CM Nitish ने कैसे बनाया महिलाओं को अपना मजबूत वोट बेस, पंचायत से लेकर पुलिस तक, अब हर मोर्चे पर दिख रहा असर

Published by : Paritosh Shahi Updated At : 23 Jun 2025 5:05 AM

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Nitish Kumar

CM Nitish: बिहार में महिला सशक्तिकरण की दिशा में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पहल ने पिछले दो दशकों में गहरी छाप छोड़ी है, आरक्षण, जीविका समूह और रोजगार के अवसरों ने महिलाओं को न सिर्फ आर्थिक आजादी दी, बल्कि सामाजिक और राजनीतिक हिस्सेदारी भी बढ़ाई, इसका असर चुनावों में भी स्पष्ट रूप से दिखा है.

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CM Nitish, कृष्ण कुमार, पटना: चुनावों में पहले भी महिलाएं अलग अलग राजनीतिक दलों को अपनी पसंदगी के आधार पर वोट देती थीं. ताजा मामला बिहार के संदर्भ में है. यहां महिलाओं को नीतीश कुमार ने अपने एक सशक्त वोटर समूह के तौर पर खड़ा किया है. 2005 से 2025 की अवधि के दौरान महिलाओं के लिए किये गये काम की निरंतरता इसकी बानगी हैं.

इससे महिलाएं चहारदीवारी से बाहर निकलकर समाज और राज्य के विकास सीधे तौर पर अपना महत्वपूर्ण योगदान देने लगी हैं. उनको जो आर्थिक आजादी और उन्होंने जिस तरह नये परिवेश में कामकाज की जिम्मेदारी संभाली उससे परिवार, समाज और राज्य में महिलाओं के प्रति सोच और दृष्टिकोण बदल गया. हम कह सकते हैं कि समाज का कायाकल्प हो गया.

कब हुई शुरुआत

इसकी शुरुआत 24 नवंबर, 2005 को नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री बनने के बाद हुई. इसके बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने महिला सशक्तिकरण की दिशा में काम शुरू किया. पहली बार उन्होंने वर्ष 2006 में पंचायती राज संस्थाओं में महिलाओं के लिए 50 फीसदी आरक्षण की व्यवस्था शुरू की. इससे खासा असर हुआ और पंचायती राज संस्थाओं में महिलाओं की भागीदारी बढ़चढ़ कर दिखने लगी.

चहारदीवारी के अंदर रहने वाली महिलाएं बड़ी संख्या में मुखिया बनीं और गांव का कमान संभालकर महिलाओं की बेहतरी के लिए कई काम शुरू हुये. योजनाएं धरातल तक पहुंचती दिखीं.

नगर निकायों में महिलाओं के लिए 50 फीसदी आरक्षण

इसके साथ ही मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने महिला सशक्तिकरण की दिशा में अगला महत्वपूर्ण कदम उठाते हुये वर्ष 2007 में नगर निकायों में महिलाओं के लिए 50 प्रतिशत आरक्षण की व्यवस्था की शुरुआत कर दी. इसके भी बेहतर परिणाम निकलकर सामने आये. नगर निकायों में भी बड़ी संख्या में महिलाओं की भागीदारी बढ़ी. मुख्यमंत्री के इस निर्णय का बेहतर असर अब स्पष्ट तौर पर दिखने लगा है. महिलाएं नगर निकायों के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं.

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पुलिस और सरकारी नौकरी में 35 फीसदी आरक्षण

पंचायती राज संस्थाओं और नगर निकायों में आरक्षण के बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने महिलाओं को आर्थिक रूप से स्वतंत्रता देने के लिए पुलिस की नौकरी में वर्ष 2013 से 35 प्रतिशत आरक्षण की शुरुआत की. इसका असर यह हुआ है कि अब बिहार पुलिस में महिलाओं की संख्या 30 हजार से अधिक है. यह संख्या महिला पुलिस के मामले में देश में सबसे अधिक है.

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने वर्ष 2016 से महिलाओं को सरकारी नौकरियों में भी 35 प्रतिशत आरक्षण की शुरुआत कर दी. महिलाओं को पुलिस और सरकारी नौकरियों में आरक्षण का प्रावधान कर उन्हें आर्थिक स्वतंत्रता देना मुख्यमंत्री का महत्वपूर्ण विकासवादी कदम माना जाता है. महिलाएं अब आर्थिक रूप से सक्षम होकर घर, परिवार और समाज निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं.

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जीविका समूहों का गठन

24 नवंबर, 2005 को मुख्यमंत्री बनने के बाद नीतीश कुमार ने वर्ष 2006 में विश्व बैंक से कर्ज लेकर राज्य में स्वयं सहायता समूह का गठन किया और उसे ‘जीविका’ नाम दिया. इससे जुड़ने वाली महिलाओं को ‘जीविका दीदी’ कहा गया. अब स्वयं सहायता समूह की संख्या 10 लाख 63 हजार से भी अधिक हो गयी है जिसमें ‘जीविका दीदियों की संख्या एक करोड़ 35 लाख से ज्यादा हो गयी है.

शहरी क्षेत्रों में भी स्वयं सहायता समूह का गठन हो रहा है जिनकी संख्या 36 हजार हो गयी है जिसमें लगभग तीन लाख 80 हजार जीविका दीदियां हैं. स्वयं सहायता समूहों का गठन लगातार जारी है. इसमें बड़ा परिवर्तन यह हुआ है कि जीविका दीदियों को आसानी से ऋण उपलब्ध करवाने के लिए हाल ही में बिहार राज्य जीविका निधि साख सहकारी लिमिटेड बैंक (जीविका बैंक) की शुरुआत की गयी है. इससे स्वरोजगार के लिए 20 हजार रुपये तक का ऋण तीन दिन और 20 हजार से पांच लाख रुपये तक का ऋण दस दिनों में मिल सकेगा.

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने 21 जून 2025 को जीविका दीदियों को अब सिर्फ सात फीसदी ब्याज पर तीन लाख रुपये से ज्यादा के बैंक ऋण उपलब्ध करवाने की घोषणा की है. स्वयं सहायता समूहों को पहले तीन लाख रुपये से ज्यादा के बैंक ऋण पर 10 प्रतिशत ब्याज देना पड़ता था. ऐसे में जीविका दीदियों के कामकाज को गति मिलेगी.

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पुरुषों के मुकाबले महिलाओं के वोट प्रतिशत में बढ़ोतरी

विशेषज्ञों की मानें तो मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के महिला सशक्तिकरण के बाद महिलाओं का वोट प्रतिशत भी बढ़ा है. चुनाव आयोग के मुताबिक 2010 के विधानसभा चुनाव में 53 प्रतिशत पुरुषों ने मतदान किया था, जबकि महिलाओं के 54.5 प्रतिशत वोट पड़े थे. 2015 के विधानसभा चुनाव में 51.1 प्रतिशत पुरुषों जबकि 60.4 प्रतिशत महिलाओं ने मतदान किया था. इसके साथ ही 2020 के विधानसभा चुनाव में भी वोट डालने में महिलाएं आगे रहीं. इस चुनाव में पुरुषों के 54.6 प्रतिशत तो महिलाओं के 59.7 प्रतिशत वोट पड़े.

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Paritosh Shahi

लेखक के बारे में

By Paritosh Shahi

परितोष शाही पिछले 4 वर्षों से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की और वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल की बिहार टीम का हिस्सा हैं. राजनीति, सिनेमा और खेल, विशेषकर क्रिकेट में उनकी गहरी रुचि है. जटिल खबरों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाना और बदलते न्यूज माहौल में तेजी से काम करना उनकी विशेषता है. परितोष शाही ने पत्रकारिता की पढ़ाई बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) से की. पढ़ाई के दौरान ही पत्रकारिता की बारीकियों को समझना शुरू कर दिया था. खबरों को देखने, समझने और लोगों तक सही तरीके से पहुंचाने की सोच ने शुरुआत से ही इस क्षेत्र की ओर आकर्षित किया. पत्रकारिता में करियर की पहली बड़ी शुरुआत बिहार विधानसभा चुनाव 2020 के दौरान हुई, जब उन्होंने जन की बात के साथ इंटर्नशिप की. इस दौरान बिहार के 26 जिलों में जाकर सर्वे किया. यह अनुभव काफी खास रहा, क्योंकि यहां जमीनी स्तर पर राजनीति, जनता के मुद्दों और चुनावी माहौल को बहुत करीब से समझा. इसी अनुभव ने राजनीतिक समझ को और मजबूत बनाया. इसके बाद राजस्थान पत्रिका में 3 महीने की इंटर्नशिप की. यहां खबर लिखने की असली दुनिया को करीब से जाना. महज एक महीने के अंदर ही रियल टाइम न्यूज लिखने लगे. इस दौरान सीखा कि तेजी के साथ-साथ खबर की सटीकता कितनी जरूरी होती है. राजस्थान पत्रिका ने उनके अंदर एक मजबूत डिजिटल पत्रकार की नींव रखी. पत्रकारिता के सफर में आगे बढ़ते हुए पटना के जनता जंक्शन न्यूज पोर्टल में वीडियो प्रोड्यूसर के रूप में भी काम किया. यहां कैमरे के सामने बोलना, प्रेजेंटेशन देना और वीडियो कंटेंट की बारीकियां सीखीं. करीब 6 महीने के इस अनुभव ने कैमरा फ्रेंडली बनाया और ऑन-स्क्रीन प्रेजेंस को मजबूत किया. 1 अप्रैल 2023 को राजस्थान पत्रिका को प्रोफेशनल तौर पर ज्वाइन किया. यहां 17 महीने में कई बड़े चुनावी कवरेज में अहम भूमिका निभाई. लोकसभा चुनाव 2024 में नेशनल टीम के साथ जिम्मेदारी संभालने का मौका मिला. इसके अलावा मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के दौरान भी स्टेट टीम के साथ मिलकर काम किया. इस दौरान चुनावी रणनीति, राजनीतिक घटनाक्रम और बड़े मुद्दों पर काम करने का व्यापक अनुभव मिला. फिलहाल परितोष शाही प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम के साथ जुड़े हुए हैं. यहां बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान कई बड़ी खबरों को रियल टाइम में ब्रेक किया, ग्राउंड से जुड़े मुद्दों पर खबरें लिखीं और वीडियो भी बनाए. बिहार चुनाव के दौरान कई जिलों में गांव- गांव घूम कर लोगों की समस्या को जाना-समझा और उनके मुद्दे को जन प्रतिनिधियों तक पहुंचाया. उनकी कोशिश हमेशा यही रहती है कि पाठकों और दर्शकों तक सबसे पहले, सही और असरदार खबर पहुंचे. पत्रकारिता में लक्ष्य लगातार सीखते रहना, खुद को बेहतर बनाना और भरोसेमंद पत्रकार के रूप में अपनी पहचान मजबूत करना है.

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