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बिहार में पुश्तैनी जमीन बेचने से पहले जान लें ये जरूरी नियम, तभी होगा म्यूटेशन और रजिस्ट्रेशन

Updated at : 26 Feb 2024 6:37 AM (IST)
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land registry

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बिहार में भूमि निबंधन नियमों में संशोधन के बाद जमीन की रजिस्ट्री को लेकर नये नियम लागू हो गये हैं. नये प्रावधान के तहत पुश्तैनी जमीन बेचने से पहले पारिवारिक बंटवारा कर जमीन का दाखिल खारिज करना होगा.

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बिहार में जमीन की खरीद-बिक्री के दौरान धोखाधड़ी रोकने के लिए भूमि निबंधन नियमावली में संशोधन किया गया है. जिसके बाद अब जमीन की रजिस्ट्री से पहले जमाबंदी का नया नियम लागू हो गया है. इस नए नियम से जमीन रजिस्ट्री में लोगों को दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है. जमीन की रजिस्ट्री कम होने लगी है. लोग अब अपने दस्तावेजों को दुरुस्त करने में लग गए हैं. अब लोगों को अपनी जमीन का निबंधन अंचल कार्यालयों से अपने नाम कराना होगा, तभी जमीन की बिक्री होगी.

बंटवारे के बाद ही बेच सकेंगे पुश्तैनी जमीन

वैसे तो कई सरकारी योजनाओं का लाभ वंशावली के आधार पर मिल जाया करता था. लेकिन, अब पुश्तैनी भूमि की रजिस्ट्री के लिए बंटवारा जरूरी होगा. लोग तभी जमीन बेच पायेंगे, जब उनके नाम जमाबंदी (दाखिल-खारिज) होगी. पुश्तैनी भूमि बेचने से पहले पारिवारिक बंटवारा करना होगा, जमीन की दाखिल-खारिज करानी पड़ेगी. नए प्रावधान में दाखिल-खारिज रसीद पर बेचने वाली जमीन का नया और पुराना खाता, खेसरा नंबर जरूरी है. दोनों खाता, खेसरा नहीं रहने पर निबंधन नहीं होगा. इसके वास्ते निबंधन विभाग ने अपने ऑनलाइन सिस्टम में बदलाव किया है.

जमीन खरीद-बिक्री के लिए चाहिए होगा दाखिल-खारिज का नंबर

जमीन की खरीद बिक्री के लिए जैसे ही सिस्टम में लोड किया जाएगा, कंप्यूटर सबसे पहले दाखिल-खारिज का नंबर मांगेगा. निबंधन दस्तावेज में अपनी संपत्ति की जमाबंदी संख्या, जमाबंदी जिल्द संख्या और जमाबंदी पृष्ठ संख्या की जानकारी देनी होगी.

इन नियमों को जानना जरूरी

  • तीन पीढ़ियों से जमाबंदी नहीं होने की स्थिति में पहले वंशावली बनाएं. फिर, इसी आधार पर पारिवारिक बंटवारा करें. पारिवारिक बंटवारा के बाद जमीन का दाखिल-खारिज कराएं.
  • रजिस्टर टू की स्थिति खासकर रजिस्ट्री के पुराने मामलों में सतत प्रक्रिया के तहत इसे पूरी तरह दुरुस्त करने की कवायद जारी है. नई रजिस्ट्री के मामले में स्थिति कमोबेश ठीक है. रजिस्ट्री होने के कुछ दिन बाद यह रजिस्टर दो में दर्ज हो जाता है.

फायदा क्या?

रजिस्ट्री में हुए बदलाव से जमीन विवाद में निश्चित रूप से कमी आएगी. पुश्तैनी जमीन के आपसी बंटवारे के बाद जिनके हिस्से में जो जमीन आएगी. उसे अपने नाम से म्यूटेशन कराना होगा, तभी वे जमीन बेचने के हकदार होंगे. इस नियम के लागू होने के बाद फर्जी रजिस्ट्री पर पूरी तरह रोक लग जायेगी.

नए नियम में भूमि निबंधन के दस्तावेजों की निबंधन के लिए जमाबंदी जरूरी है. जमाबंदी के लिए लोगों को पुश्तैनी संपत्ति में बंटवारा जरूरी है. यदि किसी बाप के इकलौते पुत्र है, तो उनके अपने नाम से पिता की जमीन को ट्रांसफर कराना होगा. उसके बाद ही जमाबंदी कायम होगा. जिन लोगों के नाम से अपनी जमीन नहीं है. उन्हें अपनी जमीन को अपने नाम से कराना होगा. इसका विकल्प है कि टाइटल सूट से बंटवारा, पंचनामा से बंटवारा व निबंधन कार्यालय से बंटवारा करा म्यूटेशन करा सकते है. इसके बाद जमीन की रजिस्ट्री आसानी से हो सकती है.

गिरीश चंद्र, जिला अवर निबंधन पदाधिकारी, रोहतास.

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Anand Shekhar

लेखक के बारे में

By Anand Shekhar

Dedicated digital media journalist with more than 2 years of experience in Bihar. Started journey of journalism from Prabhat Khabar and currently working as Content Writer.

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