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बूचड़खाने के सवाल पर भड़के नीतीश कुमार, योगी आदित्यनाथ को दी यह सलाह

Updated at : 03 Apr 2017 1:43 PM (IST)
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बूचड़खाने के सवाल पर भड़के नीतीश कुमार, योगी आदित्यनाथ को दी यह सलाह

पटना : बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सोमवार को लोक संवाद कार्यक्रम के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि पूरे देश में शराबबंदी लागू होनी चाहिए. नीतीश कुमार ने कहा कि सही मायने में यदि केंद्र सरकार को चंपारण सत्याग्रह और राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के प्रति सच्ची प्रतिबद्धता है, तो पूरे देश […]

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पटना : बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सोमवार को लोक संवाद कार्यक्रम के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि पूरे देश में शराबबंदी लागू होनी चाहिए. नीतीश कुमार ने कहा कि सही मायने में यदि केंद्र सरकार को चंपारण सत्याग्रह और राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के प्रति सच्ची प्रतिबद्धता है, तो पूरे देश में शराबबंदी लागू होनी चाहिए. उन्होंने कहा कि मैंने पहले अखिलेश यादव और छतीसगढ़ के मुख्यमंत्री से भी शराबबंदी की अपील की थी. अब यूपी के वर्तमान मुख्यमंत्री से भी शराबबंदी की अपील करता हूं. अवैध बूचड़खानों के सवाल पर भड़कते हुए कहा उन्होंने कहा कि यह कोई मुद्दा ही नहीं है. असल मुद्दा आजकल मीडिया के केंद्र से गायब है. मीडिया में रोजगार, शिक्षा, कृषि और स्वरोजगार का मुद्दे पर न बहस की जाती और न ही कोई सवाल होते.

मीडिया नॉन इश्यू ज्यादा उठा रहा है-नीतीश

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि बिहार में 1955 से कानून है और वह पूरी तरह लागू है. बिहार में कोई भी अवैध तरीके से बूचड़खाना नहीं चला सकता. नीतीश ने यूपी में बीजेपी को मिली जीत और चुनाव के दौरान किये गये वायदे को याद दिलाते हुए कहा कि किसानों का कर्ज माफ करने की बात कहकर सत्ता में आये हैं, तो उसे पूरा क्यों नहीं करते हैं. नीतीश कुमार ने कहा कि आजकल नॉन इश्यू को मीडिया में मुख्य मुद्दा बनाया जा रहा है. शराबबंदी और सामाजिक मसले पर कोई मुद्दा नहीं बनाया जाता. आजकल ऐसे मुद्दे उठाये जा रहे हैं, ताकि लोग मूल मुद्दे को भूल जाएं. बूचड़खाना का मुद्दा भी कुछ इसी तरह का है. यह मुद्दा समस्याओं से ध्यान हटाने का मुद्दा है.

राज्यों का रिस्पांस स्लो है-सीएम

सीएम ने कहा कि सभी राज्यों की परिस्थितियां अलग-अलग होती हैं. दिल्ली में आम आदमी पार्टी मजबूत विकल्प बनी, ठीक उसी तरह पंजाब में कांग्रेस बनी. यूपी की बात अलग है. उन्होंने कहा कि यूपी में व्यापक विपक्षी एकता नहीं थी. जितना वोट बीजेपी को मिला, यदि हम बीएसपी, सपा और कांग्रेस के वोटों को एक साथ मिला दें, तो वह बीजेपी से 10 फीसदी ज्यादा है. वहां की परिस्थिति काफी अलग है. मुख्यमंत्री ने साफ कहा कि बिना शराबबंदी के बाकी कोई रास्ता नहीं है. राज्यों का इस मामले में काफी स्लो रिस्पांस है. उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने हाइवे पर शराब 500 मीटर के दायरे के अंदर नहीं बेचने का जो फैसला दिया है, वह स्वागत योग्य है. अब सुनने में आ रहा है कि राज्य सरकारें उन दुकानों को शहरों के अंदर खोल रही हैं. ऐसा नहीं होना चाहिए.

सरकार को राजस्व का नुकसान नहीं-सीएम

नीतीश कुमार ने यह भी कहा कि बिहार में नोटबंदी और शराबबंदी के बाद भी राज्य सरकार को 16-2017 में उतनी आमदनी हुई है, जितनी शराब बिक्री के समय 16-2017 में हुई थी. उन्होंने कहा कि इस बार जो राज्य सरकार की आमदनी के आंकड़े आये हैं, वह गत वित्तीय वर्ष के आंकड़ों से कम नहीं हैं. नीतीश ने कहा कि शराबबंदी से आमदनी घटती है, लेकिन लोगों को नुकसान नहीं होता है. लोगों का पैसा दूसरे अच्छे कामों में लगता है. बिहार में लोगों ने वाहन, कपड़ा, फर्नीचर और बाकी कार्यों में अपना पैसा खर्च किया है.

लोग शराबबंदी के खिलाफ-नीतीश

उन्होंने कहा कि सरकार के खजाने को नुकसान हो रहा था लेकिन लोग अपने 10 हजार करोड़ रुपये गंवा रहे थे. अब लोग इसे बचा रहे हैं. इन सबके बावजूद राज्य सरकार का टैक्स इनकम बराबर है. उन्होंने कहा कि मैं सभी सरकारों से कहूंगा कि अपने-अपने प्रदेश में शराबबंदी को लागू करें. नीतीश कुमार लोक संवाद कार्यक्रम में भाग लेने के बाद मीडिया से बातचीत कर रहे थे.

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