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बिहार जमीन सर्वे में अधिकारी कर रहे खेला, पहले तीन दिन में मिल जाता था खतियान, अब चक्कर काट रहे लोग

Updated at : 15 Sep 2024 11:50 AM (IST)
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bihar land survey

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Bihar Land Survey: जमीन सर्वे के लिए स्व-घोषणा और वंशावली जमा करने का काम शुरू हो गया है. लेकिन, रैयतों के बीच एक बड़ी समस्या आ रही है. जिला अभिलेखागार से खतियान की प्रति समय से नहीं मिल पा रही है. बता दें पहले तीन दिन में मिल जाता था अब चक्कर लगाना पड़ रहा है.

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Bihar Land Survey: जमीन सर्वे के लिए स्व-घोषणा और वंशावली जमा करने का काम शुरू हो गया है. लेकिन, रैयतों के बीच एक बड़ी समस्या आ रही है. जिला अभिलेखागार से खतियान की प्रति समय से नहीं मिल पा रही है. बता दें कि पहले जो खतियान अधिकतम तीन दिनों में मिल जा रहा था, वह अब 20 दिन में भी नहीं मिल पा रहा है. जिससे जरूरतमंद काफी परेशान हैं.

जानकारी के मुताबिक रैयत जिला अभिलेखागार कार्यालय का चक्कर लगाने को मजबूर हैं. सर्वे कर्मी गावों में घूमकर रैयतों को अपने कागजात को जमा कराने के लिए अपील कर रहे हैं. लेकिन खतियान नहीं मिलने से रैयतों को कागजात जमा करने में काफी परेशानी हो रही है.

मंत्री डिजिटलाइज्ड कॉपी लेने की कर रहे अपील

सिविल कोर्ट गोपालगंज के एडवोकेट ओम प्रकाश मणि त्रिपाठी, नरसिंह प्रसाद वर्मा, आदि का कहना है कि प्रदेश के राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री दिलीप जायसवाल बार-बार खतियान तथा अन्य दस्तावेजों की डिजिटाइज्ड कॉपी उपलब्ध रहने की बात लोगों से कह रहे है. साथ हीं ऑनलाइन माध्यम से पेपर निकालने की अपील भी कर रहे हैं. लेकिन, जिला अभिलेखागार कार्यालय से डिजिटलाइज्ड कॉपी नहीं मिल पा रही है. जिससे लोगों को ऑफलाइन मोड में ही खतियान की कॉपी निकालने को चक्कर लगाना पड़ रहा है.

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2022 में प्रक्रिया हुई शुरू, लेकिन अभी तक व्यवस्था लागू नहीं

बिहार सरकार के राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग द्वारा 31 मार्च 2022 को हीं भेजे पत्र के माध्यम से ऑनलाइन नागरिक सेवाओं के डिजिटाइज्ड राजस्व अभिलेखों की डिजिटली हस्ताक्षरित प्रति उपलब्ध कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई थी. इसके लिए निदेशालय द्वारा 2 मई 2022 को भेजे गए पत्र के माध्यम से नागरिकों द्वारा ऑनलाइन भू अभिलेखों को प्राप्त करने के लिए प्राप्त आवेदनों के आधार पर ऑनलाइन विधि से ही डिजिटली साइन करने के लिए पदाधिकारियों को प्राधिकृत कर दिया था.

लेकिन, इसके बाद भी अभी तक जिलों में डिजिटलाइज्ड कॉपी मिलने की व्यवस्था लागू नहीं की गई है. जिससे लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है.

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Abhinandan Pandey

लेखक के बारे में

By Abhinandan Pandey

भोपाल से शुरू हुई पत्रकारिता की यात्रा ने बंसल न्यूज (MP/CG) और दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अनुभव लेते हुए अब प्रभात खबर डिजिटल तक का मुकाम तय किया है. वर्तमान में पटना में कार्यरत हूं और बिहार की सामाजिक-राजनीतिक नब्ज को करीब से समझने का प्रयास कर रहा हूं. गौतम बुद्ध, चाणक्य और आर्यभट की धरती से होने का गर्व है. देश-विदेश की घटनाओं, बिहार की राजनीति, और किस्से-कहानियों में विशेष रुचि रखता हूं. डिजिटल मीडिया के नए ट्रेंड्स, टूल्स और नैरेटिव स्टाइल्स के साथ प्रयोग करना पसंद है.

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