Bihar Bhumi: (मोनु कुमार मिश्रा, बिहटा) बिहार के उपमुख्यमंत्री और राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के मंत्री विजय कुमार सिन्हा एक्शन मोड में हैं. लोगों के जमीन से जुड़ी समस्याओं को सुन रहे और अधिकारियों को कड़क आदेश भी दे रहे हैं. इसी कड़ी में पटना जिले के बिहटा अंचल में मेगा इंडस्ट्रियल पार्क (भूमि बैंक) के लिए अधिग्रहित जमीन के मुआवजे में बड़ा घोटाला सामने आया है.
इन सभी पर FIR हुआ दर्ज
दरअसल, निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने जांच में पाया कि किसानों को दिये जाने वाले लगभग 55 लाख रुपये कागजों में फर्जी इंट्री कर निकाल लिये गये. इस मामले में निगरानी थाने में पटना के तत्कालीन जिला भू-अर्जन पदाधिकारी, अपर जिला भू अर्जन अधिकारी, भू-अर्जन कार्यालय के कानूनगो, सहायक, प्रधान सहायक और अमीन और अंचल कार्यालय बिहटा तत्कालीन सीओ और राजस्व कर्मचारी और एक बाहरी व्यक्ति सहित टोटल 11 के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर लिया गया है.
क्या है पूरा मामला?
जानकारी के मुताबिक, मामला मौजा सिकंदरपुर से जुड़ा भूमि अधिग्रहण वाद संख्या 01/2011-12 का है. राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग को 11 किसानों की ओर से शिकायत मिली थी कि उन्हें मिलने वाला मुआवजा बैंक खातों तक नहीं पहुंचा. शिकायत के आधार पर निगरानी ने फाइलों, भुगतान आदेशों और रिकॉर्ड का मिलान किया और सामने आया कि किसानों के नाम पर दस्तावेज गढ़कर भुगतान दिखाया गया. इस मामले में जांच जारी है.
जांच में और क्या कुछ हुआ क्लियर?
निगरानी की जांच में यह क्लियर हुआ कि यह घोटाला अकेले नहीं हो सकता था. मुआवजा प्रस्ताव, सत्यापन, भुगतान आदेश और पासिंग, हर लेवल पर गड़बड़ी की गयी. निगरानी की प्राइमरी रिपोर्ट के मुताबिक, इसमें भू-अर्जन कार्यालय और अंचल कार्यालय के कई अफसर-कर्मी शामिल रहे. एक बाहरी व्यक्ति ने दलाल की भूमिका निभायी. किसानों के नाम पर जाली एंट्री बनायी गयी.
इसके बाद गलत भुगतान आदेश तैयार कर फाइलों में क्लियर दिखाकर रकम निकाली गयी. निगरानी के एक अधिकारी की माने तो, यह मामला संगठित साजिश का है, जिसमें किसानों के अधिकार वाले पैसे का योजना बनाकर गबन किया गया. इस पूरे मामले की जांच आगे भी जारी रहेगी.
राजस्व पदाधिकारियों को भी आदेश
इसके साथ ही राजस्व पदाधिकारियों को भी आदेश दिया गया है. दरअसल, जमीन के एक जैसे मामलों में अलग फैसला करने पर संबंधित राजस्व पदाधिकारी को इसका स्पष्ट कारण बताना होगा. साथ ही पहचान देखकर आदेश देना, दबाव में अलग व्यवहार करना, चयन कर सख्ती लगाने पर रोक लगायी गयी है. इन सभी दिशा-निर्देशों के सख्त पालन की जिम्मेदारी जिला समाहर्ताओं को सौंपी गयी है.
प्रधान सचिव ने लेटर में क्या कुछ लिखा?
दरअसल, इस संबंध में राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के प्रधान सचिव सीके अनिल ने एक लेटर जारी कर सभी राजस्व पदाधिकारियों को दिशा-निर्देश दिया है. राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के इस लेटर के मुताबिक, प्रशासनिक और अर्द्ध-न्यायिक कार्यों में संविधान के अनुच्छेद 14 और समता सिद्धांत का अनिवार्य रूप से पालन करने का निर्देश दिया गया है. इसका मकसद समान परिस्थिति वाले मामलों में समान फैसला देना सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है.

