शराबबंदी के कारण कम हुई घरेलू हिंसा
Published by : Prabhat Khabar News Desk Updated At : 04 Jul 2024 12:39 AM
राज्य में शराबबंदी का सकारात्मक असर दिखायी दिया है. इसकी वजह से एक तरह जहां 21 लाख घरेलू हिंसा के मामलों को रोका गया है.
बिहार में अधिक वजन या मोटे पुरुषों की संख्या में 5.6 प्रतिशत की कमी आयी
संवाददाता,पटनाराज्य में शराबबंदी का सकारात्मक असर दिखायी दिया है. इसकी वजह से एक तरह जहां 21 लाख घरेलू हिंसा के मामलों को रोका गया है. वहीं, साथ -ही -साथ लोगों की सेहत सुधरने पर भी असर पड़ा है.शराबबंदी की वजह से राज्य के 18 लाख पुरुष अधिक वजनी या मोटा होने से बच गये हैं. यह खुलासा द लैंसेट रीजनल हेल्थ साउथइस्ट एशिया जर्नल में प्रकाशित एक रिसर्च हुआ है.दरअसल अंतरराष्ट्रीय खाद्य नीति अनुसंधान संस्थान,गरीबी, स्वास्थ्य और पोषण प्रभाग,अमेरिका सहित शोधकर्ताओं की एक टीम ने राष्ट्रीय और जिला स्तर के स्वास्थ्य व घरेलू सर्वे के आंकड़ों का विश्लेषण किया है. उनका कहना है कि शराब को लेकर बनायी गयीं कड़ी नीतियां बार-बार शराब पीने वालों और घरेलू हिंसा के पीड़ितों के लिए फायदेमंद साबित हो रही हैं.
अप्रैल 2016 से राज्य में पूर्ण शराबबंदीअप्रैल 2016 में राज्य की सरकार ने बिहार मद्यनिषेध एवं उत्पाद शुल्क अधिनियम लेकर आयी थी, जिसके जरिए पूरे राज्य में शराब बनाने, ट्रांसपोर्ट, बिक्री और खपत पर रोक लगा दी थी. रिसर्च के मुताबिक, बिहार में बैन से पहले पुरुषों की ओर से बार-बार शराब पीने की दर 9.7 प्रतिशत से बढ़कर 15 प्रतिशत हो गयी थी, जबकि पड़ोसी राज्यों में यह 7.2 प्रतिशत से बढ़कर 10.3 प्रतिशत हो गयी थी. बैन के बाद बिहार में शराब पीने वालों की संख्या में जबर्दस्त कमी आयी, वहीं,पड़ोसी राज्यों में यह बढ़कर 10.4 प्रतिशत हो गया.
अधिक वजन या मोटे पुरुषों की संख्या में 5.6 प्रतिशत अंक की कमी आयीरिसर्च में महिलाओं के खिलाफ शारीरिक हिंसा में कमी का उल्लेख किया गया है.वहीं,भावनात्मक हिंसा के मामले 4.6 प्रतिशत कम हुए हैं. वहीं, यौन हिंसा के मामले में 3.6 फीसदी की गिरावट आयी है. अनुमान है कि बार-बार शराब पीने वाले 24 लाख लोगों पर रोक लायी गयी है. रिसर्च करने वालों का कहना है कि इस तरह की फाइंडिंग के जरिए देश के अन्य राज्यों में शराब बैन को लेकर विचार करने और नीति बनाने में मदद मिल सकती है.पुरुषों के स्वास्थ्य पर शराबंदी के प्रभाव के पहलू पर, शोधकर्ताओं ने पड़ोसी राज्यों के रुझानों की तुलना में, अधिक वजन या मोटे पुरुषों की संख्या में 5.6 प्रतिशत अंक की कमी आयी है.
डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
लेखक के बारे में
By Prabhat Khabar News Desk
यह प्रभात खबर का न्यूज डेस्क है। इसमें बिहार-झारखंड-ओडिशा-दिल्ली समेत प्रभात खबर के विशाल ग्राउंड नेटवर्क के रिपोर्ट्स के जरिए भेजी खबरों का प्रकाशन होता है।
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए










