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कोरोना से बैंक कर्मी की मौत होने पर मिलेंगे 4 लाख, मुख्यमंत्री राहत कोष के तहत दी जायेगी यह राशि : सुशील मोदी

By Prabhat khabar Digital
Updated Date
एसएलबीसी की 73वीं बैठक में आत्मनिर्भर भारत योजना के विभिन्न अव्ययों की हुई गहन समीक्षा
एसएलबीसी की 73वीं बैठक में आत्मनिर्भर भारत योजना के विभिन्न अव्ययों की हुई गहन समीक्षा
Prabhat Khabar

पटना : बिहार के उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने कहा है कि कोरोना से किसी बैंक कर्मी की मौत होने पर उनके परिजनों को भी चार लाख रुपये दिये जायेंगे. मुख्यमंत्री राहत कोष के तहत इन्हें भी यह राहत राशि उसी तरह से दी जायेगी, जिस तरह किसी अन्य व्यक्ति को मिलता है. उपमुख्यमंत्री राज्य स्तरीय बैंकर्स कमेटी (एसएलबीसी) की 73वीं बैठक को संबोधित कर रहे थे. इस बार भी कोरोना की वजह से एसएलबीसी की बैठक का आयोजन मुख्य सचिवालय स्थित अधिवेशन भवन में किया गया था.

डिप्टी सीएम ने बैंकों की गतिविधि, वित्तीय प्रबंधन और योजनाओं की मौजूदा स्थिति की समीक्षा की. साथ ही कोविड-19 के इस दौर में बैंकों के निरंतर मुस्तैदी से काम करने की सराहना भी की. बैंकों को निर्देश दिया कि वे आत्मनिर्भर बिहार और कृषि सेक्टर में लोन देने को ज्यादा बढ़ावा दें. पीएम स्वनिधि योजना के तहत स्ट्रीट वेंडर समेत अन्य छोटे उद्यमियों को खासतौर से लोन देने पर फोकस करने के लिए कहा. ताकि कोरोना के कारण लॉकडाउन से जिनकी रोजी-रोटी चली गयी है. उन्हें फिर से अपना स्वरोजगार स्थापित करने में मदद मिल सके.

सुशील मोदी ने बैंकों से कहा कि वे केंद्र सरकार की तरफ से घोषित 20 लाख करोड़ के पैकेज का अधिक लाभ बिहार के किसानों, उद्यमियों, छोटे कारोबारियों और अन्य जरूरतमंद लोगों तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभायें.

10 जिलों का एसीपी 10 प्रतिशत से भी कम

बिहार के बैंकों की एसीपी इस बार खराब रही है. इसमें बांका (6.29 प्रतिशत), अरवल (6.63 प्रतिशत), मधुबनी (7.68 प्रतिशत), सीवान (8.01 प्रतिशत) समेत अन्य शामिल हैं. डिप्टी सीएम ने इन जिलों को अगले 15 दिनों में अलग से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये समीक्षा करने का निर्देश दिया.

कृषि सेक्टर में अधिक लोन देने का निर्देश

उपमुख्यमंत्री ने बैंकों को काष्ठ आधारित उद्योगों और कृषि व्यवसाय से जुड़े सात प्रक्षेत्रों मखाना, फल-सब्जियां, शहद, मक्का और बीज समेत अन्य के प्रसंस्करण में लोन देने को कहा.

फुटपाथी दुकानदारों को ऋण देने की करें पहल

आत्मनिर्भर भारत योजना के अंतर्गत फुटपाथी दुकानदारों के बैंकों में आये 14 हजार 917 आवेदनों में तीन हजार 974 को ही स्वीकृत किया गया. इसमें महज 45 फुटपाथी दुकानदारों को ही 10-10 हजार रुपये का ऋण उपलब्ध कराया गया है. बिहार सरकार ने नगर विकास विभाग के माध्यम से एक लाख फुटपाथी दुकानदारों का आवेदन बैंकों को देने का निर्देश दिया है.

केसीसी, डेयरी, फिशरी समेत अन्य को अधिक ऋण दें

इस बार किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) के तहत ढाई करोड़ किसानों को दो लाख करोड़ का ऋण दिया जाना है. परंतु बिहार में अब तक 69 हजार 689 किसानों को ही सिर्फ 960 करोड़ का ऋण स्वीकृत किया गया है. डेयरी, फिशरी और पॉल्ट्री किसानों के 40 हजार 602 आवेदनों में सात हजार 217 को ही 63 करोड़ का ऋण स्वीकृत किया गया है. जबकि कॉम्फेड के जरिये बिहार के 12 लाख डेयरी किसानों का आवेदन बैंकों को भेजा जाना है.

किस्त देने की छूट के तहत नौ लाख लोगों को फायदा

एसएलबीसी की समीक्षा के दौरान यह बात सामने आयी कि केंद्र सरकार की तरफ से 31 अगस्त तक किस्त भुगतान में दी गयी छूट (मोरेटोरियम) से बिहार के नौ लाख से ज्यादा लोगों ने फायदा उठाया. खाताधारकों के (टर्म लोन और वर्किंग कैपिटल) कर्ज की 11 लाख करोड़ से ज्यादा की राशि इससे सहूलियत दी गयी है.

बैठक में कृषि मंत्री प्रेम कुमार, ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार, योजना एवं विकास मंत्री महेश्वर हजारी, सहकारिता मंत्री राणा रणधीर सिंह के अलावा वित्त के प्रधान सचिव एस. सिद्धार्थ समेत अन्य मौजूद थे. एसबीआई के सीजीएम महेश गोयल ने बैंकों की पूरी गतिविधि और पिछली बैठक में लिये गये निर्णय की जानकारी दी.

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