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कुशहा तटबंध टूटने के लिए नेपाल जिम्मेवार, बाढ़ व सूखा सूबे की सबसे बड़ी समस्या : नीतीश कुमार

By Prabhat khabar Digital
Updated Date
नीतीश कुमार, मुख्यमंत्री, बिहार
नीतीश कुमार, मुख्यमंत्री, बिहार
सोशल मीडिया

पटना : मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा है कि 2008 में कुशहा तटबंध टूटने की घटना के लिए नेपाल जिम्मेवार रहा है. बुधवार को सिंचाई विभाग की 23 योजनाओं का उद्घाटन और लोकार्पण और सात का शिलान्यास करते हुए कहा कि नेपाल की ओर से नो मेंस लैंड पर भी बाढ़ निरोधक कार्यों को किये जाने से रोका जा रहा है.

उन्होंने इसी क्रम में कहा कि 2008 में भी नेपाल ने बाढ़ निरोधक निर्माण कार्य करने देने से रोक दिया था, अगर वह काम करने देता तो कुशहा जैसी नौबत नहीं आती. मुख्यमंत्री ने उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी और तीन पूर्व जल संसाधन मंत्री विजेंद्र प्रसाद यादव, विजय कुमार चौधरी व राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह की मौजूदगी मेें विभाग के मंत्री संजय झा और अधिकारियों से बाढ़ को लेकर अलर्ट रहने को कहा.

वर्चुअल बैठक में को संबोधित करते मुख्यमंत्री नीतीश कुमार व अन्य
वर्चुअल बैठक में को संबोधित करते मुख्यमंत्री नीतीश कुमार व अन्य
सोशल मीडिया

उन्होंने कहा कि बाढ़ और सूखा राज्य की सबसे बड़ी समस्या है. देश का 17.02 प्रतिशत इलाका बाढ़ से प्रभावित हो रहा है, जो बिहार में है. उन्होंने कहा कि हमने इस बार वीरपुर से नेपाल तक के कार्यों को देखा. एक बैठक में प्रधानमंत्री को भी इसकी जानकारी दी कि किस तरह से सीमांचल एरिया में नेपाल से परेशानी होती है.

अपने संबाेधन में उन्होंने कहा कि दक्षिण बिहार के जिलों में और गंगा किनारे वाले करीब 13 शहरों में बाढ़ को लेकर सतर्कता बनाये रखने की जरूरत है. उन्होंने अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि मोकामा के रास्ते नालंदा, नवादा और गया तक गंगा नदी के पानी को ले जाने की योजना का वह खुद 29 अगस्त को जायजा लेने जायेंगे. जहां पानी का स्टोरेज किया जाना है, उन सभी जगहों पर गया तक चल रहे निर्माण कार्य को वह खुद निरीक्षण करेंगे.

उन्होंने एक बार फिर दोहराया कि अगली बार मौका मिले, तो हर खेत को पानी पहुंचाने का प्रबंध करेंगे. जिन लोगों को सिंचाई के लिए बिजली की जरूरत होगी, सबको कनेक्शन दिया जायेगा. मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले सिंचाई की योजनाओं का काम लटका रहता था. हम लोगों को मौका मिला तो पंद्रह सालों में चार लाख छह हजार हेक्टेयर अतिरिक्त इलाकों में सिंचाई का पानी पहुंचाने का काम किया गया.

पटना से औरंगाबाद तक पटना मुख्य नहर के बारुण से भुसौली तक 122 किमी सेवा पथ का चौड़ीकरण और पक्कीकरण किया गया है. इससे पटना से औरंगाबाद के बीच एनएच-98 पर चलनेवाले छोटे वाहनों के लिए यातायात के लिए एक अतिरिक्त सड़क भी उपलब्ध हो गया है. इस योजना से औरंगाबाद, अरवल और पटना जिले के लोगों को फायदा होगा.

मुख्यमंत्री ने कहा कि नेपाल में भारी वर्षा के कारण बिहार के 16 जिले बाढ़ से ग्रसित हैं. उन्होंने जल प्रबंधन पर जोर देते हुए कहा कि जल जीवन अभियान के मिशन मोड में हो रहे काम का अंग गंगा नदी के पानी को जो बरसात के दिनों में आता है और समुद्र में बह जाता है, इसे दूसरे जरूरतमंद जिलों तक पहुंचाना है. छोटी नदियां को जल सरंक्षण पर भी जल संसाधन विभाग को देखना चाहिए. जो भी योजना चल रही है, उसका हमेशा देखभाल करिये, ताकि ससमय योजना पूरा हो सके. बाढ़ के दौरान जो काम हो रहा है, यह खुशी की बात है. करीब 380 योजनाओं का काम पूरा कर लिया गया है.

इस दौरान राज्य में तीन स्थानों गया के सोहजन, मधुबनी के वेहट और परमानपुर सहित दरभंगा के कैथवार पर लोक संवाद का आयोजन गया. जिसमें इन तीनों जगहों पर मौजूद लोगों और अधिकारियों से मुख्यमंत्री ने विभिन्न योजनाओं के बारे में बात की.

इन योजनाओं की हुई शुरुआत

मुख्यमंत्री ने दरभंगा जिले के पिपराघाट से ढ़ेंगाहा तक नहर के पक्कीकरण और ढाढर अपसरण योजना का उद्घाटन किया. इसके तहत गया जिले के फतेहपुर, वजीरगंज, टनकुप्पा और मोहरा प्रखंड में 6900 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई की सुविधा उपलब्ध होगी. पश्चिमी कोसी नहर परियोजना अंतर्गत झंझारपुर मुख्य शाखा नहर का भी उद्घाटन किया गया. यह योजना विभाग द्वारा तय समय से पहले पूर्ण की गयी है. तटबंध पर सड़क निर्माण से बाढ़ से सुरक्षा मिलेगी और आवागमन सुगम होगा.

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