Bihar News: पटना में पहली बार दिखा दुर्लभ मूंछों वाला तोता, NIT कैंपस में कैद हुआ अविश्वसनीय नजारा

Rare mustachioed parrot spotted for the first time in Patna
Bihar News: क्या आप जानते हैं कि एक पक्षी ऐसा भी है जिसके चेहरे पर काली 'मूंछें' होती हैं? बिहार के पटना में पहली बार एक ऐसे ही दुर्लभ रेड-ब्रेस्टेड पैराकीट को देखा गया है, जिसने राज्य के पक्षी इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ दिया है.
Bihar News: बिहार में इस सर्दी प्रवासी पक्षियों का आगमन एक दुर्लभ और रोमांचकारी दृश्य लेकर आया है. पहली बार राज्य में रेड-ब्रेस्टेड पैराकीट, जिसे आमतौर पर ‘मूंछों वाला पैराकीट’ कहा जाता है, देखा गया है.
NIT पटना परिसर में हुई बर्ड वॉचिंग के दौरान शोधार्थियों की टीम निशांत रंजन, विक्रम पाटील, डॉ. अनुराग सहाय, दिग्विजय सिंह और मोहम्मद शाहबाज ने इस प्रजाति के दो नर, दो मादा और एक घोंसले को कैमरे में कैद किया. पक्षी विशेषज्ञों के मुताबिक यह दृश्य बिहार में पहले कभी दर्ज नहीं किया गया था.
कैसे दिखा मूंछों वाला पैराकीट?
इस प्रजाति की पहचान उसके चेहरे पर मौजूद काली मूंछनुमा रेखा, ग्रे-ब्लू रंग के सिर और छाती पर मौजूद सैल्मन पिंक शेड से की जाती है. दक्षिण-पूर्वी एशिया में पाई जाने वाली यह प्रजाति सामान्य परिस्थितियों में बिहार जैसे भूभाग में नहीं देखी जाती. यही वजह है कि इसका पटना में दिखना वैज्ञानिक समुदाय के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
गौरैया मैन ऑफ बिहार के नाम से प्रसिद्ध संजय कुमार ने बताया कि रेड-ब्रेस्टेड पैराकीट का यहां दिखना राज्य के पक्षी-जीव विविधता को नई दिशा देता है. यह न सिर्फ स्थानीय पर्यावरण की अनुकूलता दर्शाता है, बल्कि प्रवासी पक्षियों के नए मार्ग और व्यवहार में बदलाव का संकेत भी माना जा सकता है.
यह दृश्य आश्चर्यजनक और ठोस संकेत
इंडियन बर्ड कंजर्वेशन नेटवर्क के स्टेट कोऑर्डिनेटर और बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसाइटी के सदस्य अरविंद मिश्रा ने इसके पटना में दर्ज होने पर आश्चर्य जताया. उन्होंने बताया कि पिछले 20 वर्षों में इस पक्षी के मूल आवास क्षेत्र में लगभग 16% जंगल खत्म हुए हैं, जिसका सीधा असर इसकी आबादी और अवैध व्यापार पर पड़ा है. ऐसे में बिहार में इसका पहुंचना प्रवास के नए पैटर्न की ओर इशारा करता है.
वाइल्डलाइफ ट्रस्ट ऑफ इंडिया के निदेशक डॉ. समीर सिन्हा ने बताया कि दुनिया में आठ और भारत में तीन प्रमुख फ्लाई-वे हैं, जिनमें से सेंट्रल एशियन फ्लाई-वे बिहार से होकर गुजरता है. यही कारण है कि हर साल अनेक दुर्लभ प्रजातियां राज्य का रुख करती हैं और प्राकृतिक आवास की तलाश में यहां ठहराव लेती हैं.
क्यों है यह रिकॉर्ड खास?
ई-बर्ड के रिकॉर्ड के अनुसार यह पैराकीट पहले उत्तर और पूर्वी बिहार में कभी-कभी दिखा है, लेकिन राजधानी पटना में इसका दस्तावेजीकरण पहली बार हुआ है. इससे यह संकेत मिलता है कि शहर के कुछ इलाकों खासकर एनआईटी परिसर जैसा हरा-भरा क्षेत्र अब दुर्लभ प्रजातियों के लिए सुरक्षित ठिकानों के रूप में उभर रहे हैं.
यह खोज न सिर्फ बिहार की जैव-विविधता को नई पहचान देती है, बल्कि संरक्षण के प्रयासों को भी मजबूती प्रदान करती है. विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे दुर्लभ पक्षियों का आगमन पर्यावरणीय स्वास्थ्य का सकारात्मक संकेत है और यह आने वाले समय में बर्ड वॉचिंग गतिविधियों को नई ऊंचाई दे सकता है.
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लेखक के बारे में
By Pratyush Prashant
महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.
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