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बिहार के शराबबंदी कानून में होगा बदलाव, विधि विभाग की मिली मंजूरी, जानें क्या है नीतीश सरकार की तैयारी

By Prabhat Khabar Print Desk
Updated Date
प्रतीकात्मक तस्वीर
प्रतीकात्मक तस्वीर
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अनिकेत त्रिवेदी , पटना: बिहार में शराबबंदी से संबंधित तलाशी, जब्ती और नीलामी की प्रक्रिया और भी सख्त होंगे. सरकार मौजूदा कानूनों एवं प्रावधानों में बदलाव कर इससे संबंधित प्रक्रिया को और भी कड़ा बनाने जा रही है. बिहार मद्य निषेध एवं उत्पाद संशोधन अधिनियम 2018 में संशोधन कर इसे बिहार मद्य निषेध एवं उत्पाद संशोधन अधिनियम 2021 में बदलाव किया जायेगा.

संशोधन की तैयारी अंतिम दौर में

संशोधन की तैयारी अंतिम दौर में है. कानूनों के बदलाव में बाद शराबबंदी कानून को तोड़ने वालों की तलाशी, जब्ती, गिरफ्तारी, भवनों की सीलबंदी, जमानत और उत्पाद वस्तुओं के परिवहन आदि से संबंधित विस्तृत प्रक्रिया का प्रावधान किया गया है. विभाग की मानें , तो इस संशोधन को लेकर विधि विभाग से मंजूरी मिल चुकी है.

अधिक सख्ती का प्रावधान किया जायेगा

नये कानून में कई नियमों को जोड़ कर शराबबंदी कानून तोड़ने वालों के खिलाफ और सख्ती का प्रावधान किया जाना है. अब इस संशोधन प्रस्ताव को कैबिनेट में भेजना है. वहां से स्वीकृति के बाद इस संशोधन प्रस्ताव को राज्य में लागू कर दिया जायेगा.

अब तक तीन करोड़ का जुर्माना

राज्य में लागू शराबबंदी कानून के बाद अब शराब पीने और बेचने वालों को मिला कर कुल तीन करोड़ के लगभग का जुर्माना लगाया जा चुका है. इसमें शराब पीने वालों से एक करोड़ 33 लाख की जुर्माना वसूली हुई है, जबकि शराब बेचने वाले से एक करोड़ 51 लाख चार हजार रुपये के जुर्माना की वसूली की जा चुकी है. वहीं, शराब पीने वाले 195 लोगों को और शराब बेचने वाले 131 लोगों को सजा दी जा चुकी है.

अपर मुख्य सचिव ने शुरू की है जिलों की समीक्षा

शराबबंदी कानून को राज्य में और कड़ाई से लागू कराने के लिए मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन विभाग के अपर मुख्य सचिव, आइजी मद्य निषेध और उत्पाद आयुक्त ने संयुक्त रूप से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जिलों में डीएम, एसपी, अधीक्षक मद्य निषेध एवं विशेष लोक अभियोजन के साथ समीक्षा बैठक शुरू की है. इसमें सभी जिलों के अधिहरणवाद के लंबित मामले, शराबबंदी में जब्ती में बढ़ोतरी लाने, अवैध शराब मामले में सजा दिलाने के प्रयास में तेजी लाने और सतत जीविकोपार्जन योजना से लाभान्वित अनुसूचित जाति एवं जनजाति परिवारों की संख्या में वृद्धि करने के निर्देश दिये जा रहे हैं. वर्तमान में मुजफ्फरपुर और नवादा जिले की समीक्षा की गयी है.

Posted By :Thakur Shaktilochan

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