केंद्रीय बजट से बिहार की अपेक्षा: देश के संपूर्ण विकास के लिए बिहार जैसे पिछड़े राज्यों को बढ़ाना जरूरी

वित्त मंत्री सीतारमण एक फरवरी को केंद्रीय बजट पेश करेंगी. इस बार बजट को लेकर बिहार को काफी उम्मीदें हैं. बिहार सरकार लगातार केंद्र से विशेष पैकेज की भी मांग करती रही है, लेकिन अभी तक बस आश्वासन ही मिला है. अगर बिहार जैसे पिछड़े राज्यों को ही नहीं बढ़ाया गया, तो देश का संपूर्ण विकास संभव नहीं है.
डीएम दिवाकर: केंद्र सरकार के बजट से बिहार को कई उम्मीदें हैं. यहां के लोगों को अपेक्षा है कि इस बार बिहार के हित में बजट में काफी कुछ रहेगा. बिहार विकसित राज्यों में से एक है. बिहार सरकार लगातार केंद्र सरकार से विशेष पैकेज की भी मांग करता रहा है, लेकिन अभी तक केंद्र सरकार से बस आश्वासन मिला है. अगर बिहार जैसे पिछड़े राज्यों को ही नहीं बढ़ाया गया, तो देश का संपूर्ण विकास संभव नहीं है.
बिहार की मिट्टी उपजाऊ है और यहां के लोग मेहनती है. ऐसे में केंद्र सरकार बिहार सरकार के कृषि रोडमैप कृषि कैबिनेट को आगे बढ़ाने में मदद करें, तो बिहार में रोजगार बढ़ेगा और यहां से पलायन रुकेगा. यहां कृषि के क्षेत्र में पब्लिक इनवेंस्टमेंट जरूरी है, इसके लिए पानी एवं बिजली का प्रबंधन चाहिए. उद्योग धंधे को बढ़ाने के लिए सब्सिडी पर बिजली देना होगा. इसमें केंद्र की मदद चाहिए, ताकि यहां कृषि क्षेत्र का विकास हो सके.
बिहार बाढ़-सुखाड़ से हर वर्ष त्रस्त रहता है, इसमें केंद्र सरकार को मदद देने की आवश्यकता है, ताकि पानी का प्रबंधन हो सके. लोग बाढ़ और सुखाड़ से बच सकें. खेती अच्छी हो. बिहार के विकास में कृषि एक मुख्य रास्ता है.
शिक्षा के क्षेत्र में बिहार की वर्षों से डिमांड है कि केंद्रीय विवि का दर्जा यहां के पटना विश्वविद्यालय को मिले. अगर ऐसा होगा, तो केंद्र के सहयोग से यहां की उच्च शिक्षा बेहतर होगी. कॉलेजों में शिक्षक, लैब और मूलभूत सुविधाएं बढ़ेंगी. छात्रों को पढ़ने के लिए दूसरे राज्यों में नहीं जाना पड़ेगा. शिक्षा व्यवस्था में सुधार होगा क्योंकि बिहार के उच्च शिक्षा में शिक्षक, भवन एवं लैब की बड़ी कमी है. अगर केंद्रीय विश्विद्यालय का दर्जा बिहार के एक- दो विवि को मिलेगा, तो यहां केंद्र सरकार के सहयोग से यहां की पढ़ाई बेहतर होगी. यहां के छात्र और कामगार देश की तरक्की में अहम भूमिका में होंगे.
बिहार में मेडिकल और इंजीनियरिंग के लिए सुविधाएं और बढ़नी चाहिए. ऐसा केंद्र के सहयोग से संभव है. इस दिशा में भी अलग से बजट का प्रावधान करना चाहिए, ताकि यहां के छात्रों को बाहर पढ़ाई के लिए नहीं जाना पड़े. कोरोना काल के दौरान बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था के संबंध में कई कमियां निकल कर आयी हैं. यहां हेल्थ सेंटर बढ़ाने की जरूरत है और केंद्र से इस क्षेत्र में बजट बढ़ाने की उम्मीद है, ताकि बिहार की स्वास्थ्य सेवाएं और बेहतर हो सकें. केंद्र सरकार की विभिन्न आवास योजना का लाभ भी बिहार के गरीबों को मिलना चाहिए. इस दिशा में भी केंद्र सरकार से उम्मीदें है.
-लेखक, एएन सिन्हा सामाजिक अध्ययन संस्थान, पटना के पूर्व निदेशक हैं.
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By Prabhat Khabar News Desk
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