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BIHAR SIR: समस्तीपुर में 2.83 लाख मतदाता सूची से बाहर, 48 हजार वोटर ‘गायब’—सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर जारी हुई लिस्ट

Updated at : 20 Aug 2025 3:05 PM (IST)
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BIHAR SIR

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BIHAR SIR: बिहार चुनाव 2025 से पहले मतदाता सूची पर मचा बवाल—समस्तीपुर में हजारों मतदाताओं के नाम कटे, तो कहीं मृत और फर्जी वोटरों की लिस्ट बनी सुर्खी. सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद जारी हुई ड्राफ्ट लिस्ट ने सियासत को और गरमा दिया है.

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BIHAR SIR: बिहार विधानसभा चुनाव नजदीक आते ही मतदाता सूची से बड़े पैमाने पर नाम कटने का मामला सुर्खियों में है. विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के तहत पूरे बिहार में लगभग 65 लाख मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट सूची से हटाए गए, जिसमें समस्तीपुर जिले के 2.83 लाख मतदाता शामिल हैं. इनमें से 48 हजार मतदाता ‘गायब’, करीब 78 हजार मृत और 1.25 लाख स्थानांतरित पाए गए हैं.

78 हजार मृत, 48 हजार ‘लापता’

जिला निर्वाचन आयोग के अनुसार समस्तीपुर में कुल 31.45 लाख मतदाता सूची में शामिल थे. पुनरीक्षण के बाद 2.83 लाख 922 मतदाताओं का नाम हटाया गया, क्योंकि वे न तो पुनरीक्षण में शामिल हो पाए और न ही दस्तावेज जमा कर पाए.

जारी आंकड़ों में यह साफ हुआ है कि 78 हजार मतदाता मृत पाए गए. वहीं, 1.25 लाख मतदाता स्थायी रूप से अन्यत्र स्थानांतरित हो गए और करीब 45–48 हजार मतदाता अपने पते पर नहीं मिले.

अधिकारियों का बयान

रोशन कुशवाहा, जिला निर्वाचन पदाधिकारी सह डीएम- ऐसे सभी निर्वाचक जो प्रारूप सूचि में शामिल नहीं हैं, अपने ईपिक संख्या के माध्यम से इस सूचि में कारण सहित अपनी सम्बन्धित सूचना एवं जानकारी प्राप्त कर सकते है.

सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद कार्रवाई

विपक्ष द्वारा उठाए गए सवालों और बड़े पैमाने पर नाम कटने की शिकायतों के बाद सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को ड्राफ्ट सूची सार्वजनिक करने का आदेश दिया. इसके बाद आयोग ने राज्यभर का डेटा जारी किया.

राज्यभर में हटाए गए 65 लाख नामों में से लगभग 22 लाख मृत, 36 लाख स्थानांतरित और करीब 7 लाख फर्जी पाए गए. सबसे ज्यादा नाम पटना से (3.95 लाख) हटाए गए हैं.

समस्तीपुर समेत पूरे बिहार में लाखों मतदाताओं का नाम सूची से बाहर होने पर चुनावी सियासत तेज हो गई है. अब विपक्ष इसे “वोट चोरी की साजिश” बता रहा है, जबकि आयोग इसे “पारदर्शिता और सफाई की प्रक्रिया” मान रहा है. असली सवाल यह है कि चुनावी मौसम में इतने बड़े पैमाने पर मतदाता सूची से नाम कटना—किसके पक्ष और किसके खिलाफ जाएगा?

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Pratyush Prashant

लेखक के बारे में

By Pratyush Prashant

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.

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