Bihar Diwas: देश ही नहीं, विदेशों में भी बिहारियों का रूतबा, जानें राज्य का नाम दुनिया में कैसे किया रोशन
Published by : Prabhat Khabar News Desk Updated At : 22 Mar 2022 9:28 AM
Bihar Diwas 2022: बिहार का 110 वां स्थापना दिवस आज मनाया जा रहा है. हर साल आज के दिन को ‘बिहार दिवस’ के रूप में मनाया जाता है. इसका मुख्य मकसद अपने राज्य की विशेषताओं की दुनियाभर में ब्रांडिंग तथा बिहारी होने पर गर्व करना है.
आज 22 मार्च है. अर्थात अपने राज्य बिहार का 110 वां स्थापना दिवस. जिसे हर साल आज के दिन को ‘बिहार दिवस’ के रूप में मनाया जाता है. वर्ष 1912 में संयुक्त प्रांत से अलग होकर बिहार, राज्य के रूप में स्वतंत्र अस्तित्व में आया था. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने जब बिहार में सत्ता संभाली तो उन्होंने 22 मार्च को बिहार दिवस मनाने का एलान किया. इसका मुख्य मकसद अपने राज्य की विशेषताओं की दुनियाभर में ब्रांडिंग तथा बिहारी होने पर गर्व करना है. बिहार दिवस के मौके पर ऐसे बिहारियों के बारे में जानिए जिन्होंने देश-विदेश में अपने राज्य का मान बढ़ाया है.
कई देशों में व्यापार करने वाली कंपनी वेदांता ग्रुप के मालिक अनिल अग्रवाल बिहारी हैं. वेदांता रिसोर्सेज पीएलसी के संस्थापक अनिल किसी समय स्क्रैप डीलर हुआ करते थे. पटना के मिलर हाई स्कूल में पढ़ाई पूरी कर विवि में पढ़ने की बजाए उन्होंने अपने पिता के बिजनेस को प्राथमिकता दी और एल्यूमीनियम कंडक्टर बनाने में जुट गये. 1970 में उन्होंने कबाड़ की धातुओं की ट्रेडिंग शुरू की. 1980 के दशक में उन्होंने स्टरलाइट इंडस्ट्रीज की स्थापना कर डाली. स्टरलाइट इंडस्ट्रीज 1990 के दशक में कॉपर को रिफाइन करने वाली देश की पहली प्राइवेट कंपनी बनी. यही कंपनी आगे चलकर वेदांता रिसोर्सेज लिमिटेड व अब वेदांता ग्रुप बन गयी.
बिहार के डॉ आशीष झा ने अमेरिका में बिहार का परचम लहराया है. मधुबनी जिले के पुरसौलिया गांव के डॉ आशीष झा अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन के कोविड कोऑर्डिनेटर हैं. वे पांच अप्रैल को जिम्मेदारी संभालेंगे. बिहार के बेटे को अमेरिका में यह सम्मान मिलना बड़ी बात है. अमेरिका में प्रमुख लोक स्वास्थ्य विशेषज्ञों में से एक के रूप में उनके कार्यों की प्रशंसा के बाद उन्हें जिम्मेवारी सौंपी गयी है. उन्होंने कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी से आंतरिक चिकित्सा में प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद हार्वर्ड मेडिकल स्कूल से एमडी की उपाधि हासिल की. वे फिलहाल ब्राउन यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ के डीन हैं. कोरोना काल के दौरान उनका नाम चर्चा में था.
हममें से शायद गिने-चुने लोगों को ही इस बात की जानकारी होगी कि ‘सर्वश्रेष्ठ फिल्म’ की कैटेगरी में 82 वां ऑस्कर पुरस्कार जीतने वाली फिल्म ‘स्लमडॉग मिलिनेयर’ की संपादकीय टीम में ‘असेंबली एडिटर’ के तौर पर शामिल डॉ. अनुराधा सिंह बिहार के गया जिले की रहने वाली हैं. पिछले 14 वर्षों से फिल्म निर्माण और संपादन के क्षेत्र में अपनी अहम उपस्थिति दर्ज करवा रहीं डॉ अनुराधा प्रचार-प्रसार से अधिक पूरी निष्ठा और लगन के साथ अपना काम करने में यकीन रखती हैं. उनका मानना है कि यदि आपका काम गुणवत्तापूर्ण है, तो आज नहीं तो कल, लोग आपके बारे में जान ही जायेंगे.
लखीसराय (बड़हिया) के रहनेवाले भारतीय-अमेरिकी वैज्ञानिक डॉ कृष्ण पाल सिंह नासा में वैज्ञानिक रह चुके हैं. हॉलटेक इंटरनेशनल (न्यूक्लियर पावर प्लांट)के प्रेसिडेंट और सीइओ केपी सिंह बीआइटी सिंदरी के पूर्ववर्ती छात्र हैं. सिंह ने भारतीय होने के नाते कोरोना महामारी से निटने के लिए प्रधानमंत्री केयर फंड में 7 करोड़ 50 लाख रुपये का सहयोग दिया था. पीएम केयर्स फंड में दान करने के साथ ही अपने पैतृक गांव बड़हिया में 225 करोड़ की लागत से आधुनिक अस्पताल खोलने का भी प्रस्ताव उन्होंने सरकार को दिया है.डॉ पाल बड़हिया में 100 बेडों का आधुनिक अस्पताल खोलना चाहते हैं. इसके निर्माण पर वे लगभग 225 करोड़ रुपये खर्च करेंगे.
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मूल रूप से पटना की रहने वाली डॉ सेवंती कहती हैं, ‘मैं भले ही मुंबई और अमेरिका में रही हूं, लेकिन दिल से आज भी बिहारी हूं’. डॉ सेवंती लिमये देश ही नहीं, बल्कि दुनिया की मशहूर कैंसर रोग विशेषज्ञ हैं. अमेरिका के हार्वर्ड और कोलंबिया यूनिवर्सिटी में वर्षों सेवा देने और रिसर्च वर्क करने के बाद वे करीब छह वर्ष पहले भारत लौट आयीं. उन्होंने मुंबई के कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी हॉस्पिटल में करीब छह वर्ष बतौर कैंसर रोग विशेषज्ञ सेवा दी. इस हॉस्पिटल में इनके नेतृत्व में ही देश का पहला प्रिसिशन अंकोलॉजी क्लिनिक खुला. कैंसर के इलाज की इस नयी ब्रांच में हर कैंसर मरीज को स्पेशल मान कर बेहद बारीकी से आम मरीजों से थोड़ा अलग इलाज किया जाता है.
पटना के रहने वाले अभय सिंह रूस में कुर्सक क्षेत्र से ब्लामिदीर पुतिन की पार्टी के विधायक (डेप्यूतात) हैं. इनकी शिक्षा-दीक्षा पटना के लोयला हाई स्कूल से हुई. इसके बाद वे मेडिकल की पढ़ाई के लिए रूस चले गये. वहां उन्होंने अपनी पढ़ाई पूरी की और पटना में प्रैक्टिस करने के लिए वापस लौट आये. हालांकि एक बार फिर उन्होंने रूस के कुर्सक क्षेत्र में रहने का विचार बनाया और वहां दवाइयों की एक कंपनी खोल कर बिजनेस शुरू कर दिया. इसी दौरान वे ब्लामिदीर पुतिन के संपर्क में आये और पॉलिटिक्स ज्वाइन कर ली. इसके बाद वे कुर्सक क्षेत्र से ही डेप्यूतात चयनित हुए. अभय सिंह रूस में करीब 30 साल से समय से रह रहे हैं, लेकिन दिल से बिहारी हैं.
ओलिंपिक में लंबे अंतराल के बाद पदक जीतने वाली भारत की हॉकी टीम का क्रेज एक बार फिर से बढ़ रहा है. भारतीय टीम के खिलाड़ियों को तराशने में सारण के एकमा के हरेंद्र सिंह के योगदान को भुलाया नहीं जा सकता है. 2021 में हरेंद्र को अमेरिका हॉकी टीम का कोच बनाया गया. हालांकि, उससे पहले उन्होंने कई बड़े मौकों पर भारतीय पुरूष व महिला टीम को प्रशिक्षण देकर पदक की दहलीज तक पहुंचाया है. उनकी इस उपलब्धि पर वर्ष 2012 में उन्हें द्रोणाचार्य अवार्ड भी मिल चुका है. भारतीय पुरुष हॉकी टीम ने हरेंद्र के मार्गदर्शन में 2018 में ओमान के मस्कट में एशियाई चौंपियन्स ट्रॉफी में स्वर्ण पदक जीता था. उनके मार्गदर्शन में ही टीम ने भुवनेश्वर में 2018 पुरुष विश्व कप में पांचवां स्थान हासिल किया.
वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम की ओर से जनवरी में हुए अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन ‘दावोस एजेंडा 2022’ में दुनिया भर के जिन 15 लोगों को फोरम की ओर से दिये जाने वाले वार्षिक पुरस्कार से सम्मानित किया गया, उनमें पटना के संजय प्रधान भी शामिल थे. उन्हें यह पुरस्कार दुनिया के 78 देशों में गुड गर्वनेंस और भ्रष्टाचार के खिलाफ उनके किये गये बेहतरीन कार्यों के लिए दिया गया था. वे अभी अंतरराष्ट्रीय संगठन ओपन गवर्नमेंट पार्टनरशिप के सीइओ हैं. इस संगठन के संस्थापकों में पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा भी थे.
वह इससे पहले 2008 से 2016 तक वर्ल्ड बैंक के वाइस प्रेसिडेंट भी रह चुके हैं. वर्ल्ड बैंक के वाइस प्रेसिडेंट बन कर उन्होंने पूरी दुनिया में बिहार और भारत को गौरवांवित किया. संत माइकल स्कूल से आठवीं तक की पढ़ाई कर चुके डॉ संजय प्रधान ने हार्वर्ड यूनिवर्सिटी से पीएचडी तक की उच्च शिक्षा ली है. वे कहते हैं कि अभी वाशिंगटन में रहता हूं, लेकिन आज भी दिल पटना और बिहार में बसता है.
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