लैंड फॉर जॉब मामले में लालू-राबड़ी की याचिकाएं खारिज, कोर्ट ने कहा- ट्रायल में देरी का बहाना न चलेगा

Updated at : 19 Mar 2026 5:52 PM (IST)
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लालू-राबड़ी की फाइल फोटो

Land For Job Case: दिल्ली अदालत ने लैंड फॉर जॉब घोटाले में लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी की याचिकाएं खारिज कर दीं हैं. अदालत ने कहा कि यह ट्रायल में देरी करने का बहाना है और आरोपियों को न्यायिक कार्यवाही में शर्त लगाने की अनुमति नहीं है.

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Land For Job Case: लालू प्रसाद यादव और उनकी पत्नी राबड़ी देवी के खिलाफ लैंड फॉर जॉब घोटाला मामले में दिल्ली की अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया. अदालत ने लालू और राबड़ी द्वारा पेश की गई याचिकाओं को खारिज कर दिया. याचिकाओं में उन्होंने कथित रूप से ‘अनरिलायड’ दस्तावेज उपलब्ध कराने की मांग की थी. अदालत ने इसे ट्रायल में देरी करने का बहाना बताते हुए अस्वीकार कर दिया.

‘अनरिलायड’ दस्तावेजों की मांग को बताया अव्यवस्थित

विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने ने कहा कि आरोपियों का अनुरोध मुकदमे को उलझाने की कोशिश जैसा है. अदालत ने बताया कि इन दस्तावेजों को एक साथ उपलब्ध कराना न्यायिक प्रक्रिया को पूरी तरह अव्यवस्थित कर देगा. अदालत ने लालू के निजी सचिव आर.के. महाजन और रेलवे के पूर्व महाप्रबंधक महीप कपूर की याचिकाएं भी खारिज कर दीं.

मामला 2004-2009 के बीच की नियुक्तियों से जुड़ा

सीबीआई के अनुसार यह मामला लालू प्रसाद के रेल मंत्री रहने के दौरान मध्य प्रदेश के जबलपुर में रेलवे की चतुर्थ श्रेणी की नियुक्तियों से जुड़ा है. आरोप है कि नियुक्त किए गए लोगों ने बदले में लालू परिवार या सहयोगियों को जमीन के भूखंड दिए. इस मामले में लालू, राबड़ी, उनकी बेटियों और अन्य लोगों के खिलाफ 18 मई 2022 को एफआईआर दर्ज की गई थी.

अदालत ने दी सख्त चेतावनी

न्यायाधीश गोगने ने आदेश में कहा कि मुकदमे पर अदालत का नियंत्रण आरोपियों की जिरह की आड़ में नहीं छीना जा सकता. उन्होंने कहा कि आरोपी कार्यवाही को लंबा खींचने का गुप्त इरादा रख रहे हैं. अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि बचाव पक्ष पहले ही उन दस्तावेजों का निरीक्षण कर चुका है, जो साक्ष्यों के समूह का हिस्सा हैं, इसलिए किसी नए दस्तावेज को उपलब्ध कराने की मांग स्वीकार नहीं की जा सकती.

निष्पक्ष सुनवाई और शीघ्र न्याय का आश्वासन

अदालत ने कहा कि निष्पक्ष सुनवाई और कार्यवाही का शीघ्र समापन सुनिश्चित करने के लिए वैधानिक प्रावधानों के अनुसार साक्ष्य दर्ज करना आवश्यक है. आरोपियों को अब न्यायिक कार्यवाही जारी रखने पर कोई शर्त लगाने की अनुमति नहीं है. इस फैसले के बाद यह मामला न्यायिक प्रक्रिया में तेजी से आगे बढ़ने की संभावना जताई जा रही है.

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लेखक के बारे में

By Abhinandan Pandey

अभिनंदन पांडेय डिजिटल माध्यम में पिछले 2 सालों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. बंसल न्यूज (MP/CG) और दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अनुभव लेते हुए अब प्रभात खबर तक का मुकाम तय किए हैं. अभी डिजिटल बिहार टीम में काम कर रहे हैं. सामाजिक-राजनीतिक नब्ज को करीब से समझने का प्रयास करते हैं. देश-विदेश की घटनाओं, बिहार की राजनीति, और किस्से-कहानियों में विशेष रुचि रखते हैं. डिजिटल मीडिया के नए ट्रेंड्स, टूल्स और नैरेटिव स्टाइल्स के साथ प्रयोग करना पसंद है.

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