Tej Pratap Yadav : आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव की एनडीए नेताओं के साथ मौजूदगी ने बिहार की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है. उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा के आवास पर आयोजित दही-चूड़ा भोज में तेज प्रताप ने शिरकत की. इसे लेकर बिहार की राजनीति में सवाल खड़े हो गए हैं. सवाल यह है कि क्या यह सिर्फ एक सामाजिक मुलाकात है! या फिर बदलते सियासी समीकरण का इशारा?
क्या हुआ था?
दरअसल, मकर संक्रांति के मौके पर डिप्टी सीएम विजय सिन्हा की ओर से दही-चूड़ा भोज का आयोजन किया गया था. इसी आयोजन के लिए तेज प्रताप यादव को भी निमंत्रण भेजा गया था. तेज प्रताप यादव ने इस निमंत्रण को स्वीकार किया और वह डिप्टी सीएम विजय कुमार सिन्हा के आवास पहुंच गए. उनकी मौजूदगी ने वहां मौजूद सभी लोगों का ध्यान खींचा. इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार सहित एनडीए में शामिल तमाम बड़े दलों के नेता मौजूद थे.

क्या संकेत देता है तेज प्रताप का पहुंचना?
बिहार की राजनीति को समझने वाले इस मुलाकात को बड़े सियासी उलटफेर और बदलाव के नजरिए से देख रहे हैं. कहा जा रहा है कि तेज प्रताप यादव का एनडीए नेताओं के साथ एक मंच पर दिखना सिर्फ संयोग नहीं है. इसके पीछे बड़े संकेत हैं. बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान तेज प्रताप यादव गोरखपुर सांसद रवि किशन के जरिए बीजेपी के नजदीक जाते नजर आए थे. अब निमंत्रण की राजनीति और दही-चूड़ा भोज के कार्यक्रम में शामिल होकर उन्होंने बिहार का सियासी पारा चढ़ा दिया है.

इन मौकों पर भी तेज प्रताप ने लिया अलग स्टैंड
आपको यह भी याद दिला दें कि इससे पहले बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के दौरान छठ पर राहुल गांधी के बयान को लेकर भी तेज प्रताप ने तीखी प्रतिक्रिया दी थी. तेज प्रताप के बयान में बीजेपी का समर्थन था. वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मां को अपशब्द कहने के मामले में भी उन्होंने कांग्रेस और अपने पिता की पार्टी आरजेडी के कार्यकर्ताओं को जेल भेजने की मांग की थी.
क्यों आरजेडी में अप्रासंगिक हो गए तेज प्रताप?
पाठकों को बता दें कि तेज प्रताप यादव अपने पिता की पार्टी और परिवार से लगभग 2019 से नाराज चल रहे हैं. उनकी नाराजगी लगातार बढ़ती गई. बिहार की राजनीति में चर्चा इस बात की है कि तेज प्रताप यादव पारिवारिक राजनीति के भी शिकार रहे हैं. इसका नतीजा यह हुआ कि उन्हें अपने पिता की पार्टी आरजेडी से छह साल के लिए निलंबित कर दिया गया. हालांकि पार्टी से निलंबन की वजह तेज प्रताप का एक सोशल मीडिया पोस्ट बताया गया. उन्होंने अपनी जेजेडी बनाकर चुनाव लड़ा और अपने भाई तेजस्वी यादव के लिए ही चुनौती खड़ी की. इस दौरान तेज प्रताप का रुख बीजेपी नेताओं के प्रति काफी सॉफ्ट नजर आया.
एनडीए नेताओं के बयान ने लगाया छौंका
दही-चूड़ा के कार्यक्रम के दौरान तेज प्रताप की मौजूदगी और एनडीए नेताओं के बयानों ने बिहार की सियासी खिचड़ी में छौंका लगा दिया है. जहां तेज प्रताप की मौजूदगी ने अटकलों का बाजार गर्म कर दिया, वहीं मंत्री दिलीप जायसवाल और कृषि मंत्री राम कृपाल यादव जैसे बिहार बीजेपी के बड़े नेताओं के बयान ने सियासी अटकलों को हवा दे दी है। वहीं, कभी लालू यादव के बेहद करीबी रहे राम कृपाल यादव ने तेज प्रताप यादव को बेटे जैसा बताते हुए उन्हें NDA में शामिल होने की खुली नसीहत दे डाली है. उन्होंने कहा कि उन्हें अब एनडीए में शामिल हो जाना चाहिए.
प्रभात खबर से बातचीत में भी बोले रामकृपाल
बताते चलें कि प्रभात खबर से बातचीत में राम कृपाल यादव पहले ही यह दावा कर चुके हैं कि आरजेडी अब अपने अंत की ओर है. पार्टी के कार्यकर्ता टूट रहे हैं और लालू यादव की पार्टी में अब भविष्य नहीं बचा. इसलिए उन्होंने अपने भतीजे तेज प्रताप यादव को एनडीए में आने की नसीहत दी है. उन्होंने कहा कि अगर तेज प्रताप एनडीए में आते हैं तो उनका स्वागत किया जाएगा. बिहार की राजनीतिक गलियारे में राम कृपाल यादव के इस बयान को महज व्यक्तिगत राय नहीं, बल्कि एक राजनीतिक संदेश के तौर पर देखा जा रहा है.
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