पीएमसीएच में आउटसोर्सिंग कर्मियों की हड़ताल से स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित, मरीजों को दवा और साफ चादर तक नहीं मिली

Author Anand tiwari|Edited by Nikhil Anurag
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PMCH में आउटसोर्सिंग कर्मियों की हड़ताल

PMCH में आउटसोर्सिंग कर्मियों की हड़ताल

PMCH strike : पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल (पीएमसीएच) में आउटसोर्सिंग कर्मियों की हड़ताल के कारण सोमवार को स्वास्थ्य सेवाएं बुरी तरह प्रभावित हुईं. मरीजों को साफ चादरें न मिलने और आयुष्मान योजना की सेवाओं में बाधा आने से हाहाकार मच गया. अस्पताल अधीक्षक ने तत्काल कार्रवाई का आश्वासन दिया है.

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PMCH strike : बिहार के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल पटना मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (पीएमसीएच) में सोमवार को आउटसोर्सिंग कर्मियों की हड़ताल के कारण स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित रहीं. वार्डों में भर्ती मरीजों को साफ चादरें नहीं मिल सकीं, जबकि आयुष्मान योजना के तहत इलाज, दवा वितरण और भर्ती जैसी सेवाओं में भी बाधा उत्पन्न हुई. इससे मरीजों, उनके परिजनों, डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा.

वार्डों से लेकर ऑपरेशन थिएटर तक प्रभावित हुई व्यवस्था

फ्रंट लाइन एजेंसी के तहत कार्यरत आउटसोर्सिंग कर्मियों ने काम बंद कर धरना शुरू कर दिया और एजेंसी के खिलाफ नारेबाजी की. हड़ताल के कारण राजेंद्र सर्जिकल ब्लॉक, इमरजेंसी और अन्य वार्डों में भर्ती मरीजों को साफ चादरें नहीं मिल सकीं. वहीं ऑक्सीजन आपूर्ति से जुड़े कार्य, ऑपरेशन थिएटर और अस्पताल परिसर की सफाई व्यवस्था भी प्रभावित रही.

आयुष्मान योजना के मरीजों को हुई सबसे ज्यादा परेशानी

जानकारी के अनुसार, पीएमसीएच में फ्रंट लाइन एजेंसी के माध्यम से 350 से अधिक कर्मचारी कार्यरत हैं. ये कर्मचारी मरीजों की भर्ती, वार्ड प्रबंधन, चादर वितरण, आयुष्मान भारत योजना के तहत डॉक्टरों से आवश्यक अनुमोदन दिलाने, मुफ्त दवा उपलब्ध कराने और सर्जरी संबंधी प्रक्रियाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. हड़ताल के चलते आयुष्मान योजना के लाभार्थियों को दवा, भर्ती और सर्जरी की प्रक्रिया में काफी परेशानी हुई. कई मरीजों को पुराने और गंदे चादरों पर ही इलाज कराना पड़ा.

कर्मियों का आरोप- 11 हजार की जगह 8 हजार वेतन, छह माह से नहीं मिला भुगतान

आउटसोर्सिंग कर्मियों ने आरोप लगाया कि उन्हें निर्धारित 11 हजार रुपये के बजाय केवल 8 हजार रुपये मासिक वेतन दिया जाता है. साथ ही पिछले छह महीने से वेतन का भुगतान भी नहीं किया गया है. वार्ड अटेंडेंट अनिता देवी, मोहित ठाकुर, अमित कुमार, सुमित कुमार और अंजनी सहित अन्य कर्मियों ने कहा कि कम वेतन और लंबे समय से भुगतान नहीं होने के कारण परिवार का भरण-पोषण करना मुश्किल हो गया है.

2023 से उठा रहे हैं वेतन का मुद्दा

वार्ड बॉय मोहित कुमार ने बताया कि वेतन भुगतान को लेकर वर्ष 2023 में भी आंदोलन किया गया था, लेकिन अब तक स्थिति में सुधार नहीं हुआ है. उन्होंने आरोप लगाया कि एजेंसी समय पर भुगतान नहीं करती और वेतन बढ़ाने की मांग पर भी कोई ध्यान नहीं दिया जाता. कर्मियों का कहना है कि कई बार अस्पताल प्रशासन और एजेंसी प्रबंधन से शिकायत की गई, लेकिन कोई समाधान नहीं निकला.

अधीक्षक बोले- वेतन नहीं मिला तो रद्द होगा टेंडर

पीएमसीएच के अधीक्षक डॉ. राजीव कुमार सिंह ने कहा कि संबंधित एजेंसी के अधिकारियों को तलब किया गया है. उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि कर्मचारियों का बकाया वेतन जल्द नहीं दिया गया तो संबंधित कंपनी का टेंडर रद्द कर नई मैनपावर एजेंसी के लिए फ्रेश टेंडर जारी किया जाएगा, ताकि कर्मचारियों और मरीजों को किसी तरह की परेशानी न हो.

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