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रील बनाने वाले सरकारी कर्मचारी हो जाएं सावधान, बिहार सरकार करेगी अब बड़ी कार्रवाई

Updated at : 29 Jan 2026 7:20 PM (IST)
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nitish government on social media

नीतीश कुमार की फाइल फोटो

Bihar Cabinet: बिहार सरकार ने सरकारी कर्मचारियों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर सख्ती बढ़ा दी है. कैबिनेट के फैसले के तहत अब विवादित पोस्ट, निजी टिप्पणी और नियमों के उल्लंघन पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी. नया अकाउंट बनाने से पहले पदाधिकारियों से अनुमति लेनी होगी.

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Bihar Cabinet: बिहार सरकार ने सरकारी सेवकों के सोशल मीडिया उपयोग पर सख्त फैसला लिया है. कैबिनेट की बैठक में यह तय किया गया कि फेसबुक, ट्विटर (एक्स), टेलीग्राम और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का गलत इस्तेमाल करने वाले सरकारी कर्मचारियों और पदाधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी. सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक टिप्पणी करना, विवादित पोस्ट डालना या सरकारी नीतियों पर व्यक्तिगत राय देना गंभीर कदाचार माना जाएगा.

अकाउंट बनाने से पहले क्या करना होगा?

नए प्रावधानों के तहत अब कोई भी सरकारी सेवक सोशल मीडिया पर अकाउंट बनाने से पहले अपने पदाधिकारी से अनुमति लेगा. गुमनाम या फर्जी नाम से अकाउंट चलाने पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है. इसके साथ ही सरकार ने यह भी साफ किया है कि कोई भी कर्मचारी सोशल मीडिया के जरिए किसी तरह का व्यक्तिगत लाभ नहीं उठा सकेगा.

सरकारी कार्यों से जुड़े कंटेंट को लेकर भी दिशा-निर्देश जारी

सरकारी कार्यों से जुड़े कंटेंट को लेकर भी सरकार ने सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं. कार्यस्थल पर वीडियो बनाना, लाइव स्ट्रीमिंग करना या किसी भी सरकारी गतिविधि को सोशल मीडिया पर शेयर करना पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया गया है. किसी भी तरह की आधिकारिक प्रक्रिया, फाइल, दस्तावेज या अंदरूनी चर्चा को सार्वजनिक मंच पर लाना नियमों का उल्लंघन माना जाएगा.

सरकार ने यह भी निर्देश दिया है कि सरकारी सेवक सोशल मीडिया पर सरकारी नीतियों, निर्णयों या सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के आदेशों पर अपनी निजी राय व्यक्त नहीं करेंगे. वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल करना या विरोधात्मक पोस्ट करना भी दंडनीय होगा.

सोशल मीडिया के जरिए ट्रोलिंग, भड़काऊ, आपत्तिजनक या समाज को बांटने वाली पोस्ट करने पर भी सख्ती बरती जाएगी. सरकार का कहना है कि इस तरह की गतिविधियां सेवा आचार संहिता का उल्लंघन हैं और ऐसे मामलों में विभागीय कार्रवाई की जाएगी.

किस नियम के तहत होगी कार्रवाई?

यह पूरा प्रावधान बिहार सरकारी सेवक आचार नियमावली, 1976 के तहत लागू किया जाएगा. नियम 9 के उपनियम (2) के बाद नया उपनियम (3) जोड़ने का प्रस्ताव है. जिसमें मीडिया प्लेटफॉर्म और इंस्टेंट मैसेजिंग ऐप के उपयोग से जुड़े नियम शामिल होंगे. अपर मुख्य सचिव बी. राजेंद्र के अनुसार, सरकार इस विषय को लेकर पूरी तरह गंभीर है और स्पष्ट दिशा-निर्देशों के जरिए प्रशासनिक अनुशासन और सरकारी व्यवस्था की मर्यादा बनाए रखना चाहती है.

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Abhinandan Pandey

लेखक के बारे में

By Abhinandan Pandey

भोपाल से शुरू हुई पत्रकारिता की यात्रा ने बंसल न्यूज (MP/CG) और दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अनुभव लेते हुए अब प्रभात खबर डिजिटल तक का मुकाम तय किया है. वर्तमान में पटना में कार्यरत हूं और बिहार की सामाजिक-राजनीतिक नब्ज को करीब से समझने का प्रयास कर रहा हूं. गौतम बुद्ध, चाणक्य और आर्यभट की धरती से होने का गर्व है. देश-विदेश की घटनाओं, बिहार की राजनीति, और किस्से-कहानियों में विशेष रुचि रखता हूं. डिजिटल मीडिया के नए ट्रेंड्स, टूल्स और नैरेटिव स्टाइल्स के साथ प्रयोग करना पसंद है.

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