1. home Hindi News
  2. state
  3. bihar
  4. patna
  5. market decide price of sugarcane chhoa in bihar asj

बिहार में भी बाजार तय करेगा गन्ने से निकलने वाले छोआ का मूल्य, गन्ना किसानों होगा ये फायदा

बिहार में भी अब गन्ने से निकलने वाले छोआ का मूल्य बाजार तय करेगा. क्रेता-विक्रेता आपसी सहमति से मूल्य निर्धारण कर सकेंगे. इसको लेकर शुक्रवार को विधि विभाग द्वारा बिहार छोआ (नियंत्रण)(संशोधन) विधेयक, 2022 बिहार विधानसभा में सदस्यों को वितरित किया गया.

By Prabhat Khabar Digital Desk
Updated Date
गन्ना किसान
गन्ना किसान
फाइल

पटना. बिहार में भी अब गन्ने से निकलने वाले छोआ का मूल्य बाजार तय करेगा. क्रेता-विक्रेता आपसी सहमति से मूल्य निर्धारण कर सकेंगे. इसको लेकर शुक्रवार को विधि विभाग द्वारा बिहार छोआ (नियंत्रण)(संशोधन) विधेयक, 2022 बिहार विधानसभा में सदस्यों को वितरित किया गया. इसे सोमवार को विधानमंडल में रखा जा सकता है. इस विधेयक के जरिये बिहार छोआ (नियंत्रण) अधिनियम 1947 की धारा आठ में संशोधन किया गया है. बिहार में फिलहाल राज्य सरकार छोआ का मूल्य नियंत्रण करती है.

सिर्फ इथेनॉल निर्माण की अनुमति दी गयी है

मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन मंत्री सुनील कुमार ने बताया कि 2016 से बिहार में पूर्ण शराबबंदी लागू होने के बाद छोआ आधारित डिस्टलरीज (आसवानियों) को पेट्रोल में समिश्रण हेतु अपनी क्षमता का पूर्ण उपयोग करते हुए सिर्फ इथेनॉल निर्माण की अनुमति दी गयी है. मूल्य निर्धारण का प्रावधान होने की वजह से वर्ष 2021 में छोआ का मूल्य छोआ के ग्रेड के आधार पर पुर्नर्निधारित किया गया है. चीनी मिलों की मांग पर 2013 में छोआ का मूल्य पहले 187.50 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया, जिसे 2014 में पुर्नर्निधारित कर प्रति क्विंटल 287.50 रुपये कर दिया गया.

इथेनॉल को बढ़ावा देने को उठाया जा रहा कदम

दरअसल गन्ने की पेराई के बाद उससे निकलने वाले छोआ का उपयोग स्प्रिट, सैनिटाइजर, इथेनॉल आदि बनाने में किया जाता है. बिहार में राज्य सरकार नयी औद्योगिक नीति के तहत इथेनॉल उद्योग को बढ़ावा में जुटी है. माना जाता है कि मक्के या अनाज की तुलना में छोआ के माध्यम से बनने वाला इथेनॉल काफी गुणवत्ता युक्त होता है. इसलिए राज्य सरकार छोआ की कीमत बाजार से ही निर्धारित करना चाहती है ताकि चीनी मिलों के साथ गन्ना उत्पादकों को भी प्रोत्साहन मिले.

चीनी मिलों की बढ़ेगी आय, किसानों को जल्द भुगतान

वर्तमान में उत्तर प्रदेश सहित कई शहरों में शीरा का मूल्य बाजार निर्धारित करता है. डिस्टलरीज होने की वजह से वहां पर हजार रुपये क्विंटल तक छोअा की बिक्री होती है. लेकिन बिहार में मूल्य निर्धारित होने से चीनी मिलों को उसका फायदा नहीं मिल पाता. इथेनॉल प्लांट लगने पर बिहार में भी छोआ की डिमांड बढ़ेगी, जिससे चीनी मिलों को अधिक राशि मिलेगी. आर्थिक स्थिति बेहतर होने पर किसानों को गन्ने के मूल्य का भुगतान भी जल्द से जल्द हो सकेगा.

चीनी मिलों को इन उत्पादों से होती कमाई

चीनी मिलों को मुख्य रूप से चीनी और छोआ से सीधी कमाई होती है. छोआ गन्ने के बाय प्रोडक्ट है, जो चीनी निकालने के बाद बचता है. अनुमान के मुताबिक एक क्विंटल गन्ने से करीब 13 किलो चीनी बनती है, जबकि करीब 30 किलोग्राम खोई और साढ़े चार किलोग्राम शीरा बनता है.

Prabhat Khabar App: देश-दुनिया, बॉलीवुड न्यूज, बिजनेस अपडेट, क्रिकेट की ताजा खबरे पढे यहां. रोजाना की ब्रेकिंग न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए प्रभात खबर ऐप.

FOLLOW US ON SOCIAL MEDIA
Facebook
Twitter
Instagram
YOUTUBE

Prabhat Khabar App :

देश, दुनिया, बॉलीवुड न्यूज, बिजनेस अपडेट, टेक & ऑटो, क्रिकेट और राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

googleplayiosstore
Follow us on Social Media
  • Facebookicon
  • Twitter
  • Instgram
  • youtube

संबंधित खबरें

Share Via :
Published Date

अन्य खबरें