आपराधिक घटनाओं की तह खंगालने के लिए राज्य में बढ़ेगा डॉग स्कवॉयड

अपर पुलिस महानिदेशक अपराध अनुसंधान पारसनाथ ने बताया कि राज्य में 67 श्वानों के साथ घटनाओं की जांच की जा रही है.
अपर पुलिस महानिदेशक अपराध अनुसंधान पारसनाथ ने बताया कि राज्य में 67 श्वानों के साथ घटनाओं की जांच की जा रही है. इससे विस्फोटक सामग्री और शराब खोजी जा रही है. पटना स्थित पुलिस मुख्यालय बुधवार को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने बताया कि बिहार श्वान दस्ता में दो सौ पद स्वीकृत हैं. इसे देखते हुए 30 और श्वानों का क्रय आइटीए मोईनाबाद, हैदराबाद में प्रशिक्षण कराया जा रहा है. प्रशिक्षण के बाद 30 और श्वान श्वान दस्ता के साथ उपलब्ध होंगे. इसके अलावा पंजाब होमगार्ड केनाइन ट्रेनिंग एंड ब्रीडिंग इंस्टीट्यूट से 50 और श्वानों की क्रय प्रक्रिया की जा रही है. अगले साल 80 प्रशिक्षित श्वान राज्य में आ जायेंगे और कुल श्वान की संख्या बढ़कर 147 हो जायेगी.
उन्होंने कहा कि वर्तमान में कार्यरत 67 में एक्सपलोसिव डिटेक्टर 19, टैकर 21 और नारकोटिक्स श्वान छह हैं. इनमें 55 लेब्राडोर, गोल्डन रीट्रिवर दो, बेल्जिन मेलिनोईस छह और जर्मन शेफर्ड चार हैं.उन्होंने बताया कि राज्य के 13 क्षेत्रों में कुल 17 मोबाइल फॉरेंसिक वैन उपलब्ध हैं. इस वैन में फिंगर प्रिंट, फुट प्रिंट, नारकोटिक्स, रक्त तथा अन्य जैविक पदार्थ कलेक्ट करने के लिए किट और हाई रिजॉल्यूशन कैमरा तथा आर्टिफिशियल लाइट सोर्स उपलब्ध रहते हैं. जिला स्तर तक इस वैन को पहुंचाने के लिए 50 अन्य मोबाइल फॉरेंसिक वैन खरीदने की प्रक्रिया चल रही है. इसके अलावा 50 और वैन खरीदने की डिमांड केंद्र सरकार से की जा रही है. गृह विभाग के माध्यम से इसे केंद्र सरकार को भेजा जायेगा. तीन नये आपराधिक कानून के लागू होने के बाद जुलाई 2025 तक जिला पुलिस बल की ओर से 16486 मामलों में मोबाइल फॉरेंसिक वैन से जांच कराने की डिमांड आयी थी. इसमें 12000 से अधिक मामलों की मोबाइल फॉरेंसिक वैन से जांच की गयी.
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