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Bihar News: शराब के काले कारोबार से थानेदार मालामाल, माफियाओं से सांठगांठ कर कमाए करोड़ों, किये गये निलंबित

वैशाली जिले के लालगंज के थानाध्यक चंदभूषण शुक्ला पर आर्थिक अपराध इकाई की टीम ने शिकंजा कसा. शराब माफियाओं को काले कारोबार में संरक्षण देकर अवैध संपत्ति बनाने के आरोपित के ठिकानों पर छापेमारी की गई.

By Prabhat Khabar Print Desk
Updated Date
वैशाली जिले के लालगंज के थानाध्यक चंदभूषण शुक्ला के ठिकानों पर छापेमारी
वैशाली जिले के लालगंज के थानाध्यक चंदभूषण शुक्ला के ठिकानों पर छापेमारी
प्रभात खबर

शराब के अवैध कारोबारियो को संरक्षण देकर करोडों की अवैध संपत्ति बनाने वाले वैशाली जिले के लालगंज के थानाध्यक चंदभूषण शुक्ला पर आर्थिक अपराध इकाई (इओयू) ने सख्त कार्रवाई की है. आय से अधिक संपत्ति (डीए) मामले मे थानाध्यक्ष के चार ठिकानो छपरा शहर स्थित आवास, रघुनाथपुर (सीवान) स्थित पैतृक मकान, हाजीपुर स्थित किराये का मकान और लालगंज (वैशाली) स्थित थानाध्यक का कार्यालय एवं आवास पर एक साथ छापेमारी की गयी.

थानेदार को अपनी 12 साल की नौकरी मे 64 लाख सैलरी मिली, लेकिन इन्होंने अवैध कमाई के बदौलत 89 लाख 46 हजार से ज्यादा की संपत्त बना ली. इनकी अचल संपत्त का यह सरकारी मूल्य है. अगर इनका बाजार मूल्य आंका जाये, तो यह कई गुणा ज्यादा होगा. उनके लालगंज स्थित आवास और रघुनाथपुर थाने के पंजवार ग्राम मे पैतृक आवास की तलाशी के दौरान 92 हजार कैश के अलावा करीब तीन लाख के जेवरात मिले हैं. इसके अलावा बड़ी संख्या मे निवेश तथा जमीन-जायदाद से संबंधित कागजात मिले है. तलाशी के दौरान नौ बैंक खातों से संबंधित डिटेल भी मिले हैं, जिसमे अधिकतर पत्नी के नाम से ही संचालित है.

इनमे करीब 11 लाख 79 हजार रुपये जमा है. अलग-अलग बीमा पॉलिसी, म्यूचुअल फंड तथा वाहन खरीदने मे 34 लाख 74 हजार रुपये खर्च किये गये है. इसके अलावा इन्होने अन्य चीजों में 13 लाख 74 हजार रुपये खर्च किया है. दो बैक लॉकर भी मिले है, लेकिन इन्हें अभी खोला नहीं गया है. खुलने के बाद ही यह स्पष्ट हो पायेगा कि इनमें क्या-क्या मौजूद हैं. इससे इनकी अवैध कमाई का आंकड़ा बढ़ सकता है.

अब तक की जांच मे यह बात सामने आयी है कि थानेदार शुक्ला ने अपने सेवाकाल के दौरान वेतन समेत अन्य वैध श्रोतों से 64 लाख रुपये कमाये है. परंतु इनके पास से अर्जित संपत्ति का मूल्य 89 लाख 46 हजार रुपये है. इनकी कमाई मे 34 लाख से ज्यादा विभिन्न जरुरी मदों में खर्च भी है. इस तरह इनकी बचत 29 लाख 93 हजार रुपये होनी चाहिए थी, लेकिन यह इससे कहीं ज्यादा है. इन पर 59 लाख 62 हजार का डीए केस बनता है, जो इनकी आय से 93 फीसदी अधिक है. वहीं थानेदार को निलंबित कर दिया गया है.

Published By: Thakur Shaktilochan

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