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Bihar Elections 2025: बिहार चुनाव में 90 हजार बूथों पर आंगनबाड़ी सेविकाएं करेंगी घूंघटवाली और बुर्केवाली महिला वोटरों की पहचान

Updated at : 10 Oct 2025 9:54 AM (IST)
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Anganwadi workers will now identify women wearing veils and burqas at every booth.

Anganwadi workers will now identify women wearing veils and burqas at every booth.

Bihar Elections 2025: बिहार में विधानसभा चुनाव का बिगुल बज चुका है. सुरक्षा के कड़े इंतजाम के बीच, 90 हजार बूथों पर महिला वोटरों की पहचान के लिए आंगनबाड़ी सेविकाओं को तैनात किया गया है, ताकि पर्दा और घूंघट में आए वोटरों को बिना परेशानी मतदान करने का मौका मिल सके.

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Bihar Elections 2025: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के लिए सुरक्षा और मतदान व्यवस्था राज्य में शांतिपूर्ण चुनाव संपन्न कराने के लिए केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सीएपीएफ) की एक दर्जन से अधिक बटालियन तैनात की गई हैं. गृह मंत्रालय ने राज्य में कुल 214 बटालियन भेजने की मंजूरी दी है, जिसमें लगभग 1.8 लाख जवान चुनाव सुरक्षा में सक्रिय रहेंगे. इसके अलावा, चुनाव आयोग ने 38 पुलिस पर्यवेक्षक नियुक्त किए हैं, जो चुनाव प्रक्रिया की निगरानी करेंगे.

महिला वोटरों की पहचान, चुनौती और समाधान

ग्रामीण इलाकों में महिला वोटरों की पहचान करना हमेशा चुनौतीपूर्ण रहा है. कई महिलाएं घूंघट या पर्दा में मतदान करने आती हैं. इस बार इस समस्या का समाधान आंगनबाड़ी सेविकाओं को बूथों पर तैनात करके किया जाएगा. 90 हजार बूथों पर सेविकाएं सुनिश्चित करेंगी कि पर्दा और घूंघट में आए महिला वोटरों की सही पहचान हो. इसमें हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदाय की महिलाएं शामिल हैं.

सेविकाओं को जिला स्तर पर विशेष प्रशिक्षण दिया गया है. प्रशिक्षण में उन्हें बताया गया कि महिला वोटरों से कैसे संपर्क करना है, किन पहचान पत्रों का मिलान करना है और व्यवहार ऐसा रखना है कि किसी को असुविधा न हो. यह व्यवस्था यह सुनिश्चित करेगी कि महिला वोटरों को अपने मतदान के अधिकार में किसी प्रकार की बाधा न आए.

चुनाव में अक्सर घूंघटवाली और पर्दानशीं महिलाएं वोट करने पहुंचती हैं, जिससे पहचान में मुश्किलें पैदा होती हैं. कई बार इस वजह से विवाद भी उत्पन्न हो जाते हैं. इस बार आंगनबाड़ी सेविकाओं की तैनाती से यह चुनौती काफी हद तक कम हो जाएगी. सेविकाओं को उनके कार्य क्षेत्र के पास ही बूथों पर तैनात किया जाएगा ताकि उन्हें किसी भी तरह की असुविधा न हो और महिला वोटरों की पहचान सुचारु रूप से हो सके.

बिहार से शुरू हुई मांग यह मांग

मामला तब सुर्खियों में आया जब बिहार बीजेपी अध्यक्ष दिलीप जायसवाल ने चुनाव आयोग से यह मांग की कि बुर्का पहनकर वोट डालने वाली महिलाओं की पहचान उनके वोटर कार्ड (EPIC) से की जाए. जायसवाल ने इसे लोकतंत्र की सुरक्षा से जोड़ते हुए कहा कि फर्जी वोटिंग लोकतंत्र और कानून दोनों के खिलाफ है.

उन्होंने स्पष्ट किया कि वोट डालना हर नागरिक का मूल अधिकार है, लेकिन अगर कोई फर्जी पहचान बनाकर मतदान करता है, तो यह प्रक्रिया के खिलाफ है. उनका कहना था कि सही पहचान सुनिश्चित करने से चुनाव निष्पक्ष और पारदर्शी रहेंगे.

इस प्रस्ताव का राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) ने विरोध किया. आरजेडी का कहना था कि यह मामला धार्मिक भावना से जुड़ा हुआ है और इससे महिलाओं को असुविधा हो सकती है.

चुनाव आयोग का संतुलित रुख

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने संतुलित रुख अपनाया. उन्होंने कहा कि “हर काम की एक प्रक्रिया होती है. बुर्का पहनने वाली महिलाओं की पहचान के लिए आंगनवाड़ी कार्यकर्ता हर बूथ पर मौजूद रहेंगी. अगर जरूरत पड़ी, तो पहचान की जांच की जाएगी.”

आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि यह कदम किसी धर्म या समुदाय के खिलाफ नहीं है. इसका उद्देश्य केवल सभी मतदाताओं की समान जांच सुनिश्चित करना और फर्जी मतदान को रोकना है. किसी के साथ भेदभाव नहीं होगा, लेकिन पहचान छुपाने या फर्जी मतदान करने की कोशिश करने वालों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी.

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Pratyush Prashant

लेखक के बारे में

By Pratyush Prashant

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.

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