलाव नहीं किया जाएगा. सरप्लस के आधार पर प्रस्तावित या किए जा रहे स्थानांतरण का प्रभाव फिलहाल स्थगित रहेगा और संबंधित शिक्षक अपने वर्तमान विद्यालय अथवा कार्यस्थल पर ही कार्य करते रहेंगे.
हाईकोर्ट के इस अंतरिम आदेश को सरप्लस शिक्षकों के लिए महत्वपूर्ण राहत के तौर पर देखा जा रहा है. हालांकि, यह अंतिम फैसला नहीं है. अब मामले में राज्य सरकार की ओर से दाखिल किए जाने वाले जवाबी हलफनामे और अगली सुनवाई में होने वाली दलीलों के बाद स्थिति और स्पष्ट होगी. चार सप्ताह बाद होने वाली सुनवाई में अदालत मामले के विभिन्न पहलुओं पर आगे विचार करेगी.
ट्रांसफर प्रक्रिया पर उठे सवाल
याचिकाकर्ताओं की ओर से मुख्य रूप से सरप्लस निर्धारण और उसके आधार पर स्थानांतरण की प्रक्रिया को लेकर आपत्ति जताई गई. उनका कहना था कि यदि शिक्षकों के स्थानांतरण की प्रक्रिया में निर्धारित मानकों और वास्तविक परिस्थितियों का समुचित ध्यान नहीं रखा जाता है, तो इससे शिक्षकों के साथ-साथ विद्यालयों की व्यवस्था भी प्रभावित हो सकती है. इसी संदर्भ में अदालत से मामले में हस्तक्षेप की मांग की गई थी.
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चार सप्ताह बाद होगी अगली सुनवाई
फिलहाल हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से जवाब मांगा है. सरकार का जवाबी हलफनामा दाखिल होने के बाद अगली सुनवाई में मामले के कानूनी और तथ्यात्मक पहलुओं पर विस्तृत विचार होने की संभावना है. तब तक वर्तमान स्थिति बनी रहेगी और संबंधित शिक्षक अपने मौजूदा कार्यस्थल पर ही कार्यरत रहेंगे.
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By परितोष शाही
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