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नीलगाय के बंंध्याकरण और घेराबंदी पर केंद्र कर रहा विचार

Updated at : 03 Aug 2025 1:13 AM (IST)
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नीलगाय के बंंध्याकरण और घेराबंदी पर केंद्र कर रहा विचार

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद एवं बिहार पशु विज्ञान विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में पटना के बामेती सभागार में शनिवार को किसान संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया.

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आइसीएआर और पशु विज्ञान विवि के किसान संवाद में शरीक हुए केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान संवाददाता, पटना भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद एवं बिहार पशु विज्ञान विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में पटना के बामेती सभागार में शनिवार को किसान संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया. कार्यक्रम को संबोधित करते हुए श्री चौहान ने कहा कि कृषि को आगे बढ़ाना है तो प्रयोगशाला से बाहर निकलकर खेतों में जाना होगा. नीलगाय की समस्या पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि पहले हमें नीलगाय कहना छोड़ना होगा, क्योंकि गाय कहने मात्र से भाव बिल्कुल अलग हो जाता है. गाय गो है और हमारी माता है. उन्होंने कहा कि मंत्रालय में इस समस्या के समाधान के लिए सुझाव आये हैं, बंध्याकरण और घेराबंदी पर विचार किया जा रहा है. किसानों की समस्याओं के आधार पर होगा शोध केंद्रीय मंत्री ने कहा कि किसान आज खुद वैज्ञानिक की भूमिका निभा रहे हैं. पहले रिसर्च सिर्फ कागजों के लिए होती थी, अब किसानों की समस्याओं के आधार पर शोध होगी और उनके समाधान खेत तक पहुंचाये जायेंगे. अब वैज्ञानिकों की एक टीम एक विषय पर रिसर्च करेगी, ताकि परिणाम केंद्रित और उपयोगी शोध हो सकें. कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा, पशु एवं मत्स्य संसाधन मंत्री रेणु देवी भी उपस्थित रहे. कार्यक्रम की शुरुआत संजय गांधी गव्य प्रौद्योगिकी संस्थान परिसर में पौधारोपण से हुई. विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ इंद्रजीत सिंह ने अतिथियों का स्वागत पुष्पगुच्छ भेंट कर किया. निदेशक अटारी डॉ. अंजनी कुमार ने धन्यवाद ज्ञापन किया.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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RAKESH RANJAN

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